माया बोलीं, 'तू मुझे सलाह देगा, तेरा दिमाग खराब है'
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बसपा से निकाले गए पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने बृहस्पतिवार को पार्टी अध्यक्ष मायावती पर हमला बोला। कहा, मायावती व उनके दलाल टिकटों की बोली लगाकर समाज को बेच रहे हैं। यह दलितों-पिछड़ों को गुलाम बनाने की साजिश है। उन्होंने मायावती पर बसपा के संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों से भटक जाने का आरोप लगाया।
दद्दू प्रसाद ने प्रेस कांफ्रेंस करके अपने निष्कासन के कारणों का खुलासा किया। साथ ही बसपा सुप्रीमो व पार्टी की चाल-ढाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘27 जनवरी को मायावती ने उन्हें फोन कर दिल्ली चुनाव में जाने के लिए कहा।
इस दौरान मैंने कहा कि क्षेत्र में चर्चा है कि सितंबर से पार्टी के टिकट बेचे जा रहे हैं। इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है। इस पर मायावती बिगड़ गई। कहा- ‘तू नेशनल लीडर को सलाह देगा, तेरा दिमाग खराब हो गया है।’ दद्दू ने बताया कि इसके अगले दिन से पार्टी से उन्हें निकालने का फैसला हो गया।
वोट बेचना बहन-बेटी की इज्जत बेचने के बराबर
बसपा के पूर्व मंत्री ने कहा, डॉ. अंबेडकर और कांशीराम कहते थे कि वोट बेचना बहन-बेटी की इज्जत बेचने के बराबर है। हमने समाज से यही अपील करके न बिकने वाला समाज बनाया। लेकिन, मायावती और उनके दलाल टिकट बेचकर समाज को बेचने में लगे हुए हैं। टिकट बेचना दलित-पिछड़े समाज को गुलाम बनाने की साजिश है।
सभी जानते हैं टिकट की कीमत
‘एक टिकट की क्या कीमत है’ के जवाब में दद्दू ने कहा कि सभी जानते हैं टिकट कितने में मिलता है। मैं 1996 से 2007 तक लगातार तीन बार विधायक चुना गया लेकिन मुझसे टिकट के बदले कभी पैसा नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, टिकट बेचने की परंपरा बाद में शुरू हुई है।
पिछड़ों की हिस्सेदारी 55 से घटकर 18 फीसदी हुई
दद्दू ने कहा, बसपा कांशीराम के सिद्धांत ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ पर चलती थी। लेकिन मायावती ने नौ जून 2005 को इसे बदलकर ‘जिसकी जितनी तैयारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’कर दिया।
लोकसभा व विधानसभा में आरक्षण होने के कारण अनुसूचित जातियों का हिस्सा तो सुरक्षित रहा लेकिन बसपा में पिछड़ों के टिकट का हिस्सा 55 से घटकर 18 फीसदी हो गया। अति पिछड़ी जातियां पाल, निषाद, कुशवाहा, प्रजापति, राजभर, चौहान, साहू, विश्वकर्मा आदि की हिस्सेदारी शून्य हो गई। जबकि यही जातियां बसपा के आधार वोट की तरह जुड़ीं थी।
बसपा में सभी भयभीत और आतंकित
दद्दू प्रसाद ने कहा कि बसपा में सभी भयभीत और आतंकित रहते हैं इसलिए कोई भी व्यक्ति अपनी बात नहीं कह सकता। लोकसभा चुनाव 2014 में हार के कारणों की समीक्षा नहीं हुई। मायावती ने जो गलत रिपोर्ट पेश की, वहीं मान ली गई।
अंधविश्वासी व पाखंडियों का कब्जा
पूर्व मंत्री ने कहा, बसपा के गठन का एक उद्देश्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागृति पैदा करना भी था। कांशीराम लगातार इसके लिए प्रोत्साहित करते थे। लेकिन अब बसपा में अंधविश्वासियों व पाखंडियों का कब्जा हो गया है। 22 सितंबर को अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ बोलने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य का डांटा गया।
अंबेडकर-कांशीराम के मिशन के लिए करेंगे काम
दद्दू प्रसाद ने मायावती से अपील की है कि वे बसपा को बचाने के लिए सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक मुक्ति आंदोलन चलाएं अन्यथा वह इस आंदोलन को चलाएंगे।
उन्होंने कहा कि वह जल्दबाजी में किसी राजनीतिक दल के गठन करने के बजाय बहुजन समाज बनाएंगे। डॉ. अंबेडकर और कांशीराम के मिशन के लिए काम करेंगे।
तिलमिलाई बसपा ने दिया करारा जवाब
बसपा विधानमंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने टिकट बेचने के दद्दू प्रसाद के आरोपों को बेबुनियाद, तथ्यहीन और पार्टी को बदनाम करने की साजिश बताया।
मौर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, बसपा सिर्फ राजनीतिक दल नहीं, सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन है, जो संतों, गुरुओं व महापुरुषों की विचारधारा और डॉ. अंबेडकर व कांशीराम के मिशन को लेकर चल कहा है।
मायावती को कांशीराम ने खुद अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उनके नेतृत्व में जातिवादी और सांप्रदायिक ताकतों को नेस्तनाबूद करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले दद्दू को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।
यह नहीं भूलना चाहिए कि बसपा ने उन्हें कहां से कहां पहुंचाया। तीन बार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री बनाने में उनसे एक भी पैसा नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सभी आरोप उन्हें निष्कासन के बाद क्यों याद आ रहे हैं। पार्टी में रहते हुए क्यों ऐसी बातें नहीं कहीं।