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गायत्री प्रजापति व बेटे को नहीं मिली पैरोल, तेरहवीं में शामिल होने के लिए दाखिल याचिका खारिज

Mon, 22 Feb 2021 09:42 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 22 Feb 2021 09:42 PM IST
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Gayatri Prajapati and son did not get parole, petition filed to join thirteenth dismissed
लखनऊ हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उनके बेटे अनिल कुमार प्रजापति को एक परिवारीजन के दसवें व तेरहवीं संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर इनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। गैंगरेप व फर्जीवाड़ा आदि के केसों में आरोपी गायत्री ने अपने भतीजे शुभम के 24 व 25 फरवरी को होने वाले अंतिम संस्कारों में शामिल होने के लिए अमेठी के परसावा गांव में ले जाने के निर्देश पक्षकारों को देने की गुजारिश की थी।
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न्यायमूर्ति आलोक सिंह और न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश गायत्री की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि उसके भतीजे शुभम (22) की गत 12 फरवरी को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी, जिसका दसवां 24 फरवरी को व तेरहवीं 25 को होनी है। उधर, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची की पहले हाईकोर्ट से अल्प अवधि जमानत (पैरोल) मंजूर हुई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। शाही ने दलील दी कि याची की जमानत अर्जी अभी लंबित है और वह न्यायिक आदेश से हिरासत में है। ऐसे में याची की परमादेश जारी करने के आग्रह वाली यह याचिका खारिज करने लायक है।
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कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। उधर सोमवार को ही न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खां की एकल पीठ ने फर्जीवाड़ा के केस में जेल में बंद अनिल प्रजापति की पैरोल अर्जी को खारिज कर दिया। गायत्री के बेटे अनिल ने भी अपने चचेरे भाई शुभम के उक्त अंतिम संस्कारों में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। इस पर अपर शासकीय अधिवक्ता आलोक सरन ने पैरोल अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया कि अर्जी दाता पेरोल पाने लायक नहीं है। इस पर अर्जी दाता के वकील ने अर्जी वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए अर्जी खारिज कर दी।
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