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फर्जी PCS अफसर का कारनामा, 11 युवकों से 42 लाख ठगे

Sun, 16 Apr 2017 02:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Apr 2017 02:59 PM IST
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 fraud by a fake IPS officer.
- फोटो : demo pic

खुद को पीसीएस अफसर बताने वाले ठगों ने नौकरी का झांसा देकर 11 युवकों से करीब 42 लाख रुपये ठग लिए। नौकरी नहीं मिली तो युवकों ने फर्जी पीसीएस अधिकारियों से संपर्क कर रुपया वापस मांगा।

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परेशान होकर पीड़ितों ने गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा ने बताया कि ठगी का मामला दो साल पुराना है।

मूलरूप से प्रतापगढ़ के शाहपुर गहरौली निवासी स्कूल संचालक शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि दो साल पहले हजरतगंज इलाके में उनकी मुलाकात गोरखपुर के बेलीपार स्थित मुजरी नेवादा हाटा बाजार निवासी सुरेंद्र सिंह और तेलीबाग में रहने वाले सत्येंद्र से हुई थी।
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दोनों ने खुद को देवरिया और पडरौना में तैनात पीसीएस अधिकारी बताया था। बातचीत के दौरान दोनों ने शैलेंद्र को प्रभावित कर लिया। ठगों ने कहा कि उनकी उत्तर प्रदेश सरकार में गहरी पैठ है और वह किसी को भी सरकारी नौकरी दिलवा सकते हैं।

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इन विभागों में नौकरियां दिलवाने का किया था वादा

 fraud by a fake IPS officer.

उन्होंने शैलेंद्र से उसके स्कूल के बच्चों की नौकरी लगवाने के लिए कहा। बकौल शैलेंद्र, उसने कई युवकों को नौकरी के लिए सुरेंद्र और सत्येंद्र के पास भेजा। प्रत्येक युवक से रुपये लेकर उन्होंने एनटीपीसी, मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी, रेलवे व अन्य विभागों में नौकरी दिलवाने का आश्वासन दिया।

इनसे ठगी गई रकम
चंदन सिंह को एनटीपीसी में नौकरी के नाम पर 2 लाख, अमित सिंह से 3.50 लाख, त्रिलोक राय को मंडी परिषद में नौकरी के नाम पर 2.85 लाख, सिद्धांत तिवारी से चार लाख, दीपेंद्र सिंह चौहान से 3.60 लाख, संतोष को सचिवालय में नौकरी के नाम पर आठ लाख, हरेंद्र सिंह को पीडब्ल्यूडी में नौकरी के नाम पर नौ लाख, विशाल सिंह से दो लाख, विपिन सिंह को रेलवे में नौकरी के नाम पर चार लाख और आशुतोष यादव से छह लाख रुपये लिए।

रुपये देने गोरखपुर बुलाया, धमकी दे भगा दिया

 fraud by a fake IPS officer.

शैलेंद्र का कहना है कि रुपये वापस करने के लिए सुरेंद्र और सत्येंद्र ने उन्हें व अन्य युवकों को गोरखपुर बुलाया था। गोरखपुर पहुंचकर उन्होंने ठगों के मोबाइल नंबर मिलाए तो वह स्विच ऑफ मिले।

कई घंटे बाद भी फोन नहीं चालू हुआ तो सभी लखनऊ लौट आए। 22 मार्च को ठगों ने खुद ही फोन कर फिर से गोरखपुर के मुजरी नेवादा हाटा बाजार में मिलने के लिए बुलाया।

पीड़ित फिर वहां पहुंचे तो ठगों ने रुपये वापस न करने की बात कहते हुए गाली-गलौज की और जान की धमकी देते हुए भगा दिया।

उधर, सुरेंद्र और सत्येंद्र ने रुपये लेने के बाद अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्तिपत्र भी थमाए थे। कुछ अभ्यर्थी संबंधित विभागों में जॉइनिंग के लिए पहुंचे तो नियुक्तिपत्र फर्जी निकले।

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