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सचिवालय से ही गायब हो गईं प्रमोशन की फाइलें, तीन समीक्षा अधिकारियों पर हुई ये कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 08 Apr 2018 10:28 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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सचिवालय में लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग में प्रोन्नतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण व गोपनीय फाइलें गायब हो गईं। अनुभाग अधिकारी महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने तत्कालीन समीक्षा अधिकारी ओमप्रकाश शर्मा, रमेश कुमार विश्वकर्मा और दीप नारायन दीक्षित पर फाइलें गायब करने और लापरवाही का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सचिवालय से फाइलें गायब होने का मामला लगभग ढाई दशक पुराना है लेकिन अधिकारी इसे दबाए बैठे थे। विभाग के ही कुछ लोगों की शिकायत पर मामले ने तूल पकड़ा। इस मामले को लेकर कोर्ट में वाद भी चल रहा है। कोर्ट ने मामले में केस दर्ज कराने और विभाग के अधिकारियों को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन अधिकारियों ने सुध नहीं ली।
हाल ही में कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी तो हड़कंप मच गया। विभागीय पड़ताल में खुलासा हुआ कि फाइलों की देखरेख की जिम्मेदारी तत्कालीन समीक्षा अधिकारी ओमप्रकाश शर्मा, रमेश कुमार विश्वकर्मा और दीप नारायन दीक्षित की थी। कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों ने आनन-फानन केस दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी गई।
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इंस्पेक्टर आनंद कुमार शाही ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। फाइलें कितनी, कब और कैसे गायब हुईं? इससे किसे लाभ अथवा हानि हो रही थी? इसकी जांच के लिए जल्द ही विवेचनाधिकारी को सचिवालय भेजा जाएगा। जिन अधिकारियों पर केस है संभवत: वह रिटायर हो चुके हैं। उनसे भी पुलिस संपर्क करने की कोशिश कर रही है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, सचिवालय से फाइलें गायब होने का मामला लगभग ढाई दशक पुराना है लेकिन अधिकारी इसे दबाए बैठे थे। विभाग के ही कुछ लोगों की शिकायत पर मामले ने तूल पकड़ा। इस मामले को लेकर कोर्ट में वाद भी चल रहा है। कोर्ट ने मामले में केस दर्ज कराने और विभाग के अधिकारियों को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन अधिकारियों ने सुध नहीं ली।
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हाल ही में कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी तो हड़कंप मच गया। विभागीय पड़ताल में खुलासा हुआ कि फाइलों की देखरेख की जिम्मेदारी तत्कालीन समीक्षा अधिकारी ओमप्रकाश शर्मा, रमेश कुमार विश्वकर्मा और दीप नारायन दीक्षित की थी। कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों ने आनन-फानन केस दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी गई।
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इंस्पेक्टर आनंद कुमार शाही ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। फाइलें कितनी, कब और कैसे गायब हुईं? इससे किसे लाभ अथवा हानि हो रही थी? इसकी जांच के लिए जल्द ही विवेचनाधिकारी को सचिवालय भेजा जाएगा। जिन अधिकारियों पर केस है संभवत: वह रिटायर हो चुके हैं। उनसे भी पुलिस संपर्क करने की कोशिश कर रही है।