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ब्रेन ट्यूमर के आसान इलाज के लिए 5 एएलए तकनीक की जरूरत

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2020 01:33 AM IST
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for easy treatment of brain tumor five ala technique is required
लखनऊ। राजधानी में ब्रेन ट्यूमर के इलाज की सुविधाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। चिकित्सा संस्थानों में इलाज से जुड़े कई प्रोजेक्ट लंबित हैं। ब्रेन ट्यूमर जांचने की सबसे हाईटेक टेक्निक 5 एएलए का प्रयोग दिल्ली, मुंबई के कारपोरेट चिकित्सा संस्थानों में शुरू हो गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इसमें सहयोग करे और यह व्यवस्था राजधानी के अस्पतालों में हो जाए तो ब्रेन ट्यूमर का इलाज काफी आसान हो जाएगा। ब्रेन ट्यूमर खतरनाक बीमारी मानी जाती है। यह सिर्फ मस्तिष्क को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। क्योंकि मस्तिष्क ही पूरे शरीर को संचालित करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक न्यूरो सर्जरी में ब्रेन कैंसर के 60 फीसदी व ब्रेन ट्यूमर के 40 फीसदी मरीज होते हैं। पेश है आठ जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर एक रिपोर्ट। महंगी है पर अत्याधुनिक है 5 एएलए तकनीक केजीएमयू के न्यूरो सर्जन डॉ. सौमिल जायसवाल बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के इलाज में इस समय 5 एएलए तकनीक सबसे अत्याधुनिक है। इसमें माइक्रोस्कोप से एक तरह की डाई डाली जाती है। ब्रेन के सर्किट के बीच जिस स्थान पर ट्यूमर होता है वहां लाल रंग का धब्बा दिखाई पड़ने लगता है। यह चमकदार होता है। ऐसे में उसे सटीक तरीके से पकड़ पाना बेहद आसान हो जाता है और ट्यूमर की सर्जरी भी आसानी से की जा सकती है। हालांकि इस में प्रयोग होने वाली डाई काफी महंगी है। यदि सरकार सब्सिडी या अलग से बजट का प्रावधान करे तो इस तकनीक का उपयोग अन्य सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भी शुरू हो सकता है। विभिन्न शोध रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक से बिना मरीज में बिना किसी जोखिम सर्जरी में शत प्रतिशत सफलता मिली है। जागते हुए सर्जरी को मिलेगा बढ़ावा डॉ. जायसवाल ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के जागते रहते सर्जरी का चलन भी तेजी से बढ़ा है। केजीएमयू में ऐसी सर्जरी की शुरुआत की गई है। इसका सर्जरी का फायदा ये होता है कि ब्रेन के किसी भी सर्किट में सर्जरी के दौरान होने वाले जोखिम का तत्काल पता चल जाता है। मरीज के हाथ पांव या अन्य अंग पूरी तरह से काम कर रहे हैं या नहीं इसकी जानकारी मिलती रहती है। इसमें मरीज का सिर्फ सिर सुन्न किया जाता है। बेहतर इलाज की चल रही कवायद लोहिया संस्थान में सिर के अति गंभीर ट्यूमर के इलाज के लिए गामा नाइफ का प्रस्ताव शासन भेजा गया। शासन ने इसे पास भी कर दिया है, लेकिन अभी तक संस्थान में यह मशीन लग नहीं पाई है। करीब 35 करोड़ की इस मशीन से ब्रेन ट्यूमर का इलाज बिना चीरा लगाए गामा किरणों से जला कर किया जा सकेगा। इसका सिर के किसी दूसरे हिस्से पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा एडवांस न्यूरो साइंसेज सेंटर की स्थापना भी की जा रही है। इसमें 90 बेड होंगे। लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने बताया कि गामा नाइफ मशीन से ब्रेन ट्यूमर का इलाज आसान हो जाएगा। ब्रेन ट्यूमर व इसके लक्षण ब्रेन ट्यूमर दिमाग के किसी भी हिस्से में होने वाली गांठ है। यह गांठ कई बार अपने आप बन जाती है। ज्यादा समय तक रहने से इसके कैंसर में तब्दील होने की संभावना होती है। ट्यूमर एक साल में एक सेमी. तक बढ़ जाता है। इसकी जांच सीटी स्कैन व एमआरआई से होती है। लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने बताया कि सुबह के वक्त रोजाना सिर दर्द या उल्टी का मन करे तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप करायें। यह लक्षण ब्रेन ट्यूमर के भी हो सकते हैं। इसी तरह देखने में समस्या, एक व्यक्ति दो हिस्सों में दिखना, जुबान का बंद हो जाना, अधरंग हो जाना और सुनना कम होना आदि इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। हालांकि, यदि लंबे समय से सिर्फ सिरदर्द बना हुआ है और अन्य किसी तरह की दिक्कत नहीं है तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण नहीं है। राजधानी में क्या है सुविधाएं पीजीआई, लोहिया संस्थान व केजीएमयू में ब्रेन ट्यूमर का इलाज किया जाता है। करीब 3 सेंटीमीटर तक के ट्यूमर को एक छोटे से चीरे के जरिये निकाल लिया जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सक से संपर्क करें, इसकी सर्जरी के कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। समय से सर्जरी हो जाने से मरीज के दूसरे अंगों पर प्रभाव नहीं पड़ने पाता है।
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