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वीवीआईपी इलाके को छोड़ 80 वार्डों में दस दिनों से कूड़ा उठान व्यवस्था चौपट
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राजधानी में दस दिनों से कूड़ा उठान व्यवस्था चौपट है। इसके चलते पड़ाव घरों पर कई-कई ट्रक कूड़ा डंप है। इस बीच दीपावली भी गुजर गई, पर जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी हैं।
इस वक्त करीब 15 हजार मीट्रिक टन कूड़ा पटा पड़ा है। यह समस्या वीवीआईपी इलाके को छोड़कर शहर के करीब 80 वार्डों की है। परेशान नागरिकों का कहना है कि यही हालात रहे तो गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
यही लापरवाही रही तो देश में स्वच्छता रेटिंग की टॉप थ्री की उम्मीद तो दूर मौजूदा 12वीं रेटिंग से भी नीचे खिसकना पड़ सकता है, क्योंकि कूड़ा उठान का काम अब भी करीब 25 प्रतिशत बमुश्किल हो पा रहा है।
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इस पर अफसरों ने सफाई दी है कि अभी जरूरत का महज 25 प्रतिशत डीजल ही मिल पा रहा है। वहीं, शहर में रोजाना करीब 1500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है जो दीपावली में बढ़कर करीब 2000 मीट्रिक टन हो गया।
स्वच्छता सर्वेक्षण कम्प्टीशन-2022 को लेकर जारी गाइड लाइन के तहत गार्बेज फ्री सिटी प्रमाणपत्र और ओडीएफ प्रमाण पर इस बार 200 नंबर ज्यादा दिए जाएंगे। पहले इसके लिए 1800 नंबर थे।
फिर भी दस दिनों से शहर में कूड़ा उठान ठप है। विवेकानंदपुरी वार्ड और बेगम हजरतमहल बजरंग बली वार्ड के पार्षद मो. सलीम कहते हैं कि ऐसा पहली बार है जब दीपावली पर भी पड़ाव घरों से कूड़े उठान नहीं हुआ। पड़ाव घरों पर इतना कूड़ा जमा हो गया कि सड़क पट गई है।
डिजिटल निगरानी का सिस्टम भी बेपटरी
पिछली बार की तुलना में इस बार तकनीक के उपयोग और निगरानी में बड़ा बदलाव किया गया है। इससे पिछली बार की तुलना में मुकाबला कठिन हो गया है। कम्प्टीशन में इस बार सिटीजन फीडबैक के बजाय डिटिजल मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया गया, इसमें कूड़ा कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और प्लांट पर निस्तारण तक के पूरे सिस्टम की डिजिटल मॉनिटिरंग पर जोर दिया गया, ताकि यह पता चल कि सके कि घरों से कूड़ा कलेक्शन से लेकर प्लांट पर निस्तारण तक का काम सही से हो रहा है या नहीं। इसके लिए गाड़ियों में जीपीएस, प्लांट पर सीसीटीवी कैमरे, कूड़ा निस्तारण प्लांट की अपडेट डिजिटल लोकेशन पर जोर दिया गया, लेकिन यह सब फेल है। प्लांट पर कूड़ा निस्तारण का यह हाल है कि कई लाख मीट्रिक टन कूड़ा डंप है। गाड़ियों में जीपीएस पूरी तरह काम नहीं कर रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन छह लाख में से महज तीन लाख घरों तक ही हो पा रहा है। सफाई कर्मियों की हाजिरी के लिए स्मार्ट मोबाइल सिस्टम भी फेल है। दस हजार में महज दो हजार कर्मचारियों की हाजिरी ही स्मार्ट मोबाइल से जुड़ी है।
सफाई : डीजल की किल्लत से पैदा हुए हालात
कूड़ा उठान से जुड़े अफसरों से बताया कि पेट्रोल पंप वाले बकाया भुगतान न मिलने से डीजल नहीं दे रहे हैं। इसके कारण कूड़ा उठान ठप है। किसी तरह मिल पा रहे डीजल से 25 प्रतिशत भी गाड़ियां नहीं निकल पा रही हैं। एक जोनल अफसर ने बताया कि रोज करीब दो हजार लीटर डीजल की जरूरत है, पर 500-600 लीटर ही किसी तरह मिल पा रहा है।
डीजल की किल्लत को दूर किया जा रहा है। कई पेट्रोल पंप मालिकों को भुगतान किया गया है। जल्द ही सभी पड़ाव घरों से कूड़े का उठान हो जाएगा। यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर कराया जाएगा। स्वच्छता रेटिंग पिछले साल से बेहतर रहेगी, इसे लेकर पूरा प्रयास किया जा रहा है। रेटिंग को लेकर जो भी काम करने हैं, उनकी समीक्षा की जा रही है।
- अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त प्रशासन
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इस वक्त करीब 15 हजार मीट्रिक टन कूड़ा पटा पड़ा है। यह समस्या वीवीआईपी इलाके को छोड़कर शहर के करीब 80 वार्डों की है। परेशान नागरिकों का कहना है कि यही हालात रहे तो गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
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यही लापरवाही रही तो देश में स्वच्छता रेटिंग की टॉप थ्री की उम्मीद तो दूर मौजूदा 12वीं रेटिंग से भी नीचे खिसकना पड़ सकता है, क्योंकि कूड़ा उठान का काम अब भी करीब 25 प्रतिशत बमुश्किल हो पा रहा है।
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इस पर अफसरों ने सफाई दी है कि अभी जरूरत का महज 25 प्रतिशत डीजल ही मिल पा रहा है। वहीं, शहर में रोजाना करीब 1500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है जो दीपावली में बढ़कर करीब 2000 मीट्रिक टन हो गया।
स्वच्छता सर्वेक्षण कम्प्टीशन-2022 को लेकर जारी गाइड लाइन के तहत गार्बेज फ्री सिटी प्रमाणपत्र और ओडीएफ प्रमाण पर इस बार 200 नंबर ज्यादा दिए जाएंगे। पहले इसके लिए 1800 नंबर थे।
फिर भी दस दिनों से शहर में कूड़ा उठान ठप है। विवेकानंदपुरी वार्ड और बेगम हजरतमहल बजरंग बली वार्ड के पार्षद मो. सलीम कहते हैं कि ऐसा पहली बार है जब दीपावली पर भी पड़ाव घरों से कूड़े उठान नहीं हुआ। पड़ाव घरों पर इतना कूड़ा जमा हो गया कि सड़क पट गई है।
डिजिटल निगरानी का सिस्टम भी बेपटरी
पिछली बार की तुलना में इस बार तकनीक के उपयोग और निगरानी में बड़ा बदलाव किया गया है। इससे पिछली बार की तुलना में मुकाबला कठिन हो गया है। कम्प्टीशन में इस बार सिटीजन फीडबैक के बजाय डिटिजल मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया गया, इसमें कूड़ा कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और प्लांट पर निस्तारण तक के पूरे सिस्टम की डिजिटल मॉनिटिरंग पर जोर दिया गया, ताकि यह पता चल कि सके कि घरों से कूड़ा कलेक्शन से लेकर प्लांट पर निस्तारण तक का काम सही से हो रहा है या नहीं। इसके लिए गाड़ियों में जीपीएस, प्लांट पर सीसीटीवी कैमरे, कूड़ा निस्तारण प्लांट की अपडेट डिजिटल लोकेशन पर जोर दिया गया, लेकिन यह सब फेल है। प्लांट पर कूड़ा निस्तारण का यह हाल है कि कई लाख मीट्रिक टन कूड़ा डंप है। गाड़ियों में जीपीएस पूरी तरह काम नहीं कर रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन छह लाख में से महज तीन लाख घरों तक ही हो पा रहा है। सफाई कर्मियों की हाजिरी के लिए स्मार्ट मोबाइल सिस्टम भी फेल है। दस हजार में महज दो हजार कर्मचारियों की हाजिरी ही स्मार्ट मोबाइल से जुड़ी है।
सफाई : डीजल की किल्लत से पैदा हुए हालात
कूड़ा उठान से जुड़े अफसरों से बताया कि पेट्रोल पंप वाले बकाया भुगतान न मिलने से डीजल नहीं दे रहे हैं। इसके कारण कूड़ा उठान ठप है। किसी तरह मिल पा रहे डीजल से 25 प्रतिशत भी गाड़ियां नहीं निकल पा रही हैं। एक जोनल अफसर ने बताया कि रोज करीब दो हजार लीटर डीजल की जरूरत है, पर 500-600 लीटर ही किसी तरह मिल पा रहा है।
डीजल की किल्लत को दूर किया जा रहा है। कई पेट्रोल पंप मालिकों को भुगतान किया गया है। जल्द ही सभी पड़ाव घरों से कूड़े का उठान हो जाएगा। यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर कराया जाएगा। स्वच्छता रेटिंग पिछले साल से बेहतर रहेगी, इसे लेकर पूरा प्रयास किया जा रहा है। रेटिंग को लेकर जो भी काम करने हैं, उनकी समीक्षा की जा रही है।
- अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त प्रशासन