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साल-दर-साल चलता रहा जांच का खेल
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 23 Jun 2014 12:02 PM IST
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सरकारी विभागों में चोरी, गबन और संपत्तियों के नुकसान से जुड़े मामलों को विभागीय जांच में उलझाने का बड़ा खेल चल रहा है।
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इनमें कई मामले 20 से 25 साल पुराने हैं। इसमें लोक निर्माण, शिक्षा, सिंचाई, भूमि अध्याप्ति व स्वास्थ्य जैसे एक दर्जन से ज्यादा विभाग शामिल हैं। सीएजी ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाए हैं।
प्रदेश के सरकारी विभागों में 2012-13 तक चोरी, गबन और बजट के दुरुपयोग से जुड़े 143 ऐसे मामले चिह्नित किए गए हैं जो काफी समय से लंबित हैं।
इसमें 25 साल व इससे ज्यादा समय से पुराने 27 मामले भी शामिल हैं। इनमें चोरी के 65 और गबन के 44 प्रकरण हैं।
ढाई दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले हैं जिनमें विभागीय व आपराधिक जांच लंबित है। 77 मामले ऐसे हैं जिनकी विभागीय जांच शुरू की गई लेकिन उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया।
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इन प्रकरणों से 5.50 करोड़ की रकम फंसी हुई है। दो मामलों में कार्यवाही पूरी भी की गई लेकिन रकम की वसूली लंबित है।