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एफसीआई में नौकरी के नाम पर 22 बेरोजगारों से 1.75 करोड़ ठगे,नोएडा में प्रशिक्षण कराने के बाद थमा दिया जाली बार कोड लगा नियुक्ति पत्र

Wed, 16 Jun 2021 12:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 12:10 AM IST
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fraud
लखनऊ। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजों ने 22 लोगों से 1.75 करोड़ रुपये ठग लिए। शातिरों ने नोएडा में छह महीने का प्रशिक्षण कराने के बाद जाली बार कोड लगा फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। स्कैनिंग में फर्जीवाड़ा सामने आने पर पीड़ितों ने आपत्ति की तो ठग गलती होने की बात करते हुए सालभर टरकाता रहा और रकम वापस मांगने पर धमकाने लगा। इस पर इंदिरानगर सेक्टर-14 निवासी मनीष कुमार राय ने महानगर थाने में 11 लोगों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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इंडो फार्म कंपनी में कार्यरत मनीष कुमार राय के साथ सत्य प्रकाश त्रिपाठी काम करते थे। उसके जरिये ही 2019 में मनीष की मुलाकात सुल्तानपुर के अभिषेक दुबे और विकासनगर सेक्टर-6 के नीरज पांडेय से हुई। अभिषेक ने मनीष से कहा कि एफसीआई में प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी के पदों पर नियुक्तियां निकली हैं, जिसमें वह सीधे साक्षात्कार से भर्ती करा देगा। इस पर मनीष ने परिवार के तीन युवकों के लिए बात की। हर नियुक्ति के लिए आठ लाख में सौदा तय हुआ। अभिषेक व नीरज ने एडवांस में दो-दो लाख रुपये जमा कराने को कहा। मनीष के मुताबिक इस बीच उनके 22 रिश्तेदारों ने नौकरी लगवाने के लिए संपर्क किया। उन्होंने सभी से रुपये लेकर 22 लाख रुपये की पहली किस्त महानगर के क्लासिक होटल में दी। इसके बाद कई किस्तों में खाते व नकदी मिलाकर कुल 1.75 करोड़ रुपये दिए। पुलिस ने जवाहर भवन में काम करने वाले कर्मचारी राकेश सिंह, रवि प्रकाश सिंह, ग्रेटर नोएडा निवासी राजन चौबे उर्फ विक्की चौबे, उसकी पत्नी कविता चौबे, लखीमपुर खीरी का अनूप श्रीवास्तव, उसका भाई संजू श्रीवास्तव, सुल्तानपुर का अभिषेक दुबे, खीरी का राज रस्तोगी, जितेंद्र, अमरेंद्र सिंह और नीरज पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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एफसीआई कर्मचारी बताकर दिया झांसा
मनीष का आरोप है कि अभिषेक व नीरज ने दिल्ली में राजन चौबे और उसकी पत्नी कविता से मिलवाया। बताया कि दोनों एफसीआई में अच्छे पद पर हैं और इन्हीं के जरिये नियुक्ति कराई जा रही है। कविता की तैनाती बारह खंभा, नई दिल्ली में बताई गई। इससे मनीष झांसे में आ गए। बताया कि 53,70,000 रुपये नीरज और 67 लाख रुपये लखीमपुर खीरी के नई बस्ती निवासी अनूप श्रीवास्तव के खाते में जमा कराए। वहीं, 44.55 लाख रुपये कई बार में नकदी में दिए। अंतिम बार 15 लाख रुपये खाते में जमा कराए। इसके लिए जालसाजों ने धमकी दी कि एक दिन में 15 लाख रुपये नहीं मिले तो किसी की नियुक्ति नहीं होगी। रकम मिलने के तीसरे दिन सभी को नियुक्ति पत्र सौंप दिया जाएगा।
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बार कोड स्कैन करते ही खुल गया मामला
मनीष ने बताया कि जून 2019 में रकम मिलने के बाद शातिरों ने युवकों को प्रशिक्षण भी दिलाया। इसके लिए ग्रेटर नोएडा के होटल में ठहरने का इंतजाम किया। यहीं से एक गोदाम ले जाकर प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान स्टाइपेंड नहीं दिया गया। ट्रेनिंग के दौरान रजिस्टर भरवाया जाता था। यह सिलसिला छह महीनों तक चला। इसके बाद दिसंबर 2019 में सभी को फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ा दिया। जिन्हें नोएडा और दिल्ली में नियुक्ति देने की बात थी, उन्हें ग्रेटर नोएडा के होटल एवा ग्रीन बुलाकर एफसीआई के सील लगे लिफाफे में फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ाया। कुछ को विभूतिखंड थाने के पास स्थित एफसीआई के मुख्यालय के बाहर नियुक्ति पत्र दिया। मनीष के मुताबिक सभी नियुक्ति पत्र पर बार कोड था। अभ्यर्थियों को दिल्ली, नोएडा, गोरखपुर, बस्ती, हापुड़, बलिया, कानपुर सहित कई जिलों में तैनाती का पत्र दिया था। इन जिलों में तैनात अधिकारियों ने जैसे ही नियुक्ति पत्र के बार कोड को स्कैन किया तो वे जाली मिले। इस पर अभ्यर्थियों को फटकार लगाकर वापस भेज दिया।

आपत्ति जताई तो फिर दिया झांसा
नियुक्ति पत्र फर्जी होनेे की शिकायत पर अभिषेक ने गलती से ऐसा होने की बात कही। इसके बाद मार्च में लॉकडाउन होने पर वह साल भर तक मामला टरकाता रहा। जनवरी 2021 में वह पॉलीटेक्निक चौराहे पर मिला तो मनीष ने दबाव बनाया। इस पर उसने पूरी रकम लौटाने के लिए दस दिन का समय मांगा। हालांकि, फिर वह धमकी देने लगा। मनीष के मुताबिक जालसाज सौ से अधिक लोगों से ठगी कर चुके हैं। गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। खासकर यह पूर्वांचल, बिहार, झारखंड के बेरोजगारों को निशाना बनाता है। प्रभारी निरीक्षक महानगर प्रदीप सिंह के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का सरगना अनूप श्रीवास्तव व नीरज पांडेय हैं। अभिषेक, संजू, राकेश, राजन चौबे, कविता व अन्य लोगों को झांसा देकर वसूली करने में मदद करते हैं।
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