{"_id":"6adbc0e19e5053788709be90","slug":"first-dna-lab-of-any-medical-college-in-the-state-started-in-kgmu-lucknow-news-c-13-lko1070-1978893-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: केजीएमयू में प्रदेश के किसी मेडिकल कॉलेज की पहली डीएनए लैब शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: केजीएमयू में प्रदेश के किसी मेडिकल कॉलेज की पहली डीएनए लैब शुरू
विज्ञापन
केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग में शुक्रवार को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग लैब फॉरेंसिक जेनेटिक्स एवं मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स का उद्घाटन किया। संस्थान के अनुसार, यह उत्तर प्रदेश के किसी मेडिकल कॉलेज में स्थापित पहली डीएनए लैब है। इसके साथ ही 23 और 24 अक्तूबर को फॉरेंसिक डीएनए प्रोफाइलिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला भी हुई।
कुलपति ने कहा कि लैब का उपयोग फॉरेंसिक जांच के अलावा बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद काइमेरिज्म विश्लेषण जैसे मेडिकल रिसर्च में भी होगा। भविष्य में डीएनए आधारित कई अन्य जांच विकसित करने में भी लैब अहम भूमिका निभाएगी।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि डीएनए प्रोफाइलिंग आधुनिक फॉरेंसिक जांच की महत्वपूर्ण तकनीक है। इससे लावारिस शवों और लापता लोगों की पहचान, आपदाओं में मृतकों की शिनाख्त, पितृत्व विवाद तथा अस्पतालों में बच्चों की अदला-बदली जैसे मामलों की जांच में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
लैब की प्रभारी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशु प्रिया ने बताया कि भविष्य में कैंसर में माइक्रोसैटेलाइट जांच, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए रिपीट-एक्सपेंशन टेस्ट और सेल-लाइन ऑथेंटिकेशन जैसी उन्नत जांच शुरू करने की योजना है। डॉ. पंकज श्रीवास्तव, बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और झारखंड फॉरेंसिक लैब के डॉ. ज्वाला कुमार नंद ने भी विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
विज्ञापन
कुलपति ने कहा कि लैब का उपयोग फॉरेंसिक जांच के अलावा बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद काइमेरिज्म विश्लेषण जैसे मेडिकल रिसर्च में भी होगा। भविष्य में डीएनए आधारित कई अन्य जांच विकसित करने में भी लैब अहम भूमिका निभाएगी।
विज्ञापन
फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि डीएनए प्रोफाइलिंग आधुनिक फॉरेंसिक जांच की महत्वपूर्ण तकनीक है। इससे लावारिस शवों और लापता लोगों की पहचान, आपदाओं में मृतकों की शिनाख्त, पितृत्व विवाद तथा अस्पतालों में बच्चों की अदला-बदली जैसे मामलों की जांच में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
लैब की प्रभारी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशु प्रिया ने बताया कि भविष्य में कैंसर में माइक्रोसैटेलाइट जांच, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए रिपीट-एक्सपेंशन टेस्ट और सेल-लाइन ऑथेंटिकेशन जैसी उन्नत जांच शुरू करने की योजना है। डॉ. पंकज श्रीवास्तव, बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और झारखंड फॉरेंसिक लैब के डॉ. ज्वाला कुमार नंद ने भी विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।