बीमा के डाटा में सेंध: 2.75 लाख ग्राहकों के चोरी डाटा से जमा कराए इंश्योरेंस प्रीमियम, लालच देकर रकम ऐंठी
जालसाजों ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में कम प्रीमियम जमा करने का लालच देकर 2.75 लाख ग्राहकों का डाटा चोरी कर रकम ऐंठ ली। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना दंपती समेत तीन को गिरफ्तार किया है।
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आपका डाटा ही आपसे ठगी का हथियार बन सकता है! कैसे उसको लिए आपको ये खबर जरूर पढ़नी चाहिए। न केवल पढ़नी चाहिए बल्कि और जागरूक होना चाहिए। जालसाजों ने पहले मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के ग्राहकों का चोरी किया हुआ डाटा खरीदा। एक-दो ग्राहकों का नहीं बल्कि 2.75 लाख ग्राहकों के। डाटा हाथ आते ही इस गिरोह ने लोगों को फोन कर उन्हें प्रीमियम में रियायत देने का झांसा देकर प्रीमियम फर्जी नाम-पते पर खोले गए खातों में जमा करा लिए। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना दंपती समेत तीन को गिरफ्तार किया है। दंपती कॉल सेंटर भी चला रहा था। पहले भी यह दंपती फर्जी कॉल सेंटर चलाने के मामले में गिरफ्तार हुआ था। आरोपी दंपती पर 10-10 हजार का इनाम था। शुरुआती पूछताछ में इस गिरोह ने 200 लोगों से करीब एक करोड़ की ठगी करना कुबूला है। पर, एसटीएफ का मानना है कि ठगी इससे कहीं बहुत ज्यादा बड़ी हो सकती है।
एसटीएफ के प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले इस गिरोह के सरगना दंपती सहित तीन को रविवार को कुर्सी रोड स्थित अवधपुरम सोसायटी से दबोच लिया। ठग दंपती मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के ग्राहकों को कॉल कर उनका प्रीमियम जमा कराने के नाम पर ठगी करते थे। आरोपियों में रायबरेली के पूरे पवारन चक मलिक भीटी निवासी अंकित सिंह, उसकी पत्नी प्रिया सिंह और बहराइच के कैसरगंज डिघवा शेर बहादुर सिंह निवासी अनुज गौड़ है। ठग दंपती को कृष्णानगर पुलिस ने 2017 में फर्जी तरीके से कॉल सेंटर चलाने के मामले में दबोचा था। इस गिरोह में प्रिया कॉलिंग का काम करती थी तो अंकित फर्जी बैंक खाते खोलने व एटीएम से रुपये निकालने का। पूछताछ में सामने आया कि दोनों को इस मामले में तीन महीने बाद जमानत मिली थी। इसके बाद दोनों ने 2019 में घर से ही ठगी शुरू कर दी थी। इसके लिए पहले वाले फर्जी कॉल सेंटर से डेटा चुराकर लाए थे। इसके बाद 2020 में गिरोह बनाकर मालवीय नगर नियर अपेक्स सर्किल ओके प्लस बिल्डिग में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर ठगी शुरू कर दी थी।
10 प्रतिशत कम प्रीमियम जमा करने का देते थे लालच
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को फंसाने के लिए कई स्कीम ऑनलाइन लॉन्च कर रखी थीं। पूछताछ में कुबूला कि मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी बनकर ग्राहकों से कहते थे कि ऑनलाइन भुगतान पर 10 प्रतिशत का प्रीमियम घटाकर जमा करने में आपका नाम लकी कस्टमर में आया है। इसके बाद फर्जी-नाम पते पर खोले गए बैंक खाते देकर रकम मंगवा लेते थे। इसके बाद यह रकम दूसरे खाते में भेज देते थे।
हमें मिलती है सबक : कभी भी फोन कॉल पर या ऐसे मेसेज आएं तो लालच में न पड़ें। सबसे पहले तथ्यों की तस्दीक करें। कंपनी या बैंक से संपर्क करें।
फर्जी नाम व पते पर खोल रखा था 120 बैंक खाते
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूला कि फर्जी नामों से 120 जाली बैंक खाते खोलकर करीब 200 लोगों से अब तक एक करोड़ रुपये जमा करवा चुके हैं। फर्जी पहचान पत्र पर प्री एक्टिवेटेड 200 सिम अंकित ने खरीदे थे। इसके लिए 100 मोबाइल का इस्तेमाल किया। भुगतान के बाद उस सिम व मोबाइल तोड़कर फेंक देते थे। फर्जी नाम, पते पर सिम कार्ड देने में अनुज गौड़ मदद करता था। वो वीआई (वोडाफोन-आईडिया) कंपनी में सिम कार्ड प्रमोटर था। मुंशी पुलिया के सामने कैनोपी लगाकर सिम बेचता था। देहात क्षेत्र में जो लोग कम पढे़ लिखे होते है। उनके नाम पर एक ही आईडी पर कई सिम एक्टिव कर देता था। इसके बाद ग्राहक को एक सिम देकर बाकी सिम ब्लैक में हमें 400 से 500 रुपये में दे देता था।
हमें मिलती है सबक : बैंक खाता संख्या दिए जाने पर ज्यादातर लोग यकीन कर लेते हैं कि जो ऑफर दिया जा रहा है वह सही है। ऐसे में वो आसानी से झांसे में आ जाते हैं। पर, यह खबर हमें सबक देती है कि ऐसे किसी झांसे में न आएं। सबसे पहले कंपनी या बैंक से संपर्क करें।
कई शहरों में फैला है नेटवर्क
प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क जयपुर और लखनऊ सहित कई शहरों में फैला है। बरामद डाटा का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। डेटा कहां से चोरी हुआ है, इसकी जानकारी की जा रही है। कंपनियों का डाटा हैकिंग या किसी कर्मचारी से प्राप्त हुआ है। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। जाली बैंक खाते किस तरह से खोलेे गए, इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संबंध में भी जांच की जा रही है। डिटेल प्राप्त कर कुल धोखाधड़ी के संबंध में जानकारी की जा रही है। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी के इन्फार्मेशन सिक्योरिटी पॉलिसी, ऑडिट की विधिवत जांच की जाएगी।
ये सामान हुआ बरामद
चार चेकबुक, आठ पासबुक, दस मोबाइल, पांच आधार कार्ड, चार पैन कार्ड, 11 डेबिट कार्ड, एक निर्वाचन कार्ड, दो पेन ड्राइव, दो डीएल, एक चेकबुक, 78 सिम कार्ड, चार बैंक जमा रसीद, दो फिंगर स्कैनर मशीन, एक कार और 4200 नकद।