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Lucknow News: सनराइज इंफ्रा के मालिक पर 53 लाख ठगने का केस, दो साल पहले मकान का सौदा कर ली थी रकम
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राजधानी में लाखों की ठगी के मामले आए सामने। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
गोमतीनगर विस्तार में मकान बेचने का झांसा देकर सनराइज इंफ्रा के मालिक मनोज कुमार सिंह ने परिचित रविंद कुमार यादव से 53 लाख रुपये ठग लिए।
दो साल पहले मकान का सौदा कराया था। इसके लिए 55 लाख रुपये लिए। रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल करते रहे। दबाव बनाने पर मकान देने से इनकार किया और दो लाख रुपये लौटाए। पीड़ित की शिकायत पर एसीपी गोमतीनगर वीरेंद्र विक्रम के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर विस्तार अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, बलिया के बांसडीह में रविंद कुमार ने बताया कि बलिया में पड़ोसी व पूर्व परिचित मनोज कुमार सिंह गोमतीनगर विस्तार स्थित गंगोत्री विहार सहकारी आवास समिति छोटा भरवारा में रहते हैं।
मनोज सनराइज इंफ्रा के नाम से कंपनी चलाते हैं। 2020 में मनोज ने लखनऊ स्थित मकान बेचने के लिए बात की थी। झांसा देकर मनोज ने पैसे ले लिए।
इसके बाद न तो मकान की रजिस्ट्री कराई और न ही अब रकम लौटा रहा है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, शिकायत मिली थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर केस दर्ज कर लिया गया है।
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साझीदार ने 38 लाख का किया हेरफेर
गोमतीनगर विस्तार थाने में टीएफएम एसोसिएट के मालिक आलोक कपूर ने साझीदार विवेक बत्रा पर केस दर्ज कराया है। आरोप है कि विवेक ने 10 लाख का सामान बिना बिलिंग के बेच दिया। इसके अलावा फर्म व बैंक के कागजों में छेड़छाड़ कर 28 लाख रुपये हड़प लिए। हिसाब मांगने पर धमकी दे रहा है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही है।
प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, ओमेक्स रेजीडेंसी टॉवर-2 निवासी आलोक कपूर ने बताया कि उनकी फर्म का कार्यालय गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-6 स्थित सुलभ आवास में है। उनके साझीदार एम्ब्रोसिया ओमेक्स रेजीडेंसी अर्जुनगंज सरसवां निवासी विवेक बत्रा हैं। उनकी फर्म लॉजिस्टिक एवं प्रशासनिक कार्य करती है। फर्म में वित्तीय लेनदेन का पूरा जिम्मा विवेक पर था।
रिश्तेदार ने कारोबार के नाम पर मांगे 30 लाख हड़पे
गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-1 निवासी व्यवसायी दिवाकर सिंह ने अपने साढ़ू भाई शांतनु सिंह पर 30 लाख रुपये हड़पने के आरोप में केस दर्ज कराया है। कारोबार करने के लिए मांगी रकम थी। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, दिवाकर ने बताया कि 22 नवंबर 2018 को यमुना अपार्टमेंट निवासी शांतनु सिंह को 30 लाख नकद दिए थे। आरोपी ने छह माह में रकम लौटाने की बात कही थी। तय समय के बाद भी रकम नहीं मिली तो शांतनु ने कुछ और समय मांगा। इसके बाद लंबा लॉक डाउन हो गया। इसके कारण व्यापार में घाटा होने की बात कही। शांतनु ने बस्ती का मकान बेचकर रकम देने का आश्वासन दिया था। कुछ समय बाद पता चला कि शांतनु ने मकान बेच दिया है। दिवाकर ने पैसों के लिए दबाव बनाया तो टालमटोल करने लगा। इसके बाद मोबाइल भी उठाना बंद कर दिया। आरोप है कि शांतनु ने कई लोगों से ऐसे ही ठगी की है।
33.80 लाख हड़पे, दिए जाली रसीद व बॉन्ड
काकोरी के विनीत सिंह ने अर्न एंड ग्रो एमआरपी निधि लि. कंपनी पर 33.80 लाख रुपये हड़पकर जाली रसीद व बॉन्ड देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने सरोजनीनगर थाने में केस दर्ज कराया है। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार आर्य के मुताबिक, काकोरी के सलेमपुर पतौरा के विनीत ने बताया कि 2015 में देवलोक नई बस्ती स्थित अर्न एंड ग्रो एमआरपी निधि लि. कंपनी में एजेंट था। कंपनी ने सरोजनीनगर में दफ्तर बना रखा था। सीएमडी सुमित्रा वर्मा, उनके पति निदेशक मदन मुरारी वर्मा, निदेशक राजेंद्र कुमार मिश्रा, गुरू प्रसाद व अन्य लोगों से मुलाकात हुई। पीड़ित ने कंपनी की एफडी स्कीम में 33.80 लाख रुपये निवेश किया था। इस पर सीएमडी ने पॉलिसी प्रमाण पत्र दिया। काफी समय बाद रकम मांगी तो आरोपी टालमटोल करते रहे। पीड़ित कंपनी के कार्यालय व दंपती के संतकबीरनगर घर पर गया तो ताला मिला। दूसरे सह निदेशक राजेंद्र कुमार मिश्रा के घर शांतिनगर गया तो वहां भी ताला लटकता मिला। पड़ताल में पता चला कि आरोपित करोड़ों का फर्जीवाड़ा कर भाग गए हैं। पीड़ित ने सरोजनीनगर थाने में इसकी शिकायत की थी।
