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Lucknow News: जालसाज कर रहे थे अभ्यर्थियों का मेडिकल
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लखनऊ। सेना में भर्ती के लिए आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट के नाम पर धोखाधड़ी करने व कूटरचित नियुक्ति पत्र देने वाले रिटायर्ड सैनिक व बर्खास्त सैनिक सहित तीन जालसाजों को एसटीएफ ने शुक्रवार को कैंट स्थित कमांड हाॅस्पिटल से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से सेना से संबंधित दस्तावेज, आश्रित कार्ड, डिफेंस पास, सेना की आईडी समेत तमाम दस्तावेज बरामद हुए हैं।
बता दें कि एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने कुछ समय पहले सेना में शारीरिक दक्षता परीक्षा पास अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक मेडिकल टेस्ट पास कराने के नाम पर धन उगाही करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस प्रकरण में सैनिक पोले वोहना बाला कसइया का नाम जांच में सामने आया था। कोर्ट ऑफ इंक्वाइरी के बाद सेना ने उसका कोर्ट मार्शल किया था।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि राजधानी में सेना के किसी सैनिक के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट पास कराने के साथ ही कूटरचित नियुक्ति पत्र जारी करके धन उगाही हो रही है। इसके लिए कमांड अस्पताल में अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। ओपीडी बंद होने के बाद मेडिकल होना है। सूचना पर एसटीएफ की टीम ने शुक्रवार को कमांड अस्पताल परिसर से तेलीबाग निवासी रिटायर्ड सैनिक अजीत कुमार, राजस्थान के धौलपुर निवासी हरिओम उर्फ नकुल और वृंदावन योजना निवासी पोले वाेहना बाला कसइया को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
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कमांड हॉस्पिटल में बाला और अजीत कुमार सेना के अधिकारी बनकर अभ्यर्थियों का फर्जी मेडिकल करा रहे थे। जिसके लिए उन्हें चार लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी मिलना था। अभ्यर्थियों से 21 लाख रुपये बाला ने अपनी पत्नी नागेश्वरी देवी के पिता के बैंक खाते में मंगवाए थे। धोखाधड़ी से हासिल होने वाले धन का सारा लेखाजोखा उसकी पत्नी ही रखती है। एसटीएफ ने तीनों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोपी पोले वोहना ने पूछताछ में बताया कि वह 2002 में सेना में भर्ती हुआ था। वर्ष 2021 में गबन व नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगी के आरोप में पकड़े जाने पर सेना से निकालने के साथ ही कोर्ट मार्शल कर जेल भेज दिया गया था। उसके साथी स्वप्निल सूर्यवंशी व पवन राज को भी सेना से निकाल दिया गया था। वर्ष 2022 में जेल से छूटने के बाद वह लोगों के फर्जी प्रपत्र बनवाकर लोन दिलाने लगा, जिसमें उसे अच्छा कमीशन मिलता था। इस दौरान उसका संपर्क पूर्व सैनिक अजीत, अभिषेक मिश्र उर्फ अभिराज व हरिओम उर्फ नकुल से हुआ। ये सभी गिरोह बनाकर बेरोजगार युवकों से सेना में भर्ती के नाम पर चार से पांच लाख रुपये लेते थे। वह भी उनके गिरोह में शामिल हो गया।
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बता दें कि एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने कुछ समय पहले सेना में शारीरिक दक्षता परीक्षा पास अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक मेडिकल टेस्ट पास कराने के नाम पर धन उगाही करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस प्रकरण में सैनिक पोले वोहना बाला कसइया का नाम जांच में सामने आया था। कोर्ट ऑफ इंक्वाइरी के बाद सेना ने उसका कोर्ट मार्शल किया था।
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एसटीएफ को सूचना मिली थी कि राजधानी में सेना के किसी सैनिक के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट पास कराने के साथ ही कूटरचित नियुक्ति पत्र जारी करके धन उगाही हो रही है। इसके लिए कमांड अस्पताल में अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। ओपीडी बंद होने के बाद मेडिकल होना है। सूचना पर एसटीएफ की टीम ने शुक्रवार को कमांड अस्पताल परिसर से तेलीबाग निवासी रिटायर्ड सैनिक अजीत कुमार, राजस्थान के धौलपुर निवासी हरिओम उर्फ नकुल और वृंदावन योजना निवासी पोले वाेहना बाला कसइया को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
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कमांड हॉस्पिटल में बाला और अजीत कुमार सेना के अधिकारी बनकर अभ्यर्थियों का फर्जी मेडिकल करा रहे थे। जिसके लिए उन्हें चार लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी मिलना था। अभ्यर्थियों से 21 लाख रुपये बाला ने अपनी पत्नी नागेश्वरी देवी के पिता के बैंक खाते में मंगवाए थे। धोखाधड़ी से हासिल होने वाले धन का सारा लेखाजोखा उसकी पत्नी ही रखती है। एसटीएफ ने तीनों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोपी पोले वोहना ने पूछताछ में बताया कि वह 2002 में सेना में भर्ती हुआ था। वर्ष 2021 में गबन व नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगी के आरोप में पकड़े जाने पर सेना से निकालने के साथ ही कोर्ट मार्शल कर जेल भेज दिया गया था। उसके साथी स्वप्निल सूर्यवंशी व पवन राज को भी सेना से निकाल दिया गया था। वर्ष 2022 में जेल से छूटने के बाद वह लोगों के फर्जी प्रपत्र बनवाकर लोन दिलाने लगा, जिसमें उसे अच्छा कमीशन मिलता था। इस दौरान उसका संपर्क पूर्व सैनिक अजीत, अभिषेक मिश्र उर्फ अभिराज व हरिओम उर्फ नकुल से हुआ। ये सभी गिरोह बनाकर बेरोजगार युवकों से सेना में भर्ती के नाम पर चार से पांच लाख रुपये लेते थे। वह भी उनके गिरोह में शामिल हो गया।