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उपभोक्ता फोरम ने ठोका स्कूल पर 6 लाख का जुर्माना
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
Updated Sat, 02 Nov 2013 02:16 AM IST
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स्कूल की छत से गिरकर छात्र की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने स्कूल प्रबंधन को लापरवाही का दोषी ठहराया है।
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फोरम ने उसे 6 लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा बच्चे के घरवालों को 75,000 रुपये मेडिकल खर्च और 3,000 रुपये विधिक खर्च भी मिलेंगे। मामला पांच साल पहले का है।
उपभोक्ता फोरम प्रथम में कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी निवासी चंदन कुमार पमनानी ने शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके अनुसार उनका आठ साल का बेटा मोहित कृष्णानगर की सिटी मॉडर्न एकेडमी में कक्षा तीन का छात्र था।
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26 अगस्त 2008 को एक फोन कॉल से उन्हें सूचना मिली कि मोहित को चोट लग गई है। वे भागकर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि बच्चा छत से गिर गया है।
बच्चो को एक चपरासी के साथ निजी अस्पताल भेज दिया गया था। अस्पताल में स्कूल का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था।
निजी अस्पताल के मना करने पर मोहित को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। इस दौरान पुलिस ने भी मामला दर्ज करने में लापरवाही दिखाई।
बाद में एसपी के आदेश पर 30 अगस्त को एफआईआर दर्ज हो सकी। इस बीच, दो सितंबर को इलाज के बीच मोहित की मौत हो गई।
फोरम ने यह कमियां पाईं
फोरम ने पाया कि सुरक्षा के लिए छत पर बाउंड्री नहीं थी। वहीं, स्कूल प्रबंधन के बयान में भी विरोधाभास बना रहा।
स्कूल प्रबंधन का कहना था कि वह छत से गिरकर नहीं मेज से टकराकर घायल हुआ था।
एफिडेविड में कहा गया कि एसपी को झूठी कहानी सुनाकर एफआईआर के आदेश कराए गए। इतने गंभीर हादसे के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने अस्पताल तक जाना जरूरी नहीं पहुंचा।
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इससे पता चलता है कि किस तरह की लापरवाही की गई। घायल को अस्पताल ले जाने में भी देरी की गई।
इसकी वजह से उसकी हालत और गंभीर हो गई। इकलौता होने की वजह से वह अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा था।
परिस्थितियों को देखते हुए फोरम ने 6 लाख का मुआवजा, 75,000 रुपये मेडिकल खर्च और 3,000 रुपये विधिक खर्च के अदा करने के निर्देश दिए।
इस राशि का एक महीने के अंदर भुगतान करना होगा। इसके बाद 12 प्रतिशत की ब्याज के साथ राशि चुकानी होगी।
स्कूल नहीं टाल सकते जिम्मेदारी
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष विजय वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल परिसर में हादसे के लिए प्रबंधन ही जिम्मेदार है। हादसा मेज से टकराने से हुआ हो या गिरकर।
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इसमें स्कूल पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते। कोई भी कीमत घरवालों के दुख की भरपाई नहीं कर सकती। स्कूल प्रबंधन को सुरक्षा के उचित इंतजाम परिसर में करने चाहिए थे।
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