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दवा कारोबारी हत्याकांड के खुलासे में नाकाम पुलिस ने लगाई फाइनल रिपोर्ट
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जानकीपुरम में दवा कारोबारी हत्याकांड के खुलासे में नाकाम पुलिस ने लगाई फाइनल रिपोर्ट
जानकीपुरम में दवा कारोबारी मुकेश मिश्रा की सनसनीखेज हत्या का राज आखिरकार राजधानी पुलिस नहीं सुलझा सकी।
करीब दो साल लंबी जांच, सीसीटीवी फुटेज, सैकड़ों मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और नारको टेस्ट के बाद भी पुलिस ऐसा एक भी सुराग नहीं ढूंढ सकी, जिससे हत्या की वजह या हत्यारों का पता चल सकता।
अंतत: दो जुलाई को पुलिस ने इस केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मुकेश के बड़े भाई व मुकदमे के वादी राकेश मिश्रा ने फाइनल रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में अपील की जाएगी।
जानकीपुरम निवासी व साठ फीटा रोड पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले मुकेश मिश्रा की हत्या जिस तरीके से हुई, उससे लग रहा था वारदात भाड़े के हत्यारों ने की है। उसे तीन गोलियां मारी गई थीं।
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तीनों सिर पर लगी थीं जिसे साफ था कि गोलियां चलाने वाले अपराधियों का निशाना बेहद सधा हुआ था। पुलिस ने संपत्ति के विवाद, पत्नी से तनातनी, नाजायज संबंध और रंजिशों की गहराई से पड़ताल की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
मुकेश के मोबाइल नंबर खंगालने पर भी कोई राज सामने नहीं आया। पुलिस ने विवेचना मुकेश के भाइयों और उसकी पत्नी के बीच संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्रित कर दी।
इसके लिए मुकेश की पत्नी सारिका, उसके भाई करुणेश, भाभी मधु, भतीजे प्रशांत और भांजे सुधांशु का नारको टेस्ट कराया गया।
मुकेश के परिवारीजनों ने सारिका पर ही हत्या कराने का शक जताया था। इसलिए उसके नारको टेस्ट के साथ ही ब्रेन मैपिंग भी कराई गई, लेकिन कोई सुराग नही मिल सका।
नारको टेस्ट में असफल होने के बाद से ही इस संदिग्ध मौत से राज उठने की संभावना खत्म हो गई थी। 12 दिन पहले पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट तैयार कर मुकेश के परिवारीजनों को सूचना दे दी।
यह था मामला
दवा कारोबारी मुकेश मिश्रा को 27 जुलाई 2017 की रात साठ फीटा रोड स्थित मेडिकल स्टोर बंद करके कार से घर जाते वक्त गोलियां मार दी थीं। मुकेश की कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी। घटनास्थल पहुंची पुलिस इसे सड़क हादसा बता रही थी। लहूलुहान मुकेश को अस्पताल ले जाया गया तो पता चला कि उसे तीन गोलियां मारी गई थीं। तीन अगस्त को उसने दम तोड़ दिया था। पत्नी सारिका ने संपत्ति विवाद में उसके बड़े भाई करुणेश पर हत्या कराने का आरोप लगाया था जबकि मुकेश का परिवार सारिका को ही संदिग्ध मान रहा था। मुकेश के नोएडा निवासी बड़े भाई राकेश मिश्रा ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।
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जानकीपुरम में दवा कारोबारी मुकेश मिश्रा की सनसनीखेज हत्या का राज आखिरकार राजधानी पुलिस नहीं सुलझा सकी।
करीब दो साल लंबी जांच, सीसीटीवी फुटेज, सैकड़ों मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और नारको टेस्ट के बाद भी पुलिस ऐसा एक भी सुराग नहीं ढूंढ सकी, जिससे हत्या की वजह या हत्यारों का पता चल सकता।
अंतत: दो जुलाई को पुलिस ने इस केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मुकेश के बड़े भाई व मुकदमे के वादी राकेश मिश्रा ने फाइनल रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में अपील की जाएगी।
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जानकीपुरम निवासी व साठ फीटा रोड पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले मुकेश मिश्रा की हत्या जिस तरीके से हुई, उससे लग रहा था वारदात भाड़े के हत्यारों ने की है। उसे तीन गोलियां मारी गई थीं।
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तीनों सिर पर लगी थीं जिसे साफ था कि गोलियां चलाने वाले अपराधियों का निशाना बेहद सधा हुआ था। पुलिस ने संपत्ति के विवाद, पत्नी से तनातनी, नाजायज संबंध और रंजिशों की गहराई से पड़ताल की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
मुकेश के मोबाइल नंबर खंगालने पर भी कोई राज सामने नहीं आया। पुलिस ने विवेचना मुकेश के भाइयों और उसकी पत्नी के बीच संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्रित कर दी।
इसके लिए मुकेश की पत्नी सारिका, उसके भाई करुणेश, भाभी मधु, भतीजे प्रशांत और भांजे सुधांशु का नारको टेस्ट कराया गया।
मुकेश के परिवारीजनों ने सारिका पर ही हत्या कराने का शक जताया था। इसलिए उसके नारको टेस्ट के साथ ही ब्रेन मैपिंग भी कराई गई, लेकिन कोई सुराग नही मिल सका।
नारको टेस्ट में असफल होने के बाद से ही इस संदिग्ध मौत से राज उठने की संभावना खत्म हो गई थी। 12 दिन पहले पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट तैयार कर मुकेश के परिवारीजनों को सूचना दे दी।
यह था मामला
दवा कारोबारी मुकेश मिश्रा को 27 जुलाई 2017 की रात साठ फीटा रोड स्थित मेडिकल स्टोर बंद करके कार से घर जाते वक्त गोलियां मार दी थीं। मुकेश की कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी। घटनास्थल पहुंची पुलिस इसे सड़क हादसा बता रही थी। लहूलुहान मुकेश को अस्पताल ले जाया गया तो पता चला कि उसे तीन गोलियां मारी गई थीं। तीन अगस्त को उसने दम तोड़ दिया था। पत्नी सारिका ने संपत्ति विवाद में उसके बड़े भाई करुणेश पर हत्या कराने का आरोप लगाया था जबकि मुकेश का परिवार सारिका को ही संदिग्ध मान रहा था। मुकेश के नोएडा निवासी बड़े भाई राकेश मिश्रा ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।