UP: इन दो शहरों में हो रही है 'फ्लाइट स्मगलिंग'
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अमौसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और वाराणसी का हवाई अड्डा वन्यजीवों के अंगों की ‘फ्लाइट स्मगलिंग’ के लिए सॉफ्ट टारगेट बनता जा रहा है। अमौसी एयरपोर्ट पर शनिवार को हुई एक विशेष कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई।
विशेषज्ञों ने कहा कि कस्टम हों या सीआईएसएफ के अफसर, ज्यादातर वन्यजीवों के अंगों से बने सामानों के बारे में जानते ही नहीं। भारत सरकार के वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो, एयरपोर्ट, कस्टम और सीआईएसएफ के अफसरों की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि लखनऊ और वाराणसी हवाई अड्डे से दुर्लभ सामान महज जानकारी के अभाव में निकल जाते हैं।
दोनों ही जगहों से पहले पूर्वोत्तर राज्यों और अब देश के बाहर जाना आसान होता जा रहा है। धार्मिक व्यक्तियों की वेशभूषा में तस्कर हाथी दांत की बनी बेशकीमती मालाएं, मूर्तियां लेकर निकल जाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम जान नहीं पाते।
इन दुर्लभ वस्तुओं की हो रही है तस्करी
बेशकीमती लाल चंदन या रेपटाइल की खालों से बनीं दुर्लभ वस्तुएं निकल जाती हैं। विशेषज्ञों ने चीन, जापान और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में बढ़ती वन्यजीवों की तस्करी के प्रति आगाह किया।
जानकारी-पहचान होने पर ही रोकी जा सकती है ‘फ्लाइट स्मगलिंग’ विशेषज्ञों ने कहा कि बैग के अंदर सोना है या ड्रग्स, ये तो स्कैनर के जरिये हम सब देखने के आदी हो चुके हैं। लेकिन जब स्कैनर से लाल चंदन या सांप के चमड़े से बने पर्स या बैग गुजरते हैं या किसी वन्यजीव की हड्डी से बना सामान रखा हो तो वो कैसा दिखता है इसकी समझ नहीं है।
दिल्ली से आए विशेषज्ञों ने अपने साथ लाई कुछ वस्तुओं को सीआईएसएसफ, कस्टम के अधिकारियों को दिखाया। जवानों को छूकर भी दिखाया। इसके अलावा स्कैनर में वे कैसी दिखती हैं, उसकी क्लिपिंग्स भी दिखाई। कार्यशाला केदौरान विशेषज्ञों ने बताया कि सामानों की डिलीवरी करने वाले के हावभाव से भी उसे पहचाना जा सकता है।
चीन-जापान और पूर्वी एशिया में बढ़ रही डिमांड
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि वन्यजीवों के दुर्लभ कीमती अंगों की तस्करी के नए तरीके बढ़ रहे हैं। चीन, जापान और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में इनकी डिमांड बढ़ती जा रही है। ऐसे में एअरपोर्ट से उनकी तस्करी एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है, जिसे रोकने के लिये हमें उन तरीकों केअलावा उन दुर्लभ अंगों को पहचानना बहुत ही जरूरी है।
इन चीजों की हो रही है स्मगलिंग। लाल चंदन (इन दिनों दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में जबर्दस्त डिमांड), सांप-अजगर की खाल से बने तमाम सजावटी सामान, पर्स और सांप का जहर। वन्यजीवों की हड्डियों खासतौर पर हिरन की सींगें। बाघ-तेंदुए की खालें, दांतों, पंजों के अलावा अन्य अंग और हाथी दांत से बनी प्रतिमाएं और माला।
अवध के डीएफओ एससी यादव ने बताया कि लखनऊ से फिलहाल हाल केवर्षों में ऐसा कोई केस विभाग के संज्ञान में लखनऊ एयरपोर्ट से नहीं आया है। बैठक में सभी मेंबर्स-विंग्स के बीच विधिक कार्यवाही, पहचान, वाइल्ड लाइफ क्राइम स्कैंडल, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंसाइनमेंट पर चर्चा हुई।