फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   follow up of child's death in rajkiya bal grah in lucknow

राजकीय बालगृह शिशु: आठ महिला कर्मियों पर 62 बच्चों की जिम्मेदारी, वेतन के भी लाले

Wed, 09 Oct 2019 01:23 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 09 Oct 2019 01:23 PM IST
विज्ञापन
follow up of child's death in rajkiya bal grah in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

पालने से गिरने की वजह से रविवार को बच्चे की उपचार के दौरान मौत के मामले ने बालगृह की व्यवस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लेकिन इसके पीछे कई कारण ऐसे हैं जिन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। सामान्य तौर पर एक घर में एक छोटे बच्चे या नवजात को संभालने में जहां पूरा परिवार कम पड़ जाता है।

विज्ञापन


वहीं राजधानी के बालगृह में 32 नवजात और दो वर्ष से कम उम्र के 30 बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी महज आठ महिला कर्मचारियों पर है। इनमें से चार कर्मी ही एक साथ 12 घंटे ड्यूटी करती हैं। चार कर्मी रात में तो चार दिन की दिन में ड्यूटी रहती है।
विज्ञापन


यही बच्चों को सुबह उठाने, नहलाने-धुलाने, कपड़े पहनाने से लेकर दूध पिलाने, भोजन खिलाने और फिर सुलाने तक का काम करती हैं। इन महिला कर्मचारियों को छह-छह माह तक वेतन नहीं मिलता। इसके बावजूद अधीक्षिका छुट्टी पर हैं और एक टीचर को प्रभारी बना रखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

वेतन न मिलने से काम पर असर

follow up of child's death in rajkiya bal grah in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर

बारी-बारी से लगती है चार-चार कर्मियों की ड्यूटी
हजरतगंज के राजकीय बालगृह शिशु में कुल 99 बच्चे हैं। इसमें दो साल से कम उम्र के 62 शिशु हैं इनमें से 32 नवजात बच्चे हैं। इन्हें हर समय नजरों के सामने रखने की जरूरत होती है। इन बच्चों के साथ एक नर्स और तीन सहायिकाओं की ड्यूटी रहती है।

12 घंटे की डयूटी के बाद दूसरा स्टाफ नाइट करता है जिसमें भी चार कर्मचारी ही तैनात रहते हैं। दिन में अधीक्षिका व प्रभारी अधीक्षिका लेवल पर एक कर्मचारी की तैनाती है जबकि रात में वह अपने घर चला जाता है। ऐसे ही एक समाज सेविका की तैनाती रहती है जो दत्तक गृह के कार्यालय के कार्य को अंजाम देती हैं।

इस तरह की अव्यवस्था के साथ कर्मचारियों को वेतन न मिलने से भी काम पर असर पड़ना लाजमी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय खुद मानते हैं कि क्षमता से अधिक बच्चों के बावजूद स्टाफ की कमी सबसे बड़ा कारण है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के बजट में देरी और भी अव्यवस्था उत्पन्न कर रही है। बजट के लिए लिखा गया है

मासूम का हुआ अंतिम संस्कार

follow up of child's death in rajkiya bal grah in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बाल कल्याण समिति के आदेश पर उठे सवाल
राजकीय बाल गृह में बच्चों की संख्या को लेकर सवाल उठ रहा है। बालगृह का आरोप है कि बच्चों को रखने का आदेश बाल कल्याण समिति सीधे बालगृह शिशु के लिए कर देती है। जबकि शहर में सरकारी सहायता प्राप्त अन्य संस्थान भी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय का कहना है कि मोती नगर में लीलावती मुंशी बालगृह में क्षमता से अधिक बच्चे स्वीकार नहीं किए जाते और श्रीराम औद्योगिक अनाथालय अलीगंज को आदेश नहीं किया जाता। ऐसे में सारे बच्चे राजकीय बालगृह शिशु भेज दिए जाते हैं।

रविवार को बच्चे मौत के बाद उसका सोमवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी करते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट को बालगृह की जांच सौंपी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि एजेंसी के माध्यम से तैनात दो कर्मचारी नर्स नीलम व सहायिका संगीता को हटाते हुए उनकी जगह एजेंसी से दूसरे कर्मचारी की तैनाती के लिए लिख दिया गया है। साथ ही महिला एवं बाल कल्याण विभाग निदेशालय से संविदा पर तैनात सावित्री व पूजा की सेवा समाप्त करने के लिए लिखते हुए दूसरे कर्मचारी की तैनाती की मांग की है।

नर्स व आया की सेवा होगी समाप्त, जांच एसीएम पंचम को

प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु में सालभर के मासूम की मौत के मामले में डीएम कौशल राज शर्मा ने नर्स व आया की सेवा समाप्ति का निर्देश दिया है। मासूम की मौत देखभाल में लापरवाही से हुई थी। डीएम ने मामले की जांच अपर नगर मजिस्ट्रेट पंचम सुशील कुमार सिंह को सौंपी है।

वह शिशु गृह के स्टाफ की लापरवाही की जांच कर माहभर में रिपोर्ट सौंपेंगे। नर्स व आया आउटसोर्सिंग के आधार पर अनबुंध पर तैनात हैं। एसीएम पंचम ने जनसमुदाय से अपील की है कि मामले में कोई भी व्यक्ति अपना बयान अथवा साक्ष्य प्रस्तुत करने को 20 अक्तूबर तक किसी भी कार्यालय दिवस में कलेक्ट्रेट स्थित एसीएम पंचम कोर्ट में आ सकता है।

जिलाधिकारी ने बताया कि शुरूआती जांच में नर्स व आया को लापरवाही का दोषी मानते हुए उनकी सेवाओं को तत्काल समाप्त किए जाने का निर्देश भी बालगृह शिशु की संचालिका को दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed