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आरोपियों को क्लीनचिट देने वाले दरोगाओं के खिलाफ केस दर्ज, जांच में खेल कर लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट

Sat, 18 Aug 2018 03:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 18 Aug 2018 03:50 PM IST
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FIR against inspectors for carelessness in rape case
डेमो
लखनऊ के गोमतीनगर में युवती से रेप व अश्लीलता के मामले में आरोपियों को क्लीनचिट देकर फंसे दरोगा वीरेंद्र यादव और राय बहादुर सिंह के खिलाफ पद के दुरुपयोग और मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार करने की धारा में एफआईआर कराई गई है।
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पीड़िता के अधिवक्ता जीशान अख्तर सिद्दीकी ने बताया कि पीड़िता ने कोर्ट में अपने पिता सहित पांच लोगों के खिलाफ बयान दिया था। इसके बावजूद विवेचकों ने जांच में खेल करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
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प्रभारी निरीक्षक देवी प्रसाद तिवारी ने बताया कि आरोपी दरोगा वीरेंद्र यादव वर्तमान में चिनहट थाना में तैनात हैं जबकि राय बहादुर सिंह थाना से लाइन हाजिर हुए थे। फिलहाल उनकी तैनाती किसी अन्य थाना में है।
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प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि युवती अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई थी। उसके पिता ने प्रेमी के खिलाफ बहला-फुसलाकर भगाने का केस दर्ज करा दिया। हालांकि, बाद में युवती खुद ही कोर्ट पहुंच गई और उसने प्रेमी से शादी की बात कहते हुए पिता व उनके चार साथियों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। 
 

युवती बोली, वह पिता से डर कर चली गई थी

FIR against inspectors for carelessness in rape case
डेमो
युवती ने कहा कि वह घर से भागी नहीं थी। न ही उसे कोई भगाकर ले गया था। वह अपने पिता और उनके साथियों से डरकर चली गई थी। युवती के मुताबिक प्रॉपर्टी का काम करने वाले मो. तौहीद उर्फ चांद, मो. तौफीक, शहजादे व शादाब उर्फ भरोसे अक्सर उसके पिता से मिलने घर आते-जाते थे।

उसने चारों युवकों पर बुरी नजर रखने और छेड़छाड़ व रेप करने का आरोप भी लगाया। उसने पिता से शिकायत की तो वह आरोपियों का ही साथ देने लगे। इस पर वह घबराकर घर से भाग गई और अपने प्रेमी से विवाह कर लिया।

युवती ने कोर्ट में पिता व चारों प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ बयान दिया जिसके आधार पर रेप, अश्लील हरकतें सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले की विवेचना गोमतीनगर थाना में तैनात वीरेंद्र यादव व उनके बाद राय बहादुर सिंह ने की।

अधिवक्ता जीशान अख्तर का कहना है कि दोनों विवेचकों ने अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं किया। पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने जांच में फर्जी व मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार करके दोषियों को लाभ पहुंचाया और केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर दोनों के खिलाफ मंगलवार को गोमतीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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