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स्कैनर से तैयार कर थमा दे रहे हूबहू पीजीआई जैसी कोविड रिपोर्ट, यूं खुला मामला

Sat, 08 Aug 2020 03:06 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 08 Aug 2020 03:06 PM IST
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fraudsters are preparing fake covid reports in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

कोरोना के संकट के बीच एसजीपीजीआई के आसपास जालसाज सक्रिय हो गए हैं। ये मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दर पर और जल्द जांच रिपोर्ट देने का हवाला देकर रुपये ऐंठते हैं और कुछ समय बाद स्कैनर से हूबहू पीजीआई की लैब की रिपोर्ट की तरह जाली रिपोर्ट बनाकर दे देते हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब पीजीआई प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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एसजीपीजीआई में इलाज कराने प्रदेश के विभिन्न जिलों से मरीज आते हैं। यहां मरीज और तीमारदार की जांच रिपोर्ट होने के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। कोरोना काल को देखते हुए यह नियम बनाया गया है कि जिन तीमारदारों के पास जांच रिपोर्ट होगी, उन्हें ही वार्ड में जाने दिया जाएगा।
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ये मरीज व तीमारदार आसपास के गेस्ट हाउस में रुकते हैं। इनका फायदा ये जालसाज उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों कई ऐसी रिपोर्ट पाई गईं, जो हूबहू पीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी लैब की तरह थी, लेकिन उस पर दर्ज केस आईडी का मिलान किया गया तो पता चला कि संबंधित सैंपल जमा ही नहीं हुआ है।
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इसी तरह कुछ मरीज रुपये जमा होने का पर्चा लेकर पीजीआई आए और अपनी रिपोर्ट मांगने लगे। जब मिलान किया गया तो पता चला कि उन्हें फर्जी रसीद थमाई गई है। लगातार आ रहे इन मामलों को देखते हुए सिक्योरिटी कमेटी के चेयरमैन प्रो. एसपी अंबेश ने शुक्रवार को पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मरीज व तीमारदार से पूछताछ के बाद जांच शुरू कर दी है।



 

ऐसे तैयार करते हैं जाली रिपोर्ट

सूत्र बताते हैं कि इस खेल में लगे जालसाज एसजीपीजीआई से जारी होने वाली कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव की रिपोर्ट इकट्ठा करते हैं। फिर स्कैनर के सहारे मरीज का विवरण दर्ज करते हैं। निगेटिव वाली सीरीज के आधार पर ही केस आईडी दर्ज कर देते हैं। यह काम इतनी सफाई से होता है कि रिपोर्ट देखने के बाद सामान्य व्यक्ति पकड़ ही नहीं सकता है।

जाली जांच रिपोर्ट बनाने का खेल करीब दो माह से चल रहा है। इस संबंध में छिटपुट शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन पीजीआई के कार्डियोलॉजी एमआईसीयू में भर्ती होने आए बिहार के एक मरीज ने कोविड की रिपोर्ट निगेटिव दिखाई। शक के आधार पर माइक्रोबायोलॉजी लैब से मिलान किया गया तो पता चला कि संबंधित केस आईडी और नाम के किसी व्यक्ति की जांच ही नहीं हुई है। तीमारदार से पूछताछ की गई तो उसने पूरे खेल का खुलासा किया। उसने बताया कि दो हजार रुपये लेकर बाहर एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दी है।

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