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Lucknow News: ट्रॉमा सेंटर में पांच और नॉन पीजी जेआर ने छोड़ी नौकरी, आधे पद खाली
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ट्रॉमा सेंटर।
लखनऊ। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में पांच और नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है। काम के अत्यधिक दबाव को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। अब ट्रॉमा सेंटर में नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट के आधे पद खाली हो गए हैं।
इससे कैजुअल्टी में मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं। बेड भरने की दशा में स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 200 मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। पंजीकरण के बाद मरीजों को पहले कैजुअल्टी में भर्ती किया जाता है। कैजुअल्टी में 42 बेड उपलब्ध हैं। यहां प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों को संबंधित विभाग में भेजा जाता है।
कैजुअल्टी में नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट के करीब 46 पद स्वीकृत हैं, मगर केवल 23 नॉन पीजी जेआर तैनात हैं। इसी माह हुए इंटरव्यू में एससी कैटेगरी की सभी 10 सीटें खाली रह गईं। मरीजों का दबाव अधिक होने से उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीज स्ट्रेचर पर घंटों बिना इलाज तड़प रहे हैं। ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज ने खाली सीटों पर जल्द इंटरव्यू कराने की बात कही है।
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इससे कैजुअल्टी में मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं। बेड भरने की दशा में स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 200 मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। पंजीकरण के बाद मरीजों को पहले कैजुअल्टी में भर्ती किया जाता है। कैजुअल्टी में 42 बेड उपलब्ध हैं। यहां प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों को संबंधित विभाग में भेजा जाता है।
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कैजुअल्टी में नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट के करीब 46 पद स्वीकृत हैं, मगर केवल 23 नॉन पीजी जेआर तैनात हैं। इसी माह हुए इंटरव्यू में एससी कैटेगरी की सभी 10 सीटें खाली रह गईं। मरीजों का दबाव अधिक होने से उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीज स्ट्रेचर पर घंटों बिना इलाज तड़प रहे हैं। ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज ने खाली सीटों पर जल्द इंटरव्यू कराने की बात कही है।
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