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Lucknow News: पीडीएफ और एक्सेल के फेर में फंसी 40 हजार बच्चों की सहायता राशि फंसी

Sat, 24 Oct 2026 01:49 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:49 AM IST
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Financial aid for 40,000 children stuck due to issues with PDF and Excel files
लखनऊ। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित करीब 40 हजार बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति और सहायता राशि का भुगतान इस बार अटक गया है। इसकी प्रमुख वजह स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों का ब्योरा और अभिभावकों के बैंक खातों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध नहीं कराई गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों से बच्चों व अभिभावकों के बैंक खाते सहित स्कूल की बैंक डिटेल एक्सेल फाइल में मांगी थी। हालांकि ज्यादातर स्कूल प्रबंधकों ने पीडीएफ और फोटो के रूप में जानकारी भेजी है। इससे विभाग को डाटा तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है। विभागीय स्तर पर पिछले तीन महीने में स्कूल प्रबंधकों को छह बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूलों की ओर से निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में कर्मचारियों को एक-एक बच्चे का ब्योरा देखकर उसे अलग से दर्ज करना पड़ रहा है। करीब 40 हजार बच्चों का डाटा इस तरह तैयार करना विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
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स्कूलों के बैंक खातों की जानकारी भी अधूरी
समस्या केवल बच्चों और अभिभावकों के विवरण तक ही सीमित नहीं है। कई स्कूल प्रबंधक अपने बैंक खाते का ब्योरा देने से भी बच रहे हैं। खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। बैंक विवरण और जरूरी डाटा अधूरा होने के कारण आरबीआई पोर्टल पर भी प्रक्रिया रुक जाती है। ऐसे में बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति और सहायता राशि जारी करने के लिए स्कूलों से निर्धारित प्रारूप में पूरा ब्योरा मिलना जरूरी है।
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इन बातों का भी रखें ध्यान
- बच्चे अभिभावक और स्कूल नाम के नाम की स्पेलिंग गलत न लिखें।
- स्कूल अपना बैंक खाता जरूर भेजें उसमें ही फीस की राशि मिलेगी।
-अभिभावक बैंक खाता अपडेट करवा लें।
-खाता संख्या सही भरें, आईएफएससी में जीरो और ओ को ध्यान से भरें।
बजट की नहीं है कमी- बीएसए
आरटीई के तहत करीब 40 हजार बच्चों की फीस का बजट आ गया है। बजट की कोई कमी नहीं है। पैसा स्कूलों की ओर से ब्योरा मिलने के बाद जारी किया जाएगा। सत्यापन में कई खामियां मिल रही हैं। स्कूलों को एक्सेल फाइल में ब्योरा देना होगा, उसी आधार पर भुगतान किया जाएगा।
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विपिन कुमार- बीएसए
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