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आईपीएस अफसरों के वाट्सएप ग्रुप में घमासान, एक दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप
Thu, 03 Jan 2019 10:28 PM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: MANISH sachan
Updated Thu, 03 Jan 2019 10:28 PM IST
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व्हाट्सएप के स्क्रीनशॉट
हाल ही में सीबीआई के शीर्ष अफसरों में जिस तरह की लड़ाई और अहम का टकराव का वाकया सामने आया, कुछ ऐसी ही जुबानी जंग प्रदेश के आईपीएस अफसरों के बीच शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट के अनुसार प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस सेवा के यूपी के ये अफसर अपने व्हॉट्सएप ग्रुप में एक-दूसरे के आचरण में कीचड़ उछाल रहे हैं।
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एक दूसरे की कारगुजारियों को अपने अहम को संतुष्ट करने और फायदा पाने के लिए प्रसारित कर रहे हैं। स्थिति ऐसी हो गई कि आईपीएस अफसर विनोद कुमार सिंह को ग्रुप में यह मैसेज करना पड़ा- ‘किसी को नीचा दिखा के, उसके आचरण और समर्पण पर प्रहार करना... अपने को अच्छा बताने के लिए दूसरे अधिकारियों पर बिलो द बेल्ट (अस्वीकार्य व अन्यायपूर्ण) वार करना, महिलाओं के बारे में टिप्पणी करना... ये क्या है...’
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आप खुद देखिये, किस तरह टिप्पणियां कर रहे हमारे वरिष्ठ पुलिस अफसर
1. व्यक्तिगत नाराजगी एसीआर पर क्यों उतारते हो : दीपक कुमार
व्हॉट्सएप पर चले रहे स्क्रीनशॉट्स के अनुसार आईपीएस दीपक कुमार इस लड़ाई में कूदे और कहा कि अफसरों को सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सुझाव दिया कि एसपी की एसीआर में एडीजी या आईजी जोन का भी कॉलम होना चाहिए। अपनी व्यथा रखते हुए कुमार ने कहा कि ‘व्यक्तिगत नाराजगी के कारण किसी अधिकार को एसीआर की समस्या न उठानी पड़े।’
2. जिन पर चरित्र हनन के आरोप वे तो एसीआर न ही लिखें
दीपक कुमार ने जयनारायण सिंह का नाम लिए बिना लिखा कि पुलिस के जिन अधिकारियों पर चारित्रिक हनन के आरोप लगे हों, जिनकी प्रतिष्ठा उत्तम कोटि की न हो, उन्हें एसीआर लिखने का अधिकार नहीं होना चाहिए।’
3. ‘वीडियो से आईपीएस की गरिमा-मर्यादा भंग की’
इस ग्रुप पर डाले गए एक वीडियो को आपत्तिजनक करार देते हुए दीपक कुमार ने यह भी कहा कि इस एक वर्ष पुराने वीडियो से आईपीएस अधिकारियों के ग्रुप की गरिमा और मर्यादा को भंग किया जा रहा है, यह आईपीएस विचारधारा के विरुद्ध है।
व्हॉट्सएप पर चले रहे स्क्रीनशॉट्स के अनुसार आईपीएस दीपक कुमार इस लड़ाई में कूदे और कहा कि अफसरों को सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सुझाव दिया कि एसपी की एसीआर में एडीजी या आईजी जोन का भी कॉलम होना चाहिए। अपनी व्यथा रखते हुए कुमार ने कहा कि ‘व्यक्तिगत नाराजगी के कारण किसी अधिकार को एसीआर की समस्या न उठानी पड़े।’
2. जिन पर चरित्र हनन के आरोप वे तो एसीआर न ही लिखें
दीपक कुमार ने जयनारायण सिंह का नाम लिए बिना लिखा कि पुलिस के जिन अधिकारियों पर चारित्रिक हनन के आरोप लगे हों, जिनकी प्रतिष्ठा उत्तम कोटि की न हो, उन्हें एसीआर लिखने का अधिकार नहीं होना चाहिए।’
3. ‘वीडियो से आईपीएस की गरिमा-मर्यादा भंग की’
इस ग्रुप पर डाले गए एक वीडियो को आपत्तिजनक करार देते हुए दीपक कुमार ने यह भी कहा कि इस एक वर्ष पुराने वीडियो से आईपीएस अधिकारियों के ग्रुप की गरिमा और मर्यादा को भंग किया जा रहा है, यह आईपीएस विचारधारा के विरुद्ध है।
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सुलह की कोशिश भी...
आईपीएस अफसर विनोद लिखा कि जब तक हम (पुलिस अधिकारी) प्रेमपूर्वक एक परिवार की तरह आचरण नहीं करेंगे’ यह होता रहेगा। हम जो करते हैं, कहते हैं, वह पूरी व्यवस्था पर असर डालता है। आइए अच्छे इन्सान और वयस