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Lucknow : ट्रिपलआईटी से पहली पीएचडी, मिथक तोड़ ज्वॉइन की इंडस्ट्री, गौरव त्रिपाठी ने दिखाया नया रास्ता
Sat, 07 Jan 2023 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अक्षय कुमार, लखनऊ
अक्षय कुमार, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 07 Jan 2023 06:10 AM IST
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गौरव त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
आम तौर पर यह अवधारणा है कि पीएचडी करने वाले अधिकतर छात्र शिक्षक ही बनते हैं, लेकिन ट्रिपलआईटी लखनऊ से पहली पीएचडी पूरी करने वाले गौरव त्रिपाठी ने इस मिथक को तोड़ दिया है। उन्होंने इलेक्ट्रिसिटी व हेल्थ केयर से जुड़ी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) कंपनी में ज्वाइन किया है। उन्हें कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में सालाना 18.50 लाख के पैकेज पर तैनात किया गया है।
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गौरव ने बताया कि वह ट्रिपलआईटी से पीएचडी करने वाले पहले छात्र हैं। जब उन्होंने यहां एडमिशन लिया था तो उनका भी लक्ष्य प्रोफेसर बनने का ही था। लेकिन जब दो-तीन साल पढ़ाई की और निदेशक प्रो. अरुण मोहन शेरी के निर्देशन में व डॉ. विशाल कृष्ण सिंह के सुपरविजन में काम किया तो उनका मिथक भी टूटा। फिर उन्होंने इंडस्ट्री पर फोकस किया। उनका टॉपिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स एंड मशीन लर्निंग था जो इंडस्ट्री के लिए काफी फायदेमंद था। अंत में उनका प्लेसमेंट भी इंडस्ट्री में हुआ, जिससे अन्य छात्र भी प्रेरित होंगे। गौरव ने कहा कि आईओटी की डिवाइस थोड़ी लो होती है और कंप्यूटेशन कम होता है। इसे ज्यादा से ज्यादा मशीन लर्निंग के माध्यम से आउटपुट को बढ़ाने पर उन्होंने शोध किया है।
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मूल रूप से मऊ, चित्रकूट के रहने वाले गौरव के पिता रजनीकांत त्रिपाठी एक साधारण किसान हैं। उन्होंने तीन बहनों के साथ गौरव की भी पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं रखी। गौरव ने मऊ से इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद एसआरजीआई झांसी से बीटेक और पंजाब से एमटेक किया। इसके बाद ट्रिपलआईटी में पीएचडी में एडमिशन लिया। गौरव ने कहा कि पिता जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी कोई कमी नहीं आने दी। मैं उनकी ड्रीम कार होंडा सिटी उनको गिफ्ट करना चाहता हूं।
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कंपनी में सभी विदेश से पीएचडी-पीजी
गौरव ने बताया कि अभी उन्हें बंगलूरू में तैनाती मिली है। फिलहाल, हाइब्रिड मोड पर काम चल रहा है। उनके सभी सहयोगी विदेश से पीएचडी या पीजी किए हुए हैं। अपने देश से वह इकलौते पीएचडी होल्डर हैं। उन्होंने कहा कि शोधार्थी अच्छे टॉपिक और इंडस्ट्री की जरूरत को ध्यान में रखकर काम करें तो उन्हें काफी बेहतर अवसर मिलेंगे।
बेटे-बेटियों के लिए मां ने नहीं की नौकरी
गौरव ने बताया कि उन्हें यहां तक पहुंचाने में मां इंद्रा त्रिपाठी का काफी महत्वपूर्ण योगदान है। जब वे और बहनें छोटी थीं, तब लगभग 1994-95 के पास गांव में नया गर्ल्स इंटर कॉलेज खुला था। मां एमए पास थीं, इसलिए उन्हें इस कॉलेज में प्रधानाचार्य का पद ऑफर किया गया, लेकिन बच्चों के लिए उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया।
हमें पीएचडी के बाद की जॉब को लेकर मिथक तोड़ने की जरूरत है। प्रोडक्ट बेस्ड कंपनियों में पीएचडी धारकों की काफी मांग है। इतना ही नहीं विदेशों में पीएचडी धारकों की काफी मांग है। हम पीएचडी छात्रों के प्लेसमेंट के लिए अलग से प्रयास कर रहे हैं।
प्रो. अरुण मोहन शेरी, निदेशक, ट्रिपलआईटी