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TRP Scam: सीबीआई करेगी टीआरपी घोटाले की जांच, योगी सरकार ने केंद्र को भेजी थी सिफारिश

Tue, 20 Oct 2020 11:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 20 Oct 2020 11:26 PM IST
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TRP Scam Case News: FIR filed in TRP scam case in Hazratganj.
- फोटो : ani

टीवी चैनलों द्वारा टीआरपी हासिल करने के लिए किए जा रहे फर्जीवाड़े की जांच अब सीबीआई करेगी। सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली में केस भी दर्ज कर लिया है। राजधानी के हजरतगंज थाने में विज्ञापन एजेंसी गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के क्षेत्रीय निदेशक कमल शर्मा ने शनिवार को इस मामले में केस दर्ज कराया था।

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प्रदेश सरकार ने इस एफआईआर के आधार पर मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। गौरतलब है कि टीआरपी में फर्जीवाड़े को लेकर मुंबई में तीन टीवी चैनलों और एक एंकर पर केस दर्ज किया गया है। इस विवाद के बाद टीआरपी मापने वाली संस्था ब्रॉडकास्टिंग ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने 12 हफ्तों के लिए टीआरपी पर रोक लगा दी है।
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यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी कर दी गई है। सीबीआई की दिल्ली ब्रांच ने अपने यहां मुकदमा दर्ज भी कर लिया है। गौरतलब है कि टीवी चैनलों की टीआरपी मापने में हुए खेल को लेकर दर्ज केस में लखनऊ पुलिस ने शासन से मांग की थी कि इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी या किसी सक्षम एजेंसी से कराई जाए।

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फर्जी टीआरपी बनाकर दर्शकों, विज्ञापनदाताओं, कंपनियों को ठगने का आरोप

पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय के अनुसार, विज्ञापन एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक कमल शर्मा ने एफआईआर में टीआरपी का फर्जीवाड़ा कर कुछ चैनलों की रेटिंग बढ़ाकर दिखाने और विज्ञापन प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।

एफआईआर के मुताबिक, देश में टीआरपी मापने का काम मुंबई के परेल स्थित ब्रॉडकास्टिंग ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) करता है। बार्क टीआरपी मापने के लिए 550 से अधिक चैनल मॉनीटर करता है। इसके लिए कुछ निश्चित घरों में पीपल्स मीटर डिवाइस इंस्टॉल करता है।

यह उपकरण किसी कार्यक्रम या चैनल के देखे जाने का आंकड़ा एकत्रित करता है। इसके आधार पर बार्क हर हफ्ते रेटिंग जारी करता है। वर्तमान में 30 हजार से अधिक मीटर लगे हैं। बार्क यह डाटा प्रोसेस करके मीडिया एजेंसी, मीडिया कंपनी, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसियों को देता है।

एफआईआर में कमल शर्मा ने आरोप लगाया है कि कुछ अज्ञात लोग, कुछ निश्चित चैनल और ब्रॉडकास्टिंग कंपनियां अज्ञात लोगों की सहायता से लोगों को खास चैनल अथवा कार्यक्रम देखने के लिए आर्थिक लाभ या अन्य लालच दिए जा रहे हैं, ताकि उनकी रेटिंग बढ़ाई जा सके।

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