पांच लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार ने सुनिश्चित कॅरिअर प्रोन्नयन (एसीपी) की बरसों से लंबित विसंगतियों को दूर करते हुए नए सिरे से विस्तृत शासनादेश जारी कर दिया है।
इससे सूबे के करीब पांच लाख कर्मचारियों की बड़ी मांग पूरी हो गई है। अब कर्मचारी कुछ शर्तों के साथ नियुक्ति से 10, 16 और 26 साल पर क्रमश: पहली, दूसरी व तीसरी एसीपी पा सकेंगे।
बताते चलें, सरकार ने वेतन समिति 2008 की सिफारिश के अनुसार कर्मचारियों को दिसंबर 2008 से एसीपी देने का फैसला किया था।
कर्मचारी तभी इसकी विसंगतियों को लेकर मैदान में आ गए थे। बीच में टुकड़ों-टुकड़ों में करीब नौ अन्य स्पष्टीकरण शासनादेश जारी हुए, मगर विभाग ने एकमुश्त विसंगतियों को दूर करने की कोशिश नहीं की।
ऐसे में कर्मचारी एसीपी का ठीक से लाभ नहीं पा रहे थे।
कुछ दिन पहले कर्मचारियों ने मुख्य सचिव आलोक रंजन के समक्ष यह मामला रखा।
इस पर मुख्य सचिव ने वित्त विभाग को एसीपी की समस्त विसंगतियों को दूर कर पहले के सभी शासनादेशों व स्पष्टीकरणों के स्थान पर एक विस्तृत शासनादेश जारी करने का निर्देश दिया।
बुधवार को प्रमुख सचिव वित्त राहुल भटनागर ने इस संबंध में विस्तृत शासनादेश जारी कर दिया।
इस तरह मिलेगी एसीपी
एक दिसंबर 2008 को यदि कोई कर्मी एक या एक से अधिक पदोन्नति प्राप्त कर पद के साधारण वेतनमान में है और उसे उस पद पर समय वेतनमान की पूर्व व्यवस्था में कोई लाभ नहीं मिला है, तो उसे एसीपी की व्यवस्था के अंतर्गत मिल रहे ग्रेड वेतन से अगले ग्रेड वेतन के रूप में कुल तीन एसीपी मिलेगी।
यह क्रमश: 10, 16 और 26 साल पर मिलेगी। पहली एसीपी 10 वर्ष की नियमित व लगातार संतोषजनक सेवा पूरा करने पर मिलेगी।
दूसरी एसीपी पहली एसीपी प्राप्त करने के छह वर्ष की निरंतर संतोषजनक सेवा पर मिलने की व्यवस्था है।
वहीं तीसरी एसीपी दूसरी एसीपी के रूप में स्वीकृत ग्रेड पे में 10 वर्ष की लगातार संतोषजनक सेवा या उस पद के संदर्भ में कुल 26 साल की सेवा पर मिलेगी।
इससे उन कर्मियों को नुकसान होता था जो 10 वर्ष की सेवा के बाद पहली एसीपी पाते थे। पहली एसीपी से छह वर्ष जुड़ने की शर्त होने से उन्हें दूसरी एसीपी 16 वर्ष से ज्यादा समय पर मिलती थी।
कर्मचारी नेताओं में भी खुशी की लह
अब इस विसंगति को दूर करते हुए तय किया गया है कि जिन कर्मियों को पहली एसीपी 10 वर्ष से अधिक सेवा पर एक दिसंबर 2008 से स्वीकृत हुई है, वे पहली एसीपी से छह वर्ष पूरा न करने पर भी 16 वर्ष की सेवा पर दूसरी एसीपी पाएंगे।
अर्थात नियुक्ति तिथि से 16 वर्ष पर दूसरी एसीपी निश्चित हो गई। इसके अलावा यदि किसी कर्मी की पदोन्नति पहली एसीपी मिलने के पहले लेकिन एक दिसंबर 2008 के बाद होती है, तो दूसरी एसीपी पदोन्नति की तिथि से छह साल की सेवा पर मिलने की व्यवस्था थी।
इससे कर्मी को दूसरी एसीपी 16 वर्ष से अधिक पर मिलती थी। अब इन्हें दूसरी एसीपी पहली एसीपी से छह वर्ष पर मिल जाएगी।
कर्मचारी नेताओं ने एसीपी के नए शासनादेश का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव वित्त के प्रति आभार जताया है।