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राममंदिर निर्माण के लिए विदेशी रामभक्त नहीं दे पा रहे चंदा, ट्रस्ट ने कर रखा है आवेदन

Thu, 17 Dec 2020 05:56 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 17 Dec 2020 05:56 PM IST
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Foreign Ram devotees are unable to give donations for the construction of Ram temple, the trust has applied
राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
राममंदिर निर्माण के लिए विदेशों में बसे रामभक्त चंदा देने के लिए बेसब्र हैं लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है। वजह यह है कि ट्रस्ट अभी तक एफसीआरए के तहत विदेशी चंदा लेने का अधिकार प्राप्त नहीं कर सका है। ट्रस्ट ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के लिए आवेदन किया गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही विदेशी फंडिंग के रास्ते खुल सकेंगे और विदेशी रामभक्त दान दे पाएंगे।
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रामभक्तों की तरफ से मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने की होड़ लगी है। देश के कोने-कोने से रामभक्त दान दे रहे हैं तो विदेशों में बसे रामभक्त भी चंदा देना चाहते हैं। ट्रस्ट कार्यालय में आए दिन विदेशी रामभक्तों के फोन आ रहे हैं। लेकिन एफसीआरए न होने से विदेशी फंडिंग नहीं हो पा रही है। यह अनुमति मिलते ही लाखों की तादाद में विदेशों में रह रहे भारतीय भी राममंदिर के लिए चंदा दे सकेंगे। अयोध्या में भूमिपूजन के बाद से मंदिर निर्माण के लिए दान देने का सिलसिला तेज है। अभी लोग चेक, मनीऑर्डर, ऑनलाइन ट्रांसफर, नकदी समेत आभूषण, चांदी की ईंटें आदि के जरिये चंदा भेज रहे हैं। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार राममंदिर के लिए एक अरब से ज्यादा का चंदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अकाउंट में जमा हो चुका है। सबसे ज्यादा चंदा ट्रस्ट के एसबीआई खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर के द्वारा आया है। राममंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में भी हर दिन करीब 20 से 30 हजार की नगदी आ रही है। ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि मुश्किल ये है कि जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विदेश में रहने वाले एनआरआई व विदेशी भक्तों की ओर से चंदा देने के लिए खूब फोन आ रहे हैं, लेकिन ट्रस्ट अभी विदेशी चंदा लेने के लिए अधिकृत नहीं है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने कहा कि अभी राममंदिर निर्माण में विदेशी भक्तों का पैसा नहीं लग पाएगा। एफसीआरए के लिए अभी एक माह पूर्व ही आवेदन किया गया है। शासन को निर्णय लेना है, वेरीफिकेेशन आदि किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही अनुमति मिल जाएगी। ऐसे नागरिक जो विदेशी में रह रहे हैं लेकिन उनके पास यदि भारतीय नागरिकता भी है तो वे राममंदिर के लिए दान कर सकते हैं।
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यह है एफसीआरए

भारत में जब कोई व्यक्ति या संस्था, एनजीओ किसी विदेशी स्रोत से चंदा लेती है तो उसे फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट ((एफसीआरए) यानी विदेशी सहयोग विनियमन अधिनियम के नियमों का पालन करना होता है पहले एफसीआरए, 1976 को लागू किया गया था, लेकिन साल 2010 में नया फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट 2010 आ गया जिसे 1 मई 2011 से लागू किया गया है।

एनआरआई कर सकते हैं राममंदिर के लिए दान
प्रवासी भारतीयों (एनआआई) के सहयोग या चंदे को विदेशी चंदा या सहयोग नहीं माना जाता और इस तरह का दान एफसीआरए के तहत नहीं आता, लेकिन यह सहयोग एनआरआई के अपने निजी बचत से होना चाहिए। इसीलिए राम मंदिर ट्रस्ट एनआरआई चंदा हासिल करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक में एक अकाउंट खोलने जा रहा है। ऐसे लोग एनआरआई कहलाते हैं जो रहते तो किसी और देश में हैं, लेकिन उनके पास इंडियन पासपोर्ट होता है यानी वे भारतीय नागरिक होते हैं।


 

एक-दो दिन में शुरू हो जाएगा रिटेनिंग वॉल का निर्माण

राममंदिर की नींव की नई डिजाइन को लेकर जहां देशभर के तकनीकी विशेषज्ञ मंथन करने पर जुटे हैं। वहीं नींव का काम शुरू करने से पहले रिटेनिंग वॉल का निर्माण एक दो दिन में प्रारंभ होने वाला है। जब तक नींव की डिजाइन फाइनल हो रही है इस बीच समय का सदुपयोग करते हुए ट्रस्ट ने रिटेनिंग वॉल निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उधर, दूसरी तरफ राममंदिर की नींव का काम शुरू होने में अभी नक्शे में पेंच फंसा हुआ है और काम शुरू होने में देरी हो रही है। इसको देखते हुए काफी मजदूरों को छुट्टी दे दी गई है। उतने ही मजदूर रामजन्मभूमि परिसर में हैं जितने रिटेनिंग वॉल के निर्माण कार्य में लगेंगेे। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया गया एक दो दिन के भीतर रिटेनिंग वॉल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। मंदिर के तीन तरफ रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी ताकि भूकंप व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर को सुरक्षित रखा जा सके।

दान करने को बेसब्र हैं विदेशी रामभक्त
राममंदिर के लिए अंशदान करने को विदेशों में बसे भारतीय रामभक्त बेसब्र हैं। इस बात की पुष्टि करते हुए अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास आचार्य लक्ष्मण दास बताते हैं कि उनके सैकड़ों की संख्या में शिष्य फिजी,अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, जर्मनी व कनाडा में हैं जो आए दिन फोन कर राममंदिर के लिए दान करने की इच्छा व्यक्त करते हैं, लेकिन उन्हें दान देने के लिए कोई लिंक नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे बेचैन हैं। आचार्य लक्ष्मण दास स्वयं भी एक लाख 11 हजार का दान कर चुके हैं। वे कहते हैं कि एफसीआर होते ही विदेशी फंडिंग की होड़ सी लग जाएगी।
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