यूपी: किसानों ने सरकार की नीतियों को सराहा, क्रियान्वयन पर जताई निराशा, पांच प्रमुख मांगों पर कार्रवाई की मांग की
प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताते हुए जल्द से जल्द धान खरीद नीति में एफपीओ व एफपीसी को शामिल कर शासनादेश जारी कराने का आग्रह किया साथ ही प्रतिनिधियों ने शासनादेश में अनावश्यक शर्तें न थोपने की मांग की है।
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उत्तर प्रदेश के कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) व कृषक उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) की एक बैठक शनिवार को लखनऊ के प्रेस क्लब में हुई। इसमें केंद्र व राज्य सरकार के स्तर से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की गई लेकिन शासन स्तर पर इससे संबंधित नीतियों के क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने में सुस्ती पर निराशा व्यक्त की गई। एफपीओ ने राज्य सरकार से पांच प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का आग्रह किया है।
धान खरीद नीति से एफपीओ को बाहर किए जाने की जानकारी के बाद प्रदेश भर के एफपीओ व एफपीसी के निदेशक यहां जुटे। यहां प्रतिनिधियों ने धान खरीद नीति में एफपीओ को शामिल न किए जाने पर आक्रोश जताया लेकिन, सरकार द्वारा नीति में पुन: शामिल करने की कार्रवाई शुरू करने पर संतोष जताया गया।
एफपीओ प्रतिनिधियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताते हुए जल्द से जल्द धान खरीद नीति में एफपीओ व एफपीसी को शामिल कर शासनादेश जारी कराने का आग्रह किया। प्रतिनिधियों ने शासनादेश में अनावश्यक शर्तें न थोपने की मांग की है। इसके अलावा एफपीओ प्रतिनिधियों ने राज्य स्तर पर एफपीओ-एफपीसी फेडरेशन बनाने का भी निर्णय लिया, जिसकी रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। इस पर अंतिम निर्णय कर जल्द एलान किया जाएगा।
बैठक में रामपुर एफपीओ के अध्यक्ष अमित वर्मा, समृद्धशील एफपीओ इटावा के निदेशक, संतोष सिंह, अलीगढ़ एफपीओ के निदेशक रिटायर्ड कर्नल आरपी पचौरी, प्रतापगढ़ एफपीओ केनिदेशक अभय सिंह, हमीरपुर एफपीओ की निदेशक शेफाली गुप्ता और अवधेश कुमार सहित बड़ी संख्या में एफपीओ प्रतिनिधि उपस्थित थे।
एफपीओ की पांच प्रमुख मांगें
- कृषि उत्पादन आयुक्त व अपर मुख्य सचिव कृषि के स्तर से एफपीओ के जरिए किसानों को आगे बढ़ाने के लिए कई आदेश किए गए हैं। इनमें 17 विभागों से कन्वर्जेंस सपोर्ट दिलाने का निर्देश भी है लेकिन नियमित समीक्षा न होने से तमाम अच्छे निर्णयों का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाए।
- एफपीओ किसानों का समूह है, इसलिए एफपीओ के माध्यम से किसानों के उत्पाद की खरीद सुनिश्चित कराई जाए। इससे किसानों की आय डेढ़ गुना होना निश्चित है। एमएसपी न्यूनतम समीक्षा मूल्य व बाजार मूल्य के आंकड़ों की पड़ताल कराकर इसे प्रभावी किया जा सकता है।
- पूर्व से केंद्र व राज्य सरकार की नीति के दायरे में शामिल एफपीओ को सहकारी समिति के लाइेंसस व्यवस्था के दायरे में लाया जाए। इससे किसानों की लागत मूल्य में कमी आएगी व समय पर उर्वरक, बीज व दवाइयां मिल सकेंगी। इससे किसानों की उपज और बाय बढ़ेगी।
- राज्य स्तर पर व जिला स्तर पर एक ऐसा प्रकोष्ठ बनाया जाए जहां से एफपीओ व एफपीसी को हर तरह की जानकारी, मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त हो सके। इस तरह का कोई तंत्र न होने से किसानों को जगह-जगह भटकना पड़ता है।
- एफपीओ के साथ नियमित संवाद हो। उनके इनोवेटिव प्रयोगों को प्रोत्साहित किया जाए और व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने की कार्रवाई की जाए। इससे उत्पादन, कारोबार व निर्यात में एक साथ वृद्धि होगी जिससे किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा।