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अब छात्राओं को बताया जाएगा 'अच्छे-बुरे' का फर्क

Thu, 30 Jul 2015 12:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 30 Jul 2015 12:20 PM IST
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Gender discrimination to be end in schools.

परिषदीय स्कूलों में दाखिला लेने वाली छात्राओं के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं हो पाएगा। शिक्षक छात्र-छात्राओं में कोई अंतर नहीं करेंगे। छात्राओं को यह भी बताया जाएगा कि ‘क्या अच्छा है और क्या बुरा’। वे किन परिस्थितियों में किसकी सहायता लें। इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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स्कूल की दीवारों पर जरूरी जानकारियां जैसे हेल्पलाइन नंबर आदि लिखे जाएंगे। सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक शीतल वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में निर्देश भेज दिए हैं।
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उन्होंने कहा है कि छात्राओं का स्कूलों में दाखिला न लेने व लेने के बाद न आने के कई कारण हैं। समाज में उनके प्रति भेदभाव वाले रवैये के साथ स्कूल का वातावरण भी कभी कभार उन्हें असहज बना देता है।
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यह सुनिश्चित करना होगा कि पढ़ाई के दौरान क्लास रूम, स्कूली गतिविधियों, खेलकूद, मिड-डे मील वितरण, शौचालय के प्रयोग तथा शिक्षक के व्यवहार में किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं हो रहा है।

लगातार ली जाए सुरक्षा की गारंटी

Gender discrimination to be end in schools.

सभी स्तर पर छात्राओं की समान भागीदारी होनी चाहिए। साथ ही बालकों के साथ भी लिंग भेद के मुद्दों पर चर्चा कर उन्हें संवेदनशील व जागरूक बनाया जाए। बेसिक शिक्षा अधिकारी इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दें।

जिला, ब्लॉक व स्कूल स्तर पर होने वाली सभी बैठकों व कार्यशालाओं में लिंग भेद को समाप्त करने पर चर्चा की जाएगी। बालिका शिक्षा की बाधाओं को चिह्नित कर उन्हें दूर करने के उपाय किए जाएंगे।

स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) यह घोषणा करे कि उसका स्कूल बालिकाओं के लिए हर स्तर पर सुरक्षित है। स्कूल को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाएं।

एसएमसी की महिला सदस्य स्कूलों का लगातार दौरा करें और छात्राओं की सुरक्षा के बिंदुओं की जानकारी लें।

रास्ते में छेड़छाड़ पर भी होगा ध्यान

Gender discrimination to be end in schools.

एसएमसी की महिला सदस्य स्कूलों में छात्राओं से मिलकर पूछेंगी कि रास्ते में उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं हो रही है। स्कूल के आसपास तंबाकू, गुटखा आदि की दुकानें नहीं लगने दी जाएंगी।

स्कूल न आने वाली व बीच में पढ़ाई छोड़ने वाली छात्राओं से एसएमसी की महिला सदस्य मिलकर इसकी वजह पूछेंगी। यह भी पता करेंगी कि छात्रा का किसी प्रकार का शोषण तो नहीं हो रहा है। स्कूलों में एक ड्राप बाक्स रखा जाएगा जिससे छात्राएं अपनी किसी भी समस्या को लिखकर उसमें डाल सकें।

सुरक्षा के होंगे विशेष इंतजाम

परियोजना निदेशक ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूलों के आसपास सुरक्षा के उपाय किए जाएं। खासकर बड़ी लड़कियों को स्कूल आने में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

देखने में आया है कि प्राय: बड़ी छात्राएं स्कूल आने में असहज महसूस करती हैं। इसलिए यह देखा जाए कि किसी छात्रा के साथ छेड़छाड की घटना न होने पाए।

उन्हें प्रोत्साहित किया जाए कि इस प्रकार की घटना होने पर वह अपनी बात खुलकर रख सकें। एसएमसी छात्राओं की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करेगी।

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