गल्ला मंडी के गोदाम में लगी आग, सब स्वाहा
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राजधानी लखनऊ के अलीगंज के गल्ला मंडी में सोमवार दोपहर करीब साढ़े चार बजे हाईटेंशन लाइन में शार्ट सर्किट से निकली चिंगारियों ने बोरा गोदाम और फ्रूट कंपनी को खाक कर दिया। गोदाम में रखे लाखों बोरे पलभर में ही धू-धूकर जलने लगे।
गोदाम व फ्रूट कंपनी के कर्मचारी और आसपास के दुकानदार भाग खड़े हुए। फायर बिग्रेड ने मौके पर पहुंचकर लपटों पर काबू पाया। तीन घंटे की मशक्कत के बाद शाम करीब साढ़े आठ बजे आग बुझाई जा सकी।
चीफ फायर अफसर अभय भान पांडे ने बताया कि गल्ला मंडी में विशाल ट्रेडिंग कंपनी के नाम से एसबीआई सीतापुर रोड निवासी पीकू अग्रवाल का गल्ला मंडी में बोरा गोदाम है। इसके पड़ोस में एक ही परिसर में मुन्ना सिंह की सिंह फ्रूट कंपनी, नानू सिंह की नानू फ्रूट कंपनी और मो. नासिर की मो. नासिर एंड संस के नाम से फ्रूट कंपनी है।
शाम करीब साढ़े चार बजे सिंह फ्रूट कंपनी के बाहर बैठकर केले का गुच्छा काट रहे फल विक्रेता गंगाराम ने हाईटेंशन लाइन में शार्ट सर्किट होते देखा। गंगाराम का कहना है कि शार्ट सर्किट से निकली चिंगारियां बोरा गोदाम के ऊपर गिर रही थीं। भीषण गर्मी में सूखे बोरों पर गिरी चिंगारियां चंद पलों में लपटों में बदल गईं।
इस तरह भड़की आग
गंगाराम ने मुन्ना सिंह को इसकी जानकारी दी। दोनों शोर मचाते हुए गोदाम की तरफ भागे। गल्ला मंडी के दुकानदार व आसपास के लोग एकत्र हो गए और आग बुझाने के लिए पानी से भरी बाल्टियां लेकर दौड़े। हालांकि, तब तक लपटों विकराल हो चुकी थीं। किसी की गोदाम और फ्रूट कंपनी के भीतर घुसने की हिम्मत नहीं हुई।
फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का काम शुरू किया। चीफ फायर अफसर ने बताया कि कुल सात फायर टेंडर लगे जिसमें इंदिरानगर फायर स्टेशन के दो, हजरतगंज, चौक व बीकेटी का एक-एक शामिल था। उन्होंने बताया कि तीन घंटे में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया था।
उधर, पीकू अग्रवाल का कहना है कि गोदाम में दस लाख रुपये कीमत के करीब आठ लाख बोरे रखे थे। फ्रूट कंपनियों के संचालकों ने भी तीन लाख रुपये का माल स्वाहा होने की बात कही है।
सूचना के एक घंटे बाद पहुंची फायर ब्रिगेड
मुन्ना सिंह ने बताया कि गंगाराम से सूचना मिलते ही उन्होंने फायर स्टेशन का नंबर 101 मिलाया लेकिन वह बिजी था। उन्होंने कई बार 101 नंबर डायल किया लेकिन व्यस्त बताता रहा।
करीब पंद्रह मिनट बाद नंबर मिला तो आग की सूचना दी गई। इसके बावजूद फायर ब्रिगेड की टीम एक घंटे बाद पहुंची। मंडी समिति के सचिव अजीत चौधरी का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड सही वक्त पर आ जाती तो शायद नुकसान कम होता।
जेसीबी मंगाकर हटवाए सुलगते बोरे
गोदाम के भीतर लाखों बोरे परत बनाकर रखे गए थे। इन बोरे में आग काफी नीचे तक पहुंच गई थी। फायर ब्रिगेड बोरे में पानी डालकर लपटें बुझाती लेकिन कुछ देर बाद नीचे से सुलगते बोरे फिर लपटों में घिर जाते थे।
काफी देर प्रयास के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को बार-बार आग लगने की वजह समझ में आई। इसके बाद जेसीबी मंगाकर बोरे पलटवाकर पानी डाला गया तब आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका।
दुकानें खाली की, कर्मचारी भागे, मची रही चीख-पुकार
गल्ला मंडी में अग्निकांड से एक घंटे तक चीख-पुकार और अफरातफरी मची रही। फायर ब्रिगेड के पहुंचने में विलंब से गोदाम के आसपास स्थित दुकानों के मालिक व कर्मचारी बौखला उठे। बदहवास दुकान मालिक ने कर्मचारियों की मदद से सामान निकलवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया।
जिन दुकानों से सामान निकालना संभव नहीं था वहां के मालिक व कर्मचारी पानी के ड्रम की व्यवस्था करने में जुट गए। लोगों की कोशिश थी कि गरम हवा से आग आसपास की दुकानों तक न फैले। एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड आई तब दुकानदारों ने राहत की सांस ली।
गल्ला मंडी में आग भड़काने का हर सामान मौजूद
गल्ला मंडी में आग भड़काने का हर सामान मौजूद है। लकड़ी की खपच्चियों और टट्टर के ढांचे, जमीन पर फैली टाट व बोरे, टाट के पर्दे, दुकान की छतों पर पड़ी प्लास्टिक शीट और फूस तथा अवैध कब्जे भीषण अग्निकांड को दावत दे रहे हैं।
फायर ब्रिगेड के अफसरों का कहना है कि गरम मौसम में ऐसी जगहों पर जल्दी आग लगती है। कई बार अतिक्रमण के चलते अग्निकांड वाली जगह पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है।