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Lucknow News: वित्तीय वर्ष समाप्त, छह करोड़ का बजट लैप्स
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लखनऊ। शहर में सड़कों को फिर से बनाने के साथ इनके गड्ढे भरने की जरूरत है। इसके लिए नगर निगम के पास पर्याप्त बजट नहीं है। हालांकि, इसके बावजूद 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब छह करोड़ रुपये का बजट पार्षदों, अधिकारियों और इंजीनियरों की लापरवाही से खर्च नहीं हो सका।
बचे बजट में से करीब डेढ़ करोड़ रुपये पार्षद कोटे और साढ़े चार करोड़ पैचवर्क मद के हैं। यह बजट अब लैप्स हो गया है। कोई बैक डेट में इन्हें जारी न कर पाए, इसके लिए नगर आयुक्त ने बजट रजिस्टरों को बंद कर कब्जे में ले लिया है। बीते वित्तीय वर्ष में पार्षदों को प्रति वार्ड 2.10 करोड़ रुपये का कोटा विकास कार्य कराने के लिए स्वीकृत किया गया था। गड्ढे भरने के 20 करोड़ का पुनरीक्षित बजट था।
...इसलिए बच गया पार्षदों का कोटा
नगर निगम के जानकार बताते हैं कि पार्षद वार्ड में 2.10 करोड़ रुपये से अधिक बजट के काम कराते हैं। उनका जोर इस पर रहता है कि जो भी काम हो वह विधायक, सांसद या महापौर कोटा या नगर निगम की सामान्य निधि से हो जाए और उनका कोटा कम खर्च हो। इससे उसे आखिरी समय में मनमर्जी से खर्च कर सकें। यही वजह है कि 31 मार्च की पूरी रात नगर निगम में विकास कार्य से जुड़ी फाइलों को पास करने का काम हुआ। लेखा विभाग, अभियंत्रण विभाग और अपर नगर आयुक्त व नगर आयुक्त कार्यालय में सुबह तक काम चला।
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बचे बजट में से करीब डेढ़ करोड़ रुपये पार्षद कोटे और साढ़े चार करोड़ पैचवर्क मद के हैं। यह बजट अब लैप्स हो गया है। कोई बैक डेट में इन्हें जारी न कर पाए, इसके लिए नगर आयुक्त ने बजट रजिस्टरों को बंद कर कब्जे में ले लिया है। बीते वित्तीय वर्ष में पार्षदों को प्रति वार्ड 2.10 करोड़ रुपये का कोटा विकास कार्य कराने के लिए स्वीकृत किया गया था। गड्ढे भरने के 20 करोड़ का पुनरीक्षित बजट था।
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...इसलिए बच गया पार्षदों का कोटा
नगर निगम के जानकार बताते हैं कि पार्षद वार्ड में 2.10 करोड़ रुपये से अधिक बजट के काम कराते हैं। उनका जोर इस पर रहता है कि जो भी काम हो वह विधायक, सांसद या महापौर कोटा या नगर निगम की सामान्य निधि से हो जाए और उनका कोटा कम खर्च हो। इससे उसे आखिरी समय में मनमर्जी से खर्च कर सकें। यही वजह है कि 31 मार्च की पूरी रात नगर निगम में विकास कार्य से जुड़ी फाइलों को पास करने का काम हुआ। लेखा विभाग, अभियंत्रण विभाग और अपर नगर आयुक्त व नगर आयुक्त कार्यालय में सुबह तक काम चला।
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