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Lucknow News: थाईलैंड से आए अनुयायियों ने गंधकुटी पर की प्रार्थना
Tue, 04 Mar 2025 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 04 Mar 2025 11:45 PM IST
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तपोस्थली स्थित आनंद बोधि पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से तपोस्थली पहुंचे 52 सदस्यीय दल ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर प्रार्थना की। इस दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष भी किया।
भिक्षु देवानंद ने कहा कि तथागत भगवान बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में एक शाही परिवार में हुआ था। उनका परिवार शाक्य वंश से संबंधित था, जो कपिलवस्तु, लुंबिनी में शासन करता था। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग कर तपस्या व अत्यधिक आत्म-अनुशासन की जीवनशैली को अपनाया। लगातार 49 दिनों के ध्यान के बाद गौतम ने बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे बोधि (ज्ञान) प्राप्त किया। बुद्ध ने अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास सारनाथ गांव में दिया था। इस घटना को धर्म चक्र प्रवर्तन के रूप में जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में 483 ईसा पूर्व में उनका निधन हो गया। इस घटना को महापरिनिर्वाण के नाम से जाना जाता है। सभी में काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।
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भिक्षु देवानंद ने कहा कि तथागत भगवान बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में एक शाही परिवार में हुआ था। उनका परिवार शाक्य वंश से संबंधित था, जो कपिलवस्तु, लुंबिनी में शासन करता था। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग कर तपस्या व अत्यधिक आत्म-अनुशासन की जीवनशैली को अपनाया। लगातार 49 दिनों के ध्यान के बाद गौतम ने बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे बोधि (ज्ञान) प्राप्त किया। बुद्ध ने अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास सारनाथ गांव में दिया था। इस घटना को धर्म चक्र प्रवर्तन के रूप में जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में 483 ईसा पूर्व में उनका निधन हो गया। इस घटना को महापरिनिर्वाण के नाम से जाना जाता है। सभी में काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।
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