सम्मान से अभिभूत पूर्व राज्यपाल राम नाईक बोले, कहीं सपना तो नहीं देख रहा, खुद को काटी चुटकी
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‘सम्मान और पुरस्कार पाना सभी को अच्छा लगता है। लखनऊ आकर सम्मान पाना और अपनी तारीफ में इतनी बात सुनकर मुझे लग रहा था कि मैं सपना देख रहा हूं। इसलिए यकीन करने के लिए कई बार खुद को चुटकी भी काटी।’ प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शनिवार को जब भारती तिलक सम्मान दिया गया तो उन्होंने इन शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
रंगभारती और उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद की ओर से उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले आयोजन में नाईक समेत दस हस्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें संजय गांधी पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर डॉ. राधा कृष्ण धीमान को चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए धन्वंतरि रंग भारती सम्मान प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपल कलराज मिश्र ने कहा कि राम नाईक ने राज्यपाल के रूप में लोकप्रियता का एक नया कीर्तिमान गढ़ा। उन्होंने राजभवन के द्वार हर आम और खास के लिए खोले थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजनेता अम्मार रिजवी ने नाईक को बेताज बादशाह की संज्ञा देते हुए उन्हें हृदयपाल के नाम से पुकारा।
मंत्री बृजेश पाठक, महेंद्र प्रताप सिंह, सांसद रीता बहुगुणा जोशी के साथ ही महापौर संयुक्ता भाटिया ने भी नाईक से जुड़े संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम के आयोजक और रंग भारती तथा नागरिक परिषद के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार ने सभी का स्वागत किया।
चरैवेति-चरैवेति-2 के लिए मांगे लोगों से संस्मरण
राम नाईक ने कहा कि वे अपनी पुस्तक चरैवेति-चरैवेति के पहले संस्करण के बाद अब उत्तर प्रदेश में अपने पांच साल के कार्यकाल के संस्मरणों पर चरैवेति-चरैवेति-2 लिख रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लोगों से संस्मरण देने को कहा है।
नाईक ने श्याम कुमार से पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि अन्य किसी संस्था या सरकार द्वारा यूपी का स्थापना दिवस न मनाने की जानकारी होने पर उन्होंने प्रयास किया और अब यहां हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस समारोह मनाया जाता है।
नागरिकता संशोधन कानून लागू करने से इनकार नहीं कर सकते राज्य : कलराज
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि देश में कुछ स्थानों पर इस समय नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है। कुछ राज्यों ने इसे अपने यहां लागू न करने की बात भी कही है, लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं कर सकतीं।
केंद्र सरकार द्वारा पारित कानून को न मानना संविधान की अवमानना करना है। कलराज ने संविधान में दिए गए नागरिकों के कर्तव्यों का पाठ किया तथा सभी को उन्हें दोहराने और पालन करने के लिए कहा।
कुलपति ने की लविवि की मार्केटिंग : लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां तथा भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि लविवि का इतिहास सौ साल का है। इसलिए वे इन हस्तियों के सामने अपने विश्वविद्यालय की मार्केटिंग करना चाहते हैं। लोगों को पता चलना चाहिए कि लविवि किस तरह अपने गौरवशाली इतिहास को लेकर आगे बढ़ रहा है।
विशिष्ट उपलब्धियों के लिए इनका भी हुआ सम्मान
- समाज सेवा के लिए धर्मकिशोर रंगभारती सम्मान- शशांक श्रीवास्तव
- पुलिस सेवा में विश्वनाथ लहरी रंगभारती सम्मान- सुलखान सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक
- प्रशासनिक सेवा में डॉ. जनार्दनदत्त शुक्ल रंगभारती सम्मान- रमेश चंद्र त्रिपाठी, सेवानिवृत्त आईएएस
- गायन में जगजीत सिंह रंगभारती सम्मान- कमला श्रीवास्तव
- चित्रकला में नंदलाल बोस रंगभारती सम्मान- डॉ. इंदुप्रकाश ऐरन
- शास्त्रीय नृत्य में उदयशंकर रंगभारती सम्मान- पूर्णिमा पांडेय
- संस्कृत भाषा में कालिदास रंगभारती सम्मान- ओमप्रकाश पांडेय, संपादक राष्ट्रधर्म