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पूर्व रेलकर्मी का कारनामा, किराए पर उठा दिए खाली क्वार्टर, कर रहा है लाखों की कमाई

Tue, 03 Dec 2019 12:01 PM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 03 Dec 2019 12:01 PM IST
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former railway employee gave railway quarters on rent in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में पंजाबनगर रेलवे कॉलोनी के खाली व निष्प्रयोज्य क्वार्टरों को पूर्व रेलकर्मी किराये पर उठाकर अपनी जेबें भर रहा है। उसका यह धंधा पत्नी व परिवारीजन संभाल रहे हैं और हर माह तीन से लेकर सात हजार रुपये तक किरायेदारी वसूल रहे हैं।
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आश्चर्य की बात यह है कि रेलवे अब तक मामले पर चुप्पी साधे रहा। सोमवार को मामला डीआरएम तक पहुंचा तो उन्होंने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अंतर्गत करीब तीन दर्जन रेलवे कॉलोनियां आती हैं।
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इनमें चारबाग स्टेशन के पीछे आलमबाग की ओर पंजाबनगर रेलवे कॉलोनी है, जहां खासी संख्या में रेलकर्मी रहते हैं। रेलवे प्रशासन अपनी कॉलोनियों में जर्जर आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित कर रहा है। ऐसे ही पंजाबनगर कॉलोनी के कंडम आवासों को पूर्व रेलकर्मी की शह पर उसकी पत्नी व परिवारीजन किराये पर उठाकर कमाई कर रहे हैं।
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700 आवास हो चुके हैं कंडम

सोमवार को पूर्व कर्मचारी की पत्नी की रिकॉर्डिंग के सामने आने से मंडल कार्यालय में हड़कंप मच गया। इसमें उसने पंजाबनगर कॉलोनी में क्वार्टर किराये पर देने की बात कही है। यह भी कहा कि बिजली का बिल अलग से जमा करना होगा।

सामने आया मामला पंजाबनगर कॉलोनी का है, जबकि रेलवे की अन्य कॉलोनियों में भी ऐसे क्वार्टर हैं, जहां कंडम आवास किराये पर उठाए जा रहे हैं और इससे होने वाली कमाई रेलवे की जेब में भी नहीं जा रही है। बता दें कि जर्जर आवास किराये पर देने के बाद उसमें बिजली व पानी की भी व्यवस्था करवाकर दी जाती है, जिसके लिए रेलकर्मियों की हथेलियां गर्म की जाती हैं।

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की कॉलोनियों में करीब 700 आवास जर्जर व कंडम हैं। इन्हें तोड़ने के आदेश भी कुछ वर्ष पहले हो चुके हैं, बावजूद इसके कार्रवाई न होने से किरायेदारी का धंधा चल रहा है। सूत्रों की मानें तो हर कॉलोनी में यह धंधा फल-फूल रहा है।
 

गोलमाल में रेलकर्मियों की भी मानी जा रही है मिलीभगत

रेलवे यूनियन नेता के परिवारीजन कॉलोनी में खाली पड़े क्वार्टरों से कमाई कर रहे हैं। रेल कर्मचारियों से मिलीभगत कर यह धंधा चलाया जा रहा है। आला अधिकारियों को रिकॉर्डिंग मिलने के बाद इस खेल की भी जांच कराई जाएगी।

मोबाइल पर बातचीत में पूर्व रेलकर्मी की पत्नी ने बताया कि क्वार्टरों के टाइप के मुताबिक किराया रहेगा। क्वार्टर का तीन हजार से लेकर सात हजार रुपये किराया वसूला जा रहा है। इससे पूर्व रेलकर्मी हर माह लाखों की कमाई कर रहा है।

अभियान खत्म और शुरू हुआ किरायेदारी का खेल

यह बात भी दीगर है कि रेलवे कॉलोनियों में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को निकालने के लिए रेलवे अभियान चलाता है। मौके पर जाकर पानी व बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। पर, जैसे ही अभियान खत्म होता है तो किरायेदारी का धंधा फिर शुरू कर दिया जाता है।

पंजाबनगर रेलवे कॉलोनी के आवासों को किराये पर उठाने का मामला संज्ञान में आया है। पूर्व रेलकर्मी खाली पड़े आवासों को अवैध रूप से किराये पर उठा रहा है। मामले की गहन जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे
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