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सबसे सुरक्षित बायोमीट्रिक फिंगर प्रिंट सिस्टम में सेंधमारी, दो गिरफ्तार

Fri, 26 Feb 2021 01:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2021 01:38 AM IST
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Fraudster stolen information from biometric finger print system, two arrest
पुलिस की गिरफ्त में आए दो ठग। - फोटो : ??? ?????
बायोमीट्रिक फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर खाते से रकम उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश साइबर क्राइम सेल व कृष्णानगर पुलिस ने किया है।
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यह गिरोह भारत सरकार के भूलेख वेबसाइट से आधारकार्ड व अंगूठे के निशान सहित कई अहम डाटा चोरी कर खातों से रुपये निकालने का कारोबार करते थे।
आरोपी आधारकार्ड से लिंक किसी भी खाते से पूरी रकम पार देते थे। संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक, दोनों आरोपी सैकड़ों लोगों के खातों से लाखों रुपये उड़ा चुके हैं।
जेसीपी के मुताबिक, कृष्णानगर निवासी एक व्यक्ति के खाते से 50 हजार रुपये निकाले गए थे। इस संबंध में पीड़ित के पास कोई वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) नहीं आया था और न ही उसने खाते की जानकारी साझा की थी।
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पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत की तो बाद में कृष्णानगर थाने में केस दर्ज किया गया। छानबीन में सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बॉयोमीट्रिक डाटा की क्लोनिंग का मामला उजागर हुआ।
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साइबर क्राइम सेल व कृष्णानगर पुलिस ने वाराणसी में दबिश देकर दो आरोपियों आजमगढ़ के ताहिरपुर, सरूपहां देवगांव निवासी देवेंद्र कुमार मौर्या और अमरौना चंडवक जौनपुर निवासी रमेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
आधार कार्ड से जुड़ी कंपनी में करता था काम
एसीपी साइबर क्राइम सेल के मुताबिक, पूछताछ में देवेंद्र ने बताया कि वह पेईनर कंपनी में काम करता है। यह कंपनी एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) का काम करती है। आरोपियों के पास कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर आईडी पासवर्ड है। इसके जरिए वह किसी को भी आधार से रुपये निकालने वाली सेवा के लिए पासवर्ड उपलब्ध करा देता है। वह किसी के भी आधारकार्ड व उसके फिंगर प्रिंट के माध्यम से रुपये निकाल सकता है। देवेंद्र ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के तहत रकम निकासी की प्रक्रिया जानने के बाद साथी रमेश संग फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। आरोपियों को पता चला कि आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट से वह किसी का भी खाता खंगाल सकते हैं। इसके लिए संबंधित का खाता आधार से लिंक होना चाहिए। इसके बाद आरोपियों ने भूलेख वेबसाइट पर अपलोड बैनामाधारकों का आधार कार्ड व फिंगर प्रिंट डाउनलोड कर लिए। इसके बाद थर्मल स्कैनर, बटर पेपर, इमेज बूस्टर व थिनर की मदद से भूलेख पर उपलब्ध फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर लेते थे। फिर इसे बॉयोमीट्रिक मशीन पर लगाकर आधारकार्ड नंबर डालते थे और खाते खाली कर देते थे।
सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप
सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बायोमीट्रिक प्रणाली में सेंधमारी से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप है। जेसीपी से लेकर कई अधिकारियों ने आरोपियों से पूछताछ की। कई वेबसाइट पर उपलब्ध बायोमीट्रिक डाटा की क्लोनिंग की जानकारी भी मिली। यह जानकारी उच्चाधिकारियों ने प्रदेश व केंद्र सरकार को दे दी है। वेबसाइट की देखरेख करने वाली कंपनियों को भी इससे अवगत कराया गया है। पुलिस संबंधित विभाग से बातचीत कर खामियों को दूर कराने में जुट गई है। आरोपियों के पास से क्लोन फिंगर प्रिंट के नमूने भी बरामद किए गए हैं।
रिटायर्ड दरोगा का बेटा है गिरोह का मास्टरमाइंड
आरोपी देवेंद्र कुमार मौर्या के पिता पुलिस विभाग में दरोगा के पद से रिटायर्ड हैं। पूछताछ में देवेंद्र ने कुबूला कि जिस कंपनी में वह काम करता है, उसमें कुछ कर्मचारियों ने इसी तरह से जालसाजी की थी। लेकिन वे पकड़े नहीं गए। जब मामले का खुलासा हुआ तो उन कर्मचारियों के जालसाजी के पैसों को जुर्माने के रूप में उनसे वसूला गया था। उसने चार लाख से ज्यादा का जुर्माना भरा था। इसकी भरपाई के लिए उसने यह काम शुरू कर दिया था।
ऐसे तैयार करते थे नकली अंगूठा
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी, भूलेख वेबसाइट से आधारकार्ड व अंगूठा का निशान चोरी करते थे। इसके बाद स्कैनर के जरिए बटर पेपर पर अंगूठे के निशान को स्कैन करते थे। फिर बटर पेपर पर आए छाप को केमिकल के जरिए रबड़ (चमड़ी) का अंगूठा तैयार कर लेते थे। इसके बाद आधार कार्ड से कौन से खाते का लिंक है। इसकी जानकारी हासिल करते थे। उस अंगूठे से खाते से रकम आधार इनेबल्ड भुगतान के जरिए अलग-अलग वॉलेट में भेज दिया करते थे। इसके बाद दूरदराज के इलाकों में पासवर्ड के जरिए नकदी निकाल लेते थे।

यह हुआ बरामद
चार मोबाइल, एक स्टांप मशीन (क्लोन फिंगर प्रिंट के लिए), क्लोन फिंगर प्रिंट के नमूने, इमेज बूस्टर, थिनर लिक्विड व जेल, 4 बायोमीट्रिक डिवाइस, सिंगल साइडेट टेप, दो वाटर पेपर।

ठगों से बरामद सामान।

ठगों से बरामद सामान।- फोटो : ??? ?????

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