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एकेटीयू ठगी प्रकरण : आखिर कौन है वह शख्स जिसने बैंक में कराई सांठगांठ, बैंक के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध

Fri, 21 Jun 2024 06:59 PM IST
ishwar ashish सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 21 Jun 2024 06:59 PM IST
सार

एकेटीयू ठगी प्रकरण में अभी तक छह आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। आरोपी अनुराग श्रीवास्तव ने एकेटीयू को एफडी दर संबंधी दस्तावेज दिए थे। मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

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Fraud in AKTU:
एकेटीयू में हुई बैंकों की बैठक में शामिल होने के बाद बाहर आता जालसाज अनुराग श्रीवास्तव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

विस्तार

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के 120 करोड़ रुपये पार करने के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। बैंक मैनेजर बन शातिर ने एफडी दर संबंध के जो दस्तावेज एकेटीयू में मीटिंग में दिए थे, वह सही थे। उस दस्तावेज पर दस्तखत बैंक के रीजिनल मैनेजर (आरएम) के थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शातिर की बैंक में पैठ किस कदर थी। बैंक के कई अफसरों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।

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ठगी में पुलिस छह आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसमें देवेंद्र प्रसाद जोशी, उदय पटेल, राजेश बाबू, गिरीश चंद्र, शैलेश कुमार रघुवंशी, दस्तगीर आलम और कृष्णकांत शामिल है। मुख्य आरोपी अनुराग श्रीवास्तव और उसका साथी कपिल पुलिस की गिरफ्त दूर है। प्रकरण में एक अहम तथ्य सामने आया। दरअसल पांच जून को एकेटीयू परिसर में एफडी संबंधी प्रक्रिया हुई थी। इसमें आठ बैंकों ने हिस्सा लिया था। उसी में आरोपी अनुराग श्रीवास्तव खुद को यूनियन बैंक की बापू भवन शाखा का मैनेजर अनुज कुमार सक्सेना बता शामिल हुआ था। एफडी पर ब्याज दर सबसे अधिक उसी के दस्तावेजों में दर्ज थी। इसलिए एकेटीयू ने 120 करोड़ की एफडी कराने की डील उससे की थी। एकेटीयू के सूत्रों के मुताबिक एफडी दर संबंधी दस्तावेज जो अनुराग ने दिये थे, वह सही थे। बैंक के रीजनल मैनेजर विजय द्विवेदी के उस पर हस्ताक्षर हैं।
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वहीं, बैंक का दस्तावेज हासिल कर लेना साबित करता है कि अनुराग की बैंक में गहरी पैठ है। कोई ऐसा शख्स है, जो उसकी मदद करता रहा। जानकारी देने के साथ ही दस्तावेज भी उपलब्ध कराया। जानकारी के मुताबिक जेल भेजा जा चुका आरोपी शैलेश कुमार रघुवंशी पहले से ही मैनेजर के संपर्क में रहा है। अंदेशा है कि कुछ और कर्मचारी व अधिकारी उसके सीधे संपर्क में रहे हैं। जिसका फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दिया गया।

महज चार दिन में ठगी को दे दिया अंजाम
ठगी की साजिश करीब एक महीने पहले रची थी। तीन जून को शैलेश ने बैंक मैनेजर को कॉल कर एफडी संबंधी जानकारी मांगी। उसी शाम वह बैंक भी गया। चार जून को एकेटीयू नाम से फर्जी खाता खुलवाया। पांच जून को अनुराग फर्जी बैंक मैनेजर बन एकेटीयू में हुई बैठक में शामिल हुआ। इसके अगले दिन एकेटीयू की तरफ से रकम भेजी गई। कुछ ही घंटे बाद ये रकम एकेटीयू के फर्जी खाते में ट्रांसफर कर ली गई और वहां से ट्रस्ट के खाते में।

हैदराबाद में खरीदी गई एसयूवी, हिमाचल में दबिश

एकेटीयू के 120 करोड़ रुपये पार करने के बाद आरोपियों ने जिस एसयूवी को खरीदा था उसको हैदराबाद भेजा था। एसयूवी हैदराबाद कौन ले गया और किसके पास भेजा गया। इस बारे में पुलिस तफ्तीश कर रही है। अब तक की जांच में एक बात लगभग साफ हो गई कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस की पांच टीमें तफ्तीश में जुटी हैं। एक टीम हिमाचल में आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनुराग श्रीवास्तव और उसका साथी कपिल अलग-अलग राज्य में है। हिमाचल और गुजरात में होने की आशंका है। इसलिए इन दोनों राज्यों में टीमें डेरा डाले हैं। इसके अलावा यूपी, महाराष्ट्र और दिल्ली में भी एक एक टीम लगी है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद ठगी के पूरे राज खुलेंगे। जानकारी के मुताबिक गिरोह में आठ से दस लोग हैं। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बैंक से संबंधित लोगों की भूमिका की गहनता से तफ्तीश करेगी। पूरा गिरोह पकड़े जाने के बाद पुलिस इन सभी पर गैंगस्टर की कार्रवाई करेगी।

महाराष्ट्र भी ट्रांसफर की गई रकम
जो रकम पार की गई थी उसमें से तमाम रकम कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसमें महाराष्ट्र का भी एक खाता है। इसमें 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। संबंधित बैंक से खाते का विवरण जुटा लिया गया है। पुलिस आरोपियों से खाताधारक का कनेक्शन पता कर रही है।

बचे एक करोड़ भी खाते में आए
बैंक के बड़े अधिकारियों ने ठगी के खेल को पकड़ा था। खातों की रकम फ्रीज कराई थी। इसमें पुलिस की भी भूमिका रही थी। यही वजह है कि दो दिन पहले ही 119 करोड़ रुपये एकेटीयू के खाते में ये रकम वापस आ गई थी। बची एक करोड़ की रकम भी बृहस्पतिवार को विवि के खाते वापस आ गई। विवि के फाइनेंस ऑफिसर सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि विवि की पूरी रकम सुरक्षित वापस आ गई है।

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