सरकारी विभाग में नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, निजी प्लेसमेंट कंपनी के संचालक के खिलाफ केस दर्ज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ के चिनहट कोतवाली में नौकरी का झांसा देकर सात युवकों से 17.50 लाख रुपये ठगी का केस दर्ज कराया गया है। प्रभारी निरीक्षक सचिन कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी अखिलेश तिवारी ने फाइनेंस एंड प्लेसमेंट एजेंसी अल्फा टु ओमेगा के नाम पर फर्जीवाड़ा किया है।
उसके व अन्य लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जौनपुर के शाहगंज, सिधाई गांव निवासी अखिलेश तिवारी कमता के अनौरा में किराये के मकान में रहता है।
उसकी राजाजीपुरम के पारा रोड स्थित लक्ष्मण विहार कॉलोनी निवासी विशाल सिंह और गोरखपुर के गोली दुबौली निवासी अजय चंद्र से किसी माध्यम से मुलाकात हुई थी। अखिलेश ने विशाल और अजय को बताया कि वह सरकारी विभागों में ठेके पर नौकरियां लगवाता है।
उसने स्वास्थ्य विभाग में संविदा के पदों पर भर्तियां निकलने की जानकारी देते हुए कहा कि अगर कोई नौकरी करना चाहता है तो ढाई लाख रुपये का खर्च आएगा। विशाल ने अपने रिश्तेदार सौरभ सिंह और शैलेष सिंह की नौकरी के लिए तो अजय ने अमित सिंह, विजय चंद्र, प्रीति पांडेय, अनिमेष कुमार राय और सूर्य प्रकाश शाही की नौकरी के लिए बात की है।
जानमाल की धमकी भी दी
उसने सात लोगों की नौकरी के लिए 17.50 लाख रुपये लिए और अपनी कंपनी अल्फा टु ओमेगा के लेटरपैड पर आजमगढ़ व अन्य जनपदों के लिए नियुक्ति पत्र बनाकर उन्हें थमा दिया। नियुक्ति पत्र लेकर सभी अपने-अपने जनपद के स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पहुंचे तो उन्हें भगा दिया गया। विशाल और अजय चंद्र का आरोप है कि अखिलेश अपने भाई नागेंद्र तिवारी और बेटे अमन तिवारी के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा कर रहा है।
विशाल ने बताया कि उसने अखिलेश से रुपया मांगा तो वह टरकाता रहा। दबाव बनाने पर उसने अपनी कार और एक चेक दिया। कहा कि पांच लाख रुपये देकर कार और चेक वापस ले जाऊंगा। हालांकि, अगली ही रात को वह बिना बताए दूसरी चाबी लगाकर कार वापस ले गया। विशाल ने पुलिस को फोन कर सूचना दी तो 20 मार्च की रात अखिलेश एक कार में छह-सात लोगों को लेकर उसके घर पहुंचा और जानमाल की धमकी दी।
अपहरण, लूट में जा चुका है जेल
अजय चंद्र ने बताया कि दिवाली के दौरान अखिलेश तिवारी को कैसरबाग पुलिस ने अपहरण और लूट के एक मामले में दबोचा था। अजय का यह भी कहना है कि अखिलेश को दो महीने जेल में बंद रखा गया। वह जमानत पर है।