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Lucknow News: हिस्ट्रीशीटर के दो मददगारों पर एफआईआर

Wed, 07 Feb 2024 03:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2024 03:54 AM IST
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FIR against two helpers of history sheeter
लखनऊ। तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले हिस्ट्रीशीटर लल्लन खान और उसके बेटे फराज खान को भगाने में मदद करने वाले दो लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें एक सूचना विभाग में कार्यरत कर्मचारी बताया जा रहा और दूसरा सरकारी होर्डिंग आदि लगाने का काम करता है। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी है।
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मलिहाबाद के मोहम्मदनगर में दो फरवरी की दोपहर जमीन विवाद में हिस्ट्रीशीटर लल्लन खान और उसके बेटे फराज ने साथी फुरकान व अशरफी के साथ मिलकर रिश्तेदार फरहीन, उनके बेटे हंजला व मुनीर ताज की गोली मारकर हत्या कर दी थी। फुरकान अभी गिरफ्त से दूर है। अन्य आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस की जांच में सामने आया कि लल्लन ने वारदात के बाद सूचना विभाग में कार्यरत बताए जा रहे शोभित को कॉल कर मदद मांगी थी। तब शोभित अपने साथी दीपक के साथ कार से माल पहुंचा था। यहां से उसने लल्लन व फराज को कार में बैठाकर इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर छोड़ा था। वहां से दोनों सीतापुर रोड गए और रोडवेज बस पकड़ ली थी। सीतापुर से मुरादाबाद के लिए दूसरी बस पर बैठ गए थे। एडीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों लोगों का नाम एफआईआर में बढ़ाया गया है।
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लल्लन की मेड इन चेकोस्लोवाकिया की लाइसेंसी रायफल पुलिस ने बरामद की थी। जिसकी फोरेंसिक टीम ने जांच की थी। एडीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि रायफल की जब जांच की गई तो उसमें एक गोली फंसी मिली। मतलब तीन गोलियां दागने के बाद चौथी गोली भी लोड की गई थी। मगर गोली फंसने की वजह से फायर नहीं किया जा सका।
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वारदात के वक्त फरहीन, हंजला व मुनीर के अलावा घर में फरीद व उनकी बहन भी मौजूद थीं। जब वह दोनों भीतर गए थे तभी आरोपी ने अन्य तीनों को गोली मारी थी। जब वह बाहर निकले तो रायफल तानी थी लेकिन गोली नहीं चल सकी थी। इस पर आरोपी भाग गए थे। जिस तरह से अब पता चला है कि गोली रायफल में फंस गई थी, उससे साफ है कि आरोपियों का इरादा फरीद व उनकी बहन को भी मारने का था।



विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने ऐसे लोगों की सूची तैयारी की थी, जिन्होंने आपराधिक केस दर्ज होने के बावजूद शस्त्र लाइसेंस बनवा रखा है। पुलिस ने इससे संबंधित रिपोर्ट प्रशासन को भेजी थी। जिससे इन लाइसेंसों का निरस्तीकरण किया जा सके। मगर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस एक बार फिर इसका सत्यापन करा रही है। ऐसे लोगों की संख्या तकरीबन 90 है, जिनका आपराधिक इतिहास बनता और बढ़ता गया लेकिन शस्त्र लाइसेंस बरकरार रहा। इसमें कुछ बड़े अपराधी जैसे सतीश, पंकज यादव और विजय शंकर हैं। तीनों नॉर्थ जोन के हैं। इनका लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास है।
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