फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   gene chip to detect all types of cancer

एक चिप खोलेगी सभी तरह के कैंसर का राज

Sat, 15 Oct 2016 03:06 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 15 Oct 2016 03:06 PM IST
विज्ञापन
gene chip to detect all types of cancer
डेमो

एक जीन चिप से सभी तरह के कैंसर का पता लगाना संभव है। ये सुविधा जल्द ही केजीएमयू के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के मॉलिक्युलर बायोलॉजी विभाग में शुरू होगी। 

विज्ञापन


तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस जांच के लिए अत्याधुनिक माइक्रोएरे मशीन वहां पहले से ही स्थापित की जा चुकी है। केजीएमयू में शुक्रवार को कैंसर और अनुवांशिक रोगों में जीन तकनीक की उपयोगिता विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. नीतू सिंह ने यह जानकारी दी।
विज्ञापन


केजीएमयू के ब्राउन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मॉलिक्युलर बायोलॉजी विभाग की हेड डॉ. नीतू सिंह ने बताया कि जीन चिप तकनीक पर काम किया जा चुका है।

लगभग डेढ़ साल से विभाग में विभिन्न जांच की तकनीकों का मानकीकरण (स्टैंडर्डाइजेशन) किया जा चुका है। बच्चों के ब्रेन ट्यूमर, क्रॉनिक मॉयलायड ल्यूकीमिया का पता लगाने के लिए तकनीक स्थापित की जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्य व फेफड़ों के कैंसर पर शोध किया जा रहा है। इसके अलावा साइटोजेनेटिक्स जीनोमिक्स तकनीक से बच्चों में पैदाइशी होने वाले अनुवांशिक रोग मानसिक मंदता, डाउन सिंड्रोम का भी पता लगाना संभव हो गया है। 

कैंसर की स्टेज के ‌ह‌िसाब से दवाएं देना संभव

gene chip to detect all types of cancer
डेमो

संजय गांधी पीजीआई के बाद केजीएमयू प्रदेश का दूसरा संस्थान हैं जहां मॉलिक्युलर और जेनेटिक्स दोनों तरह की जांच की सुविधा मिलेगी।

ग्रीनवुड जेनेटिक सेंटर यूएसए से आई डॉ. अलका चौबे ने बताया कि बच्चों के पैदा होने से पहले ही भविष्य में होने वाली अनुवांशिक बीमारियों का पता लगाना संभव है। इसमें गर्भ से एमनिओटिक फ्ल्यूड (तरल पदार्थ) लिया जाता है।

इसके बाद उसमें से कोशिकाओं को निकालकर जांच की जाती है। इससे अनुवांशिक बीमारियों का पता चल जाता है। गर्भस्थ शिशु में अनुवांशिक रोग होने की आशंका दिखती है तो महिला को सलाह दी जाती है कि वह गर्भपात करा ले।

केजीएमयू के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के स्टेम सेल एंड सेल कल्चर विभाग के हेड डॉ. शैलेंद्र सक्सेना ने बताया कि जीनोमिक्स टेक्नोलॉजी के विकास से कैंसर की पहचान जीन स्तर पर ही हो जाती है। इसके बाद टारगेटे थेरेपी देकर मरीज को कैंसर से जीन स्तर पर निजात दिला दी जाती है। 

जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी यूएसए से आए प्रो. राकेश कुमार ने बताया कि जांच की नई सुविधाएं आ जाने से मरीजों को बहुत फायदा हुआ है। पहले कैंसर के सभी स्टेज के लिए एक ही दवा दी जाती थी।

अब कैंसर जिस स्टेज का है उस पॉवर की दवा दी जाती है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की तरह भारत में भी उम्र के अनुसार पूरे शरीर की जांच कराने की जागरूकता लाना जरूरी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed