हज यात्रियों का पहला जत्था मदीना रवाना, यात्री बोले- हाजी पुकारा जाना रूहानी अहसास
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आजमीन-ए-हज का पहला जत्था सोमवार को यहां अमौसी एयरपोर्ट से मदीना मुनव्वरा के लिए रवाना हुआ। इसमें 166 पुरुष और 133 महिलाएं शामिल हैं।
इससे पहले सरोजनीनगर स्थित हज हाउस में इन हज यात्रियों को अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, हज राज्य मंत्री मोहसिन रजा व राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने रवाना किया।
इस दौरान चौधरी ने हज यात्रियों से समाज और देश व प्रदेश की तरक्की और अमन के साथ सरकार की कामयाबी के लिए दुआ करने की भी अपील की।
वहीं, मोहसिन रजा ने कहा कि राज्य सरकार की पहल पर हज यात्रियों की मदद के लिए 146 खादिमुल हुज्जाज भेजे जा रहे हैं। इसके लिए हज हाउस को वातानुकूलित किया गया है, जिससे हज यात्रियों को परेशानी न हो।
ये भी रहें मौजूद
हज यात्रियों की रवानगी के मौके पर उनके परिवारीजन, राज्य हज कमेटी के सचिव आरपी सिंह, हज कमेटी ऑफ इंडिया के सदस्य मोहम्मद अशरफ मियां, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य एवं ईदगाह के इमाम मौलाना खादिल रशीद फरंगी महली आदि मौजूद थे।
फैमिना अस्पताल एवं ट्रामा सेंटर की ओर से हज हाउस में शिविर लगाकर करीब 300 हज यात्रियों को प्राथमिक उपचार की किट बांटी गईं। इसके 21 हज यात्रियों को दिमागी बुखार का टीका लगाया गया।
मेडिकल किट वितरण व टीकाकरण शिविर हज की आखिरी उड़ान तक चलेगा। डॉ. शुभ्रा पांडेय ने बताया कि बीते दो दिनों में करीब दो दर्जन हज यात्रियों को बुखार व दर्द की शिकायत होने पर उनकी जांच कर दवाएं दी गईं।
शिया हज यात्रियों को हज शिड्यूल का इंतजार
शिया समुदाय के 280 हज यात्रियों को अपने हज यात्रा शिड्यूल का इंतजार है।
तंजीम ए हैदरी के महासचिव हाजी शेख सईद हुसैन ने बताया कि इस बार भी हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा से शिया समुदाय के लिए अलग व्यवस्था की मांग की गई है, लेकिन अब तक उनका शिड्यूल नहीं आया है।
इससे शिया समुदाय के हज यात्रा को लेकर संशय बना हुआ। उधर, राज्य हज कमेटी के हज अधिकारी आरिफ का कहना है कि अभी इस पर निर्णय लिया जाना है।
विदाई के वक्त बहे आंसू, कहा- अल्लाह हाफिज
या इलाही दिखा दे मदीना, वो कैसी बस्ती है, जहां पर हर रात-दिन, तेरी रहमत बरसती है। दिल में हज की लगन लगाए आजमीन-ए-हज से अल्लाह के घर का दीदार करने की खुशी छुपाए नहीं छुप रही थी।
हज यात्री अपनों से दूर जाते वक्त एक-दूसरे से गले लगकर नम आंखों से विदा हो रहे थे। साथ ही अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए सफर की कामयाबी की दुआ करने को कह रहे थे। हज हाउस में सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।
आजमीन-ए-हज ने हज की तमन्ना पूरी होने पर ‘अमर उजाला’ से अपने जज्बातों को बांटा। विकासनगर, लखनऊ निवासी अमीन अस्करी अपने 88 वर्षीय ख्वाजा हसन अस्करी को हज करवाने जा रहे हैं।
उनके पिता हसन अस्करी ने रब का शुक्र अदा करते हुए कहा कि अल्लाह के घर पर जाकर अपने गुनाहों की मांफी मांगेंगे। वहीं, लखनऊ के ही नक्खास निवासी जुबैर अहमद के चेहरे पर अपनी 70 वर्षीय पिता वसी अहमद और 75 वर्षीय फूफी नफीसजहां को हज कराने खुशी दिख रही थी। वसी अहमद ने कहा कि अल्लाह ने उनकी सुन ली है, अल्लाह हज कुबूल करे।
हाजी पुकारा जाना एक रूहानी अहसास है
अकेले हज पर जा रहे इटावा निवासी फुरकान अहमद का कहना था कि हज करने के बाद इंसान को हाजी पुकारा जाना अपने आप में रुहानी अहसास है।
बाराबंकी निवासी 70 वर्षीय मोहम्मद यूनुस ने कहा, उन्हें अभी से अल्लाह का घर दिखाई देने लगा है। वह अपनी पत्नी हसीन फातिमा के साथ हज पर जा रहे हैं।
उम्र के 76 साल पूरे कर चुके बलरामपुर के मोहम्मद इदरीस अपनी पत्नी नूरुस्सबा के साथ हज के मुकददस सफर को जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वक्त प्रदेश व देश के हालात बिगड़े हुए हैं, ऐसे में खान-ए-काबा में गुनाहों की माफी के साथ-साथ प्रदेश की खुशहाली की दुआ भी करेंगे।
वहीं हरदोई निवासी सैफ अली अपनी दादी 70 वर्षीय नाजिबा बेगम के साथ हज करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि हज के बाद वो सच्चे रास्ते पर चलने की पूरी कोशिश करेंगे।