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नगर निगम के 36 संविदा कर्मियों का ईपीएफ का रुपया हड़पा, एंजेंसी पर मुकदमा दर्ज
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एजेंसी के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
आयुष्मान पांडेय
नगर निगम के संविदा कर्मचारियों का ईपीएफ का रुपया हड़पने का आरोप लगाते हुए एजेंसी प्रिया इंटरप्राइजेज के प्रबंधक उमाकांत पर पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जोन-8 के कर्मचारियों ने हजरतगंज थाने में तहरीर दी। जिसमें 36 कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ईपीएफ का रुपया कार्यदायी संस्थान प्रिया इंटरप्राइजेज ने हड़प लिया है।
पीड़ित उमेश कुमार स्वर्णकार के मुताबिक, वह कई साल से निगम में संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर रहें हैं।
इस दौरान कई एजेंसी बदलीं। इसी बदलाव में संविदा कर्मचारियों को नरही स्थित प्रिया इंटरप्राइजेज के जरिए वेतन व ईपीएफ भुगतान के लिए काम दिया गया।
तभी से ईपीएफ नहीं जमा हो रहा था। ऐसे में उमेश के साथ कई कर्मचारियों ने जानकारी की तो पता चला की एजेंसी की तरफ से ही नहीं जमा किया जा रहा।
जोन-8 के कर्मचारियों ने एजेंसी के खिलाफ नगर आयुक्त व महापौर से शिकायत की, पर मामला सिफर रहा। दो साल बाद एक कर्मचारी का 34 हजार रुपये ईपीएफ है। इस तरह 36 कर्मचारियों का मिलाकर 12 लाख 32 हजार रुपये ईपीएफ हो रहा है।
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270 कर्मचारियों का 92 लाख रुपये हड़पने का आरोप
उमेश का आरोप है कि नगर निगम में करीब 270 संविदाकर्मी हैं। उनका ईपीएफ भी इसी कंपनी द्वारा जमा कराया जाता है। इन सभी का पैसा फंसा है, लेकिन वह नौकरी खोने के डर से आवाज नहीं उठा रहे हैं। अगर सभी का देखे तो एजेंसी ने 92.45 लाख रुपये ईपीएफ का रुपया हड़प लिया। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है।
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नगर निगम के संविदा कर्मचारियों का ईपीएफ का रुपया हड़पने का आरोप लगाते हुए एजेंसी प्रिया इंटरप्राइजेज के प्रबंधक उमाकांत पर पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जोन-8 के कर्मचारियों ने हजरतगंज थाने में तहरीर दी। जिसमें 36 कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ईपीएफ का रुपया कार्यदायी संस्थान प्रिया इंटरप्राइजेज ने हड़प लिया है।
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पीड़ित उमेश कुमार स्वर्णकार के मुताबिक, वह कई साल से निगम में संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर रहें हैं।
इस दौरान कई एजेंसी बदलीं। इसी बदलाव में संविदा कर्मचारियों को नरही स्थित प्रिया इंटरप्राइजेज के जरिए वेतन व ईपीएफ भुगतान के लिए काम दिया गया।
तभी से ईपीएफ नहीं जमा हो रहा था। ऐसे में उमेश के साथ कई कर्मचारियों ने जानकारी की तो पता चला की एजेंसी की तरफ से ही नहीं जमा किया जा रहा।
जोन-8 के कर्मचारियों ने एजेंसी के खिलाफ नगर आयुक्त व महापौर से शिकायत की, पर मामला सिफर रहा। दो साल बाद एक कर्मचारी का 34 हजार रुपये ईपीएफ है। इस तरह 36 कर्मचारियों का मिलाकर 12 लाख 32 हजार रुपये ईपीएफ हो रहा है।
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270 कर्मचारियों का 92 लाख रुपये हड़पने का आरोप
उमेश का आरोप है कि नगर निगम में करीब 270 संविदाकर्मी हैं। उनका ईपीएफ भी इसी कंपनी द्वारा जमा कराया जाता है। इन सभी का पैसा फंसा है, लेकिन वह नौकरी खोने के डर से आवाज नहीं उठा रहे हैं। अगर सभी का देखे तो एजेंसी ने 92.45 लाख रुपये ईपीएफ का रुपया हड़प लिया। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है।