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दो साल पहले मकान का सौदा कराया था। इसके लिए 55 लाख रुपये लिए। रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल करते रहे। दबाव बनाने पर मकान देने से इनकार किया और दो लाख रुपये लौटाए। पीड़ित की शिकायत पर एसीपी गोमतीनगर वीरेंद्र विक्रम के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर विस्तार अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, बलिया के बांसडीह में रविंद कुमार ने बताया कि बलिया में पड़ोसी व पूर्व परिचित मनोज कुमार सिंह गोमतीनगर विस्तार स्थित गंगोत्री विहार सहकारी आवास समिति छोटा भरवारा में रहते हैं।
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मनोज सनराइज इंफ्रा के नाम से कंपनी चलाते हैं। 2020 में मनोज ने लखनऊ स्थित मकान बेचने के लिए बात की थी। झांसा देकर मनोज ने पैसे ले लिए।
इसके बाद न तो मकान की रजिस्ट्री कराई और न ही अब रकम लौटा रहा है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, शिकायत मिली थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर केस दर्ज कर लिया गया है।
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साझीदार ने 38 लाख का किया हेरफेर
गोमतीनगर विस्तार थाने में टीएफएम एसोसिएट के मालिक आलोक कपूर ने साझीदार विवेक बत्रा पर केस दर्ज कराया है। आरोप है कि विवेक ने 10 लाख का सामान बिना बिलिंग के बेच दिया। इसके अलावा फर्म व बैंक के कागजों में छेड़छाड़ कर 28 लाख रुपये हड़प लिए। हिसाब मांगने पर धमकी दे रहा है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही है।
प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, ओमेक्स रेजीडेंसी टॉवर-2 निवासी आलोक कपूर ने बताया कि उनकी फर्म का कार्यालय गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-6 स्थित सुलभ आवास में है। उनके साझीदार एम्ब्रोसिया ओमेक्स रेजीडेंसी अर्जुनगंज सरसवां निवासी विवेक बत्रा हैं। उनकी फर्म लॉजिस्टिक एवं प्रशासनिक कार्य करती है। फर्म में वित्तीय लेनदेन का पूरा जिम्मा विवेक पर था।
रिश्तेदार ने कारोबार के नाम पर मांगे 30 लाख हड़पे
गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-1 निवासी व्यवसायी दिवाकर सिंह ने अपने साढ़ू भाई शांतनु सिंह पर 30 लाख रुपये हड़पने के आरोप में केस दर्ज कराया है। कारोबार करने के लिए मांगी रकम थी। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, दिवाकर ने बताया कि 22 नवंबर 2018 को यमुना अपार्टमेंट निवासी शांतनु सिंह को 30 लाख नकद दिए थे। आरोपी ने छह माह में रकम लौटाने की बात कही थी। तय समय के बाद भी रकम नहीं मिली तो शांतनु ने कुछ और समय मांगा। इसके बाद लंबा लॉक डाउन हो गया। इसके कारण व्यापार में घाटा होने की बात कही। शांतनु ने बस्ती का मकान बेचकर रकम देने का आश्वासन दिया था। कुछ समय बाद पता चला कि शांतनु ने मकान बेच दिया है। दिवाकर ने पैसों के लिए दबाव बनाया तो टालमटोल करने लगा। इसके बाद मोबाइल भी उठाना बंद कर दिया। आरोप है कि शांतनु ने कई लोगों से ऐसे ही ठगी की है।
33.80 लाख हड़पे, दिए जाली रसीद व बॉन्ड
काकोरी के विनीत सिंह ने अर्न एंड ग्रो एमआरपी निधि लि. कंपनी पर 33.80 लाख रुपये हड़पकर जाली रसीद व बॉन्ड देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने सरोजनीनगर थाने में केस दर्ज कराया है। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार आर्य के मुताबिक, काकोरी के सलेमपुर पतौरा के विनीत ने बताया कि 2015 में देवलोक नई बस्ती स्थित अर्न एंड ग्रो एमआरपी निधि लि. कंपनी में एजेंट था। कंपनी ने सरोजनीनगर में दफ्तर बना रखा था। सीएमडी सुमित्रा वर्मा, उनके पति निदेशक मदन मुरारी वर्मा, निदेशक राजेंद्र कुमार मिश्रा, गुरू प्रसाद व अन्य लोगों से मुलाकात हुई। पीड़ित ने कंपनी की एफडी स्कीम में 33.80 लाख रुपये निवेश किया था। इस पर सीएमडी ने पॉलिसी प्रमाण पत्र दिया। काफी समय बाद रकम मांगी तो आरोपी टालमटोल करते रहे। पीड़ित कंपनी के कार्यालय व दंपती के संतकबीरनगर घर पर गया तो ताला मिला। दूसरे सह निदेशक राजेंद्र कुमार मिश्रा के घर शांतिनगर गया तो वहां भी ताला लटकता मिला। पड़ताल में पता चला कि आरोपित करोड़ों का फर्जीवाड़ा कर भाग गए हैं। पीड़ित ने सरोजनीनगर थाने में इसकी शिकायत की थी।