'मायावती बताएं वो कैसे बन गईं खरबपति'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसपा के राज्यसभा सांसद जुगुल किशोर ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि जब मेरे पास जीप थी तब पार्टी महासचिव मौर्य व नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास मोटरसाइकिल तक नहीं थी। आज सिद्दीकी हजारों करोड़ के मालिक हैं।
इसके अलावा पार्टी सुप्रीमो मायावती के पिता डाकखाने में बाबू थे। उन्हें बताना चाहिए कि आखिर उनके पास अरबों-खरबों रुपये की संपत्ति कहां से आ गई?
जुगुल किशोर ने कहा कि उनके पास अकूत संपत्ति होने का आरोप लगाया गया है और एमएलसी चुनाव के समय नामांकन का पैसा न होने की बात कही गई है। यह बात कहां से आई, उन्हें नहीं पता।
हकीकत ये है कि 1989 में मैंने जीप खरीदी थी। तब सिद्दीकी व मौर्य के पास साइकिल भी नहीं थी। मायावती ने जब बिजनौर व हरिद्वार का चुनाव लड़ा, तब वह साइकिल से चलती थीं।
'अपनी सम्पत्ति उनके नाम कर दूंगा'
जुगुल किशोर ने कहा कि उन्हें बताना चाहिए कि उनके पास अकूत संपत्ति कहां से आई? उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा में राज्यसभा का टिकट 50-50 करोड़ रुपये में बिकता है।
जुगुल किशोर ने कहा कि यदि मेरे अकूत संपत्ति लगती है तो सिद्दीकी दिल्ली सैनिक फार्म का आवास या अपने दो में से एक स्लॉटर हाउस ही दे दें। मैं अपनी पूरी संपत्ति उनके नाम कर दूंगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्दीकी के पास गाजियाबाद, बांदा, लखनऊ, बाराबंकी व नोएडा में हजारों करोड़ की बेशकीमती जमीन है।
उन्हें बताना चाहिए कि सेना में मामूली जवान के बाद सियासत में आकर उन्होंने इतनी संपत्ति कैसे हासिल की? इसकी जांच सीबीआई से क्यों नहीं होनी चाहिए।
सिद्दीकी व मौर्य भी छोड़ेंगे बसपा
जुगुल किशोर ने कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी व स्वामी प्रसाद मौर्य में से एक जल्द ही बसपा छोड़ेंगे। दूसरे कुछ दिन बाद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मौर्य हमेशा मेरे साथ रहे।
उनका आशीर्वाद हमारे साथ है। जब तक वे बसपा में हैं, तब तक पार्टी जो भी कहेगी, उसे पढ़ना पड़ेगा। उनका इशारा मौर्य की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जुगुल किशोर पर लगाए गए आरोपों की ओर था।
खुले सम्मेलन में हो राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव
बसपा सांसद ने कहा कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। काडर के लोगों की जिस तरह उपेक्षा हो रही है, उससे उनमें जबर्दस्त आक्रोश है।
पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो गया है। एक राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष का चुनाव बंद कमरे के बजाय आम कार्यकर्ताओं के बीच खुले में होना चाहिए। सबको हकीकत पता चल जाएगी।