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'सूर्य नमस्कार अनिवार्य हुआ तो होगा योग का विरोध'

Sat, 13 Jun 2015 02:03 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 13 Jun 2015 02:03 AM IST
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Former UP governor put conditions on Yoga.

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व मिजोरम के राज्यपाल रह चुके अजीज कुरैशी कहते हैं, योग शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अच्छी क्रिया है, लेकिन इसमें धर्म को नहीं जोड़ना चाहिए। योग में यदि सूर्य नमस्कार अनिवार्य किया गया तो इसका खुलकर विरोध किया जाएगा। मुसलमान केवल अल्लाह को ही मानता है। इसके अलावा किसी के आगे सिर नहीं झुकाता।

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सांप्रदायिक शक्तियां देश में केवल अपना एजेंडा लागू करना चाहती हैं। इसीलिए योग को भी उन्होंने भगवा रंग दे दिया है। मुसलमान पांच बार नमाज पढ़ता है, वह भी योग ही है।
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इसके अलावा अजीज कुरैशी अब सपा के सहारे राज्यसभा की राह तलाश रहे हैं। वे पिछले तीन दिनों से लखनऊ प्रवास पर हैं और इस दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां से मुलाकात कर चुके हैं। आजम से तो उन्होंने पौने दो घंटे तक बंद कमरे में बात की। आजम के जरिये ही वे सपा में संभावनाएं तलाश रहे हैं।
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दरअसल, कुरैशी के पास जब यूपी के राज्यपाल का भी चार्ज था तो उन्होंने आजम की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का संशोधित बिल पास कर दिया था। यह बिल सात साल से राजभवन में अटका हुआ था। इस कारण आजम भी कुरैशी का एहसान मानते हैं।

खुद को बताया कांग्रेस का सिपाही, चाहिए सपा का सहयोग

Former UP governor put conditions on Yoga.

कुरैशी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बहुत ही साफगोई से कहा कि जिस तरह प्रमोद तिवारी व पीएल पुनिया सपा के सहारे राज्यसभा में गए हैं, उसी तरह कांग्रेस आलाकमान यदि चाहेगा तो वे भी सपा के सहयोग से राज्यसभा जा सकते हैं।

हालांकि, सपा में शामिल होने के सवाल पर कुरैशी कहते हैं कि वे जन्म से ही कांग्रेस के एक मजबूत सिपाही हैं और मरते दम तक कांग्रेसी ही रहेंगे।

सपा सुप्रीमो व मुख्यमंत्री की तारीफों के बांध रहे पुल
कांग्रेसी होने के बावजूद कुरैशी आजकल सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। वे मुलायम से इतने प्रभावित हैं कि उनके लिए सरदार जाफरी की कविता सुनाते हैं- ‘ये जो आसमां पे एक सितारा है... तुम अपने हाथों से थाम लो इसको...अपने होठों से चूम लो इसको... इसी पर हमला है रात का...।'

इसमें वे मुलायम की तुलना सितारे से करते हैं और सांप्रदायिक ताकतों को रात बताते हैं। वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में मुलायम ही सांप्रदायिक शक्तियों का मुकाबला कर सकते हैं। जिस तरह बिहार में उन्होंने गैर सांप्रदायिक शक्तियों को एक कर दिया है, उसी तरह यूपी में भी सभी पार्टियों को सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए मुलायम के साथ आ जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी खूब तारीफ की।

राज्यपालों को अपनी गरिमा का रखना चाहिए खयाल

Former UP governor put conditions on Yoga.

कुरैशी कहते हैं कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर किसी को अंगुली नहीं उठानी चाहिए। साथ ही राज्यपालों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने पद की गरिमा का खयाल रखें। उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कुरैशी ने कहा कि उनके पास सबसे पहली फाइल राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति की आई थी।

इसमें नेता प्रतिपक्ष की राय नहीं ली गई थी। इस पर उन्होंने मुख्य सचिव को बुलाकर नाराजगी जताई और फाइल रोक दी। बाद में कांग्रेस के ही लोगों ने आलाकमान से शिकायत की, लेकिन दबाव के बावजूद उन्होंने उस फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए।

राज्यपाल ही हो सरकारी विवि का चांसलर
कुरैशी कहते हैं कि निजी विश्वविद्यालय का चांसलर तो कोई भी हो सकता है, लेकिन सरकारी विश्वविद्यालय का चांसलर राज्यपाल को ही होना चाहिए। दरअसल,सैफई पीजीआई को विश्वविद्यालय बनाने वाले विधेयक को यूपी के गवर्नर राम नाईक ने इसलिए रोक दिया है क्योंकि सरकार ने इसका चांसलर मुख्यमंत्री को बना दिया है। ऐसे में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को लेकर नाईक आश्वस्त नहीं हैं।

जब कुरैशी से पूछा गया कि आपने भी रामपुर के मोहम्मद अली जौहर विवि के सात साल से रुके संशोधित बिल को मंजूरी दे दी थी, कुरैशी ने कहा कि कानूनी राय लेने के बाद ही नियमानुसार इसे मंजूरी दी थी। इसमें कुछ भी गलत नहीं किया गया है।

एमएलसी की सूची का परीक्षण राज्यपाल का अधिकार

कुरैशी कहते हैं कि एमएलसी मनोनयन के लिए सरकार ने जो सूची भेजी है, उसका परीक्षण कराने का अधिकार राज्यपाल को है। हालांकि राज्यपाल को उन्हें ही एमएलसी बनाना पड़ेगा, जिन्हें सरकार उच्च सदन में भेजना चाहेगी।

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