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कारोबार में निवेश का झांसा देकर ५७ लाख ठगे, मुकदमा दर्ज
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कारोबार में निवेश का झांसा देकर ठगे 57.21 लाख रुपये, मुकदमा
महानगर निवासी कारोबारी रंजीत सिंह भदौरिया को निवेश का झांसा देकर जालसाजों ने 57.21 लाख रुपये ठग लिये। पीड़ित ने कंपनी की महिला डायरेक्टर समेत चार के खिलाफ महानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, रंजीत सिंह भदौरिया महानगर के देवरत्न अपार्टमेंट में रहते हैं। रंजीत के मुताबिक, वर्ष 2015 में वह एक आईटी कंपनी में काम करते थे।
वहां उनके साथ आदर्श श्रीवास्तव भी कार्यरत थे। रंजीत के मुताबिक, उन्होंने आदर्श से कारोबार करने की इच्छा जतायी तो उन्होंने उनकी मुलाकात नोएडा निवासी एकोर टेक्नोलॉजी कंपनी के मालिक जितेंद्र सिंह से कराई।
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जितेंद्र सिंह के मुताबिक, उनकी कंपनी एलईडी बल्ब और प्रोजेक्टर का काम करती है। जितेंद्र ने उन्हें अपनी कंपनी में संयुक्त निदेशक बनाने का प्रस्ताव रखते हुए निवेश के लिए कहा।
रंजीत सिंह के मुताबिक, उन्होंने कागजी कार्रवाई के बाद कंपनी में 40.40 लाख रुपये निवेश कर दिया।
इस दौरान कंपनी मालिक जितेंद्र व उसके भाई चंद्रशेखर ने निजी दिक्कतों का हवाला देकर 16.81 लाख रुपये अलग से हासिल कर लिया।
रंजीत के मुताबिक, उन्हें कुल 57.21 लाख रुपये निवेश करने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ। जब हिसाब मांगा तो आरोपी टालमटोल करने लगे।
इस बीच खाता बंद कर दिया और कंपनी काली सूची में डाल दी गई। इसकी जानकारी होने पर रंजीत ने रुपये वापसी का दबाव बनाया तो आरोपियों ने चेक दिए जो बाउंस हो गए। उन्होंने आदर्श, जितेंद्र, उसकी पत्नी कंचन और भाई चंद्रशेखर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
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महानगर निवासी कारोबारी रंजीत सिंह भदौरिया को निवेश का झांसा देकर जालसाजों ने 57.21 लाख रुपये ठग लिये। पीड़ित ने कंपनी की महिला डायरेक्टर समेत चार के खिलाफ महानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, रंजीत सिंह भदौरिया महानगर के देवरत्न अपार्टमेंट में रहते हैं। रंजीत के मुताबिक, वर्ष 2015 में वह एक आईटी कंपनी में काम करते थे।
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वहां उनके साथ आदर्श श्रीवास्तव भी कार्यरत थे। रंजीत के मुताबिक, उन्होंने आदर्श से कारोबार करने की इच्छा जतायी तो उन्होंने उनकी मुलाकात नोएडा निवासी एकोर टेक्नोलॉजी कंपनी के मालिक जितेंद्र सिंह से कराई।
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जितेंद्र सिंह के मुताबिक, उनकी कंपनी एलईडी बल्ब और प्रोजेक्टर का काम करती है। जितेंद्र ने उन्हें अपनी कंपनी में संयुक्त निदेशक बनाने का प्रस्ताव रखते हुए निवेश के लिए कहा।
रंजीत सिंह के मुताबिक, उन्होंने कागजी कार्रवाई के बाद कंपनी में 40.40 लाख रुपये निवेश कर दिया।
इस दौरान कंपनी मालिक जितेंद्र व उसके भाई चंद्रशेखर ने निजी दिक्कतों का हवाला देकर 16.81 लाख रुपये अलग से हासिल कर लिया।
रंजीत के मुताबिक, उन्हें कुल 57.21 लाख रुपये निवेश करने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ। जब हिसाब मांगा तो आरोपी टालमटोल करने लगे।
इस बीच खाता बंद कर दिया और कंपनी काली सूची में डाल दी गई। इसकी जानकारी होने पर रंजीत ने रुपये वापसी का दबाव बनाया तो आरोपियों ने चेक दिए जो बाउंस हो गए। उन्होंने आदर्श, जितेंद्र, उसकी पत्नी कंचन और भाई चंद्रशेखर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।