लापरवाही की हद: LDA में लगा है 15 करोड़ का कंट्रोल पैनल, पर अलार्म बंद, आग लगने पर बजता कैसे
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एलडीए के जिस रिकॉर्ड रूम में अति महत्वपूर्ण फाइलें रखी गई हों, उसकी सुरक्षा में बरती गई लापरवाही देख घोटाले, भ्रष्टाचार व साजिशों की बू आने लगी है। पुरानी इमारत के चौथे तल पर बने रिकॉर्ड रूम में आग बुझाने के उपकरण तो लगे हैं, लेकिन आग लगने पर यह कितना काम करेंगे, इसकी जांच कभी हुई ही नहीं। जिस वक्त आग लगी, उस समय करीब 15 करोड़ रुपये खर्च कर लगाया गया कंट्रोल पैनल से लेकर अलार्म सिस्टम तक बंद पड़ा था।
एलडीए के रिकॉर्ड रूम की एंट्री पर ही फायर अलार्मिंग सिस्टम और कंट्रोल पैनल लगाया गया है।उपकरणों को शुरू करने के लिए स्विच भी इसी कंट्रोल पैनल के साथ लगा हुआ है। जिस समय आग लगी, उस समय यह पूरा सिस्टम बंद पड़ा हुआ था। बिजली आपूर्ति भी ठप पड़ी थी,, जिसके कारण सिस्टम चालू नही हो सकता था। केवल चौथे तल का ही नहीं बाकी तलों पर भी यही हाल एलडीए की पुरानी बिल्डिंग में है।
सुरक्षाकर्मियों में से एक ने बताया कि रिकॉर्ड रूम में जब आग लगी। उस समय वहां लगे फायर एक्टिंग्विशर के सिलिंडर भी काम नहीं कर रहे थे। केवल एक सिलिंडर ने काम किया। बाकी चार से पांच सिलिंडर दूसरे तलों से निकालकर सुरक्षाकर्मी लाए। इसके लिए भूतल तक सुरक्षाकर्मियों को सीढ़ियों से होकर जाना पड़ा। इससे आग अधिक देर तक जलती रही।
सीसीटीवी शोपीस : अब कैसे पता चलेगा, कौन आया-कौन गया
एलडीए के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की सुरक्षा का आलम यह है कि सीढ़ियों और लिफ्ट के पास लगे सीसीटीवी काम नहीं कर रहे। इससे यह भी पता नहीं चल सकता कि वहां कौन आया और गया। वहीं आग बुझाने के लिए जो फायर हाइड्रेंट पॉइंट भी लगाए गए। वह भी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में आग अगर फैलती भी तो दूसरे तलों पर भी आग पहुंच सकती थी।
स्कैनिंग बंद : जांच के बाद होगा शुरू
राइटर कंपनी ने शनिवार की तड़के आग लगने के बाद स्कैनिंग का काम बंद कर दिया है। एलडीए के अधिकारियों के आदेश पर अब अगले कुछ दिनों तक गोमतीनगर मुख्यालय में फाइलों की स्कैनिंग बंद रहेगी। रिकॉर्ड रूम को भी बंद कर दिया गया है। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही इस रिकॉर्ड रूम को आगे खोला जाएगा।
विडंबना: सुरक्षाकर्मी नहीं जानते आग बुझाने के उपकरण लगाना
करोड़ों रुपये खर्च करके आग बुझाने के उपकरण लगाए गए,लेकिन वह मौके पर काम आएंगे या नहीं, इसकी कभी पड़ताल नहीं की गई। पिछले तीन साल में कोई मॉकड्रिल तक नहीं की गई। एलडीए स्टाफ और सुरक्षाकर्मी यह भी नहीं जानते कि उपकरणों की खरीद का सही तरीका क्या है।
शासन ने भी मांगी रिपोर्ट
एलडीए के रिकॉर्ड रूम में लगी आग पर अब शासन ने भी रिपोर्ट मांगी है। एलडीए से आवास विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूछा है कि आग कैसे लगी? इसके अलावा इसमें हुए नुकसान और जल गए रिकॉर्ड पर भी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। वहीं शुरुआती जांच में यूपीएस की बैटरी से शॉर्ट सर्कि ट की जानकारी देने वाली समिति के सदस्य एक्सईएन इलेक्ट्रिकल वीके शर्मा और तहसीलदार राजेश शुक्ला अब मंगलवार तक अपनी रिपोर्ट वीसी को सौंपेगे।
सराहनीय : पूर्व सैन्य अधिकारी ने बचाया ज्यादा नुकसान
शनिवार को तड़के जब आग लगी, तब राइटर कंपनी का स्टाप उसे बुझाने के बजाय वहां से भाग लिया। आग लगने की सूचना जैसे ही नीचे मौजूद भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम के सुरक्षाकर्मियों और उनके सुपरवाइजर अवध नरेश को मिली, वे दौड़े चले आए। रिकॉर्ड रूम की आग बुझाने के प्रयास में सेना से रिटायर्ड सूबेदार अवध नरेश खुद भी जख्मी हो गए।
रिकॉर्ड रूम में लगी फॉल्स सीलिंग के पिघलकर उनके सिर और हाथों के ऊपर पिघलकर गिरने से ऐसा हुआ। वीसी प्रभु एन सिंह ने खुद उनके प्रयासों की तारीफ की। उनका कहना है कि सुरक्षाकर्मियों की वजह से आग फैलने से रोकी जा सकी। इससे नुकसान भी कम हुआ।