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पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का जेल में हंगामा, बैरक से निकाला तो जमीन में लेटकर किया ड्रामा

Sun, 19 Jan 2020 06:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 19 Jan 2020 06:38 PM IST
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Gayatri Prajapati made ruckus in jail to skip hearing in court.
पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala

गैंगरेप के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। इससे पहले बीमारी का बहाना बनाकर वह पेशी में जाने से इनकार कर रहा था। जेल अधिकारियों के दबाव बनाने पर उसने जमकर हंगामा किया। समझाने के बाद वह बैरक से नहीं निकला तो उसे जबर्दस्ती बाहर निकाला गया।

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बैरक से दूसरे गेट पर व्हीलचेयर पर ले जाया गया। वहां व्हीलचेयर से उतरने के बाद उसने जमीन पर लेटकर हंगामा करना शुरू कर दिया। कहा, बहुत बीमार हूं, कमर में दर्द है। चलने और खड़ा होने में असमर्थ हूं। इसके बाद जेल प्रशासन ने 11.30 बजे उसे व्हीलचेयर पर ले जाकर पुलिस वैन में बैठा दिया।
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गौरतलब है कि गायत्री को कोर्ट में पेश कराने के लिए शासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके मद्देनजर शनिवार सवेरे नौ बजे भारी संख्या में पुलिस बल जिला जेल पहुंची। दरअसल, शुक्रवार को गायत्री को केजीएमयू के प्राइवेट वार्ड से जिला जेल शिफ्ट किया गया था।
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जेल में शिफ्ट होने से पहले गायत्री ने केजीएमयू में भी जमकर हंगामा किया था। इतना ही नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद भी गायत्री करीब पांच घंटे तक केजीएमयू में रहा और सिफारिश करता रहा, लेकिन शासन की सख्ती के आगे उसकी एक न चली। उसे देखते हुए शनिवार की पेशी को लेकर जेल अधिकारी भी अलर्ट थे। उन्हें अंदेशा था कि वह जेल में भी हंगामा करेगा।

अदालत ने भी जताई थी नाराजगी

पेशी के लिए कोर्ट भेजने को लेकर शासन के अधिकारी भी जेल अधिकारी से लगातार संपर्क में थे। लगातार कई पेशियों में सुनवाई के लिए गायत्री की बीमारी पर स्पष्ट जवाब दाखिल न करने के कारण अदालत भी काफी नाराज था। इसलिए अदालत ने शनिवार को केजीएमयू और जेल अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। इसे देखते हुए शासन ने शुक्रवार को गायत्री को केजीएमयू से जबर्दस्ती डिस्चार्ज कराकर जेल भेज दिया। जिससे उसे शनिवार को पेशी में भेजा जा सके।

जेल अफसरों ने गायत्री को डिस्चार्ज करने के लिए केजीएमयू को लिखे दर्जनों पत्र
जेल अधिकारियों ने गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को केजीएमयू से डिस्चार्ज करने के लिए नौ महीने में दर्जनों पत्र लिखे। इसके बावजूद डॉक्टरों ने डिस्चार्ज नहीं किया। शुक्रवार को भी जेल प्रशासन ने डिस्चार्ज के लिए केजीएमयू से संपर्क किया।

सूत्रों का कहना है कि केजीएमयू प्रशासन के सुस्त रवैये को देखते हुए जेल अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया। बाद में शासन की फटकार के बाद गायत्री को डिस्चार्ज कर दिया गया। जेल पहुंचने पर सामान की तलाशी के दौरान गायत्री ने जमकर हंगामा काटा और खुद को पूर्व मंत्री बताकर तलाशी का विरोध किया। मगर जेल कर्मियों ने उसकी एक न सुनी और सामान की सघन तलाशी के बाद ही बैरक भेजा।

गायत्री मामले में अगली सुनवाई 31 को

गायत्री प्रसाद प्रजापति को शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय की अदालत में पेश किया गया। इस दौरान प्रजापति ने जेल में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने और पीड़िता को गवाही के लिए फिर से बुलाने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि इस मामले में सभी आरोपित जेल में हैं। वहीं, चित्रकूट की पीड़िता की गवाही भी काफी पहले हो चुकी है। परंतु बचाव पक्ष की ओर से एक अर्जी देकर कहा गया है कि पीड़िता से कुछ बिंदुओं पर जिरह करनी है। इसलिए उसे कोर्ट में तलब किया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी।

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