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एंबुलेंस सेवा में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज

Mon, 27 Sep 2021 12:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 12:32 AM IST
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Fir of fraud logged against four fraudster
पीड़ितों ने दर्ज कराई धोखाधड़ी की एफआईआर। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
यूपी एंबुलेंस सेवा 102 व 108 को चलाने वाली जीवीकेईएमआरआई कंपनी के खिलाफ ठगी का मुकदमा दर्ज किया गया।
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दो पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने एंबुलेंस चालक व इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये वसूले। लेकिन नौकरी नहीं मिली।
आशियाना थाने में तहरीर के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ितों ने कोर्ट में शरण ली। अदालत के आदेश पर पुलिस ने कंपनी के स्टेट हेड एसके रेड्डी और निदेशक कालिंदनी कृष्णम राजू सहित चार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
प्रभारी निरीक्षक बृजेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक, बस्ती के हल्लौर नगर निवासी मनोज कुमार व अजय कुमार चौधरी से ठगी की गई।
मनोज के मुताबिक, 2019 में वह दोस्त अजय कुमार के साथ आशियाना पावर स्थित जीवीकेईएमआरआई कंपनी के कार्यालय गए थे, जहां उनकी मुलाकात निदेशक कालिंदनी कृष्णम राजू, यूपी प्रभारी एसके रेड्डी, एचआर हेड लिंगराज और कमला कन्नन सुंदरम से हुई थी।
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मनोज के मुताबिक, बातचीत के बाद उन्हें इमरजेंसी टेक्नीशियन और अरविंद को एंबुलेंस चालक के पद पर भर्ती की बात कही गई थी। शैक्षिक दस्तावेज देखने के साथ इंटरव्यू भी लिया था।
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दावा था कि पांच दिन के प्रशिक्षण के बाद नियुक्ति मिल जाएगी। इसके बदले मनोज से 40 हजार और अरविंद से 25 हजार का डिमांड ड्राफ्ट लिया गया था।
मेडिकल टेक्नीशियन के लिए वेतन 18700 रुपये और एंबुलेंस चालक के लिए 10700 रुपये बताया गया था। मनोज के मुताबिक, जनवरी में प्रशिक्षण हुआ था। इस दौरान प्रशिक्षक जीवी रमन्ना राव ने जानकारी दी थी कि एंबुलेंस सेवा में नियुक्ति होने के बाद किसी को भी निकाला नहीं जाता है।

प्रशिक्षण के बाद दिया था प्रमाण पत्र
मनोज के मुताबिक, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन के पद पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद एक प्रमाण पत्र भी दिया गया। लेकिन डेढ़ साल बाद भी नौकरी नहीं मिली। इस पर जब कंपनी के हेड एसके रेड्डी से बात की तो उन्होंने कुछ दिनों में नियुक्ति का आश्वासन दिया। अगस्त में मनोज व अरविंद कंपनी के दफ्तर गए थे, जहां एसके रेड्डी ने एक साल तक नौकरी नहीं मिलने की बात कही। इस पर युवकों ने रकम लौटाने को कहा तो धमकाने लगे। पीड़ितों के मुताबिक, आशियाना थाने में तहरीर लेने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट में अर्जी डाली थी।
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