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यूपी में फिल्म सिटी उत्तर भारत के लिए बड़ी सौगात, जेवर एयरपोर्ट भी बनेगा मददगार
Sun, 20 Sep 2020 09:05 AM IST
शाहरुख खान
अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 20 Sep 2020 09:05 AM IST
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सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला।
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अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद बॉलीवुड में चल रही खेमेबंदी और उठापटक को देखते हुए यूपी सरकार की ओर से बड़ी फिल्म सिटी बनाने की घोषणा काफी कारगर साबित हो सकती है। सीएम योगी की घोषणा पर जिस तरह फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं।
फिल्म उद्योग से जुड़े लोग इसे उत्तर भारत के लिए बड़ी सौगात मान रहे हैं। हाल के दिनों में छोटे शहरों की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्में काफी सफल रही हैं।इस लिहाज से भी यूपी में फिल्म सिटी के लिए काफी संभावनाएं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यूपी में फिल्म सिटी बनने से प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत के नए कलाकारों को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
फिल्म निर्माता-निर्देशकों के लिए इसलिए भी मुफीद
फिल्म निर्माता-निर्देशकों को शूटिंग के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतें, उत्तराखंड की पहाड़ी वादियां और पंजाब के हरे-भरे खेत सहज ही आकर्षित करते हैं। आगरा का ताजमहल और आसपास का इलाका भी उन्हें लुभाता है।
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ऐसे में यमुना एक्सप्रेस-वे, ग्रेटर नोएडा व नोएडा के इर्द-गिर्द फिल्म सिटी बनने से निर्माता-निर्देशकों को उनकी पसंदीदा जगहों के लिए सीधा एप्रोच होने की वजह से उन्हें सुविधा रहेगी।
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फिल्म उद्योग से जुड़े लोग इसे उत्तर भारत के लिए बड़ी सौगात मान रहे हैं। हाल के दिनों में छोटे शहरों की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्में काफी सफल रही हैं।इस लिहाज से भी यूपी में फिल्म सिटी के लिए काफी संभावनाएं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यूपी में फिल्म सिटी बनने से प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत के नए कलाकारों को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
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फिल्म निर्माता-निर्देशकों के लिए इसलिए भी मुफीद
फिल्म निर्माता-निर्देशकों को शूटिंग के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतें, उत्तराखंड की पहाड़ी वादियां और पंजाब के हरे-भरे खेत सहज ही आकर्षित करते हैं। आगरा का ताजमहल और आसपास का इलाका भी उन्हें लुभाता है।
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ऐसे में यमुना एक्सप्रेस-वे, ग्रेटर नोएडा व नोएडा के इर्द-गिर्द फिल्म सिटी बनने से निर्माता-निर्देशकों को उनकी पसंदीदा जगहों के लिए सीधा एप्रोच होने की वजह से उन्हें सुविधा रहेगी।
लखनऊ, वाराणसी व आगरा में भी एक फिल्म सिटी की योजना
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से जुड़े नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे पर प्रस्तावित बड़ी फिल्म सिटी के अलावा लखनऊ, वाराणसी व आगरा में से किसी जगह एक अन्य छोटे आकार की फिल्म सिटी की स्थापना भी की जा सकती है। यह फिल्म सिटी 200-250 एकड़ में बनाने की योजना है।
आगरा में पहले एक फिल्म सिटी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए यूपीसीडा ने जमीन भी चिह्नित कर ली थी। इसका भी परीक्षण कराया जा रहा है। वाराणसी में पर्यटन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर फिल्म सिटी बनाने के संबंध में अध्ययन कराया जा रहा है। लखनऊ के आसपास भी स्थान देखा जा रहा है।
जल्द ही योगी से मिलेंगे फिल्म उद्योग से जुड़े लोग
सूत्रों के अनुसार फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर प्रस्तावित फिल्म सिटी के प्रारूप पर चर्चा करेगा। इसमें निर्माता, निर्देशक, कलाकार तथा फिल्म निर्माण से संबंधित अन्य लोग शामिल होंगे। इनके सुझावों के आधार पर फिल्म सिटी को मूर्त रूप दिया जाएगा।
जेवर एयरपोर्ट भी बनेगा मददगार
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि दिल्ली से नजदीक होने के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा या यमुना एक्सप्रेस-वे पर फिल्म सिटी का निर्माण तो फायदेमंद रहेगा ही, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इसमें खासा मददगार साबित होगा।
आगरा में पहले एक फिल्म सिटी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए यूपीसीडा ने जमीन भी चिह्नित कर ली थी। इसका भी परीक्षण कराया जा रहा है। वाराणसी में पर्यटन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर फिल्म सिटी बनाने के संबंध में अध्ययन कराया जा रहा है। लखनऊ के आसपास भी स्थान देखा जा रहा है।
जल्द ही योगी से मिलेंगे फिल्म उद्योग से जुड़े लोग
सूत्रों के अनुसार फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर प्रस्तावित फिल्म सिटी के प्रारूप पर चर्चा करेगा। इसमें निर्माता, निर्देशक, कलाकार तथा फिल्म निर्माण से संबंधित अन्य लोग शामिल होंगे। इनके सुझावों के आधार पर फिल्म सिटी को मूर्त रूप दिया जाएगा।
जेवर एयरपोर्ट भी बनेगा मददगार
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि दिल्ली से नजदीक होने के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा या यमुना एक्सप्रेस-वे पर फिल्म सिटी का निर्माण तो फायदेमंद रहेगा ही, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इसमें खासा मददगार साबित होगा।
फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने को कई सहूलियतें
नई फिल्म नीति के तहत प्रदेश में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई सहूलियतें दी जा रही हैं। प्रदेश में बनने वाली हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों को लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम दो करोड़ रुपये अनुदान दिया जाता है।
क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। फिल्म में अगर प्रदेश के पांच कलाकार हैं तो 25 लाख रुपये अतिरिक्त व सभी कलाकार प्रदेश के हैं तो 50 लाख रुपये अतिरिक्त देने का प्रावधान है। इसके अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी गठित है। पर्यटन विभाग के होटलों व अन्य संपत्तियों में 25 प्रतिशत छूट की व्यवस्था है।
हर साल 150 से 200 करोड़ खर्च
प्रदेश में फिल्म निर्माण पर हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। फिल्म बंधु के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में डेढ़ करोड़ से लेकर 40-50 करोड़ रुपये तक के बजट की फिल्मों का निर्माण हो रहा है। योगी सरकार में 2017 से लेकर अब तक 38 फिल्मों को लगभग 21 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। फिल्म में अगर प्रदेश के पांच कलाकार हैं तो 25 लाख रुपये अतिरिक्त व सभी कलाकार प्रदेश के हैं तो 50 लाख रुपये अतिरिक्त देने का प्रावधान है। इसके अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी गठित है। पर्यटन विभाग के होटलों व अन्य संपत्तियों में 25 प्रतिशत छूट की व्यवस्था है।
हर साल 150 से 200 करोड़ खर्च
प्रदेश में फिल्म निर्माण पर हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। फिल्म बंधु के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में डेढ़ करोड़ से लेकर 40-50 करोड़ रुपये तक के बजट की फिल्मों का निर्माण हो रहा है। योगी सरकार में 2017 से लेकर अब तक 38 फिल्मों को लगभग 21 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।