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अंग्रेजों से जुड़ी हर निशानी पर फहरा दिया गया था तिरंगा, ऐसी थी पहली 26 जनवरी की यादगार सुबह

Sat, 26 Jan 2019 02:14 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 26 Jan 2019 02:14 PM IST
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first celebration of 26 january in lucknow.

गणतंत्र दिवस की खुशियों का गवाह पुराना लखनऊ आजादी के बाद से अलग रंग और जोश में था। सुबह होने से पहले ही प्रभात फेरियों से गूंजते पुराने लखनऊ ने पूरे देश को पूर्ण आजादी के जज्बे का संदेश दिया। अंग्रेजों की निशानी हुसैनाबाद घंटाघर के ऊपर और रूमी गेट पर तिरंगे के नीचे हजारों लोग खुली हवा में सांस ले रहे थे। पहली 26 जनवरी 1950 लखनऊ की यादगार सुबह थी।

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इतिहासकार रोशन तकी बताते हैं कि अंग्रेजों की गुलामी से पूरी तरह आजाद होने का जश्न दो महीने पूर्व 26 नवंबर 1949 को पारित संविधान के साथ ही शुरू हो गया था। 26 जनवरी 1950 को चौक, नक्खास और अमीनाबाद में रतजगा के साथ प्रभात फेरियों का दौर था।
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दूर हुआ 1947 के बंटवारे का दर्द

इतिहासकारों की मानें तो 15 अगस्त 1947 में आजादी के दौरान बंटवारे का दर्द पूरे देश को समेटे था लेकिन लखनऊ एक ऐसा शहर था जहां से कोई जाना नहीं चाहता था, फिर भी जश्न में एक खामोशी थी। मगर 26 जनवरी 1950 के दिन इस दर्द को मिटाकर जो जोश दिखा उसे लखनऊ भुला नहीं सकता। यहां आने वालों को गले लगाने के साथ उन्हें आश्रय देने का काम भी हुआ।

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रूमी गेट बना पूर्णता आजादी का केंद्र

first celebration of 26 january in lucknow.
लखनऊ का रूमी गेट। - फोटो : roomi gate

नवाबीन-ए-अवध के दौर की विरासतों को समेटे प्रिंसेस फराहना मालिकी की मानें तो पहले गणतंत्र दिवस का जोश इसलिए लखनऊ की फिजा में ज्यादा था, क्योंकि 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम की यादें यहां बसती हैं।

रूमी गेट एक ऐसा मरकज था, जहां से जंग-ए-आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका गया। आजादी के तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 में यहां तिरंगा फहराया गया।

हुसैनाबाद घंटाघर पर चढ़कर फहराया था तिरंगा

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लखनऊ का घंटा घर। - फोटो : amar ujala

इतिहासकार बताते हैं कि शीश महल के आसपास तिरंगा ही तिरंगा दिख रहा था। लोग हुसैनाबाद स्थित घंटाघर पर चढ़ गए और तिरंगा फहरा कर अंग्रेजों की गुलामी से निकलने का संदेश दिया।

मस्जिदों से दी गई थी आजादी की मुबारकबाद

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मस्जिदों में अजान से पूर्व आजादी की मुबारकबाद गूंजने के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी गई थी। बकौल मौलाना सैफ अब्बास नकवी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या से ही शहर में जश्न तारी था।

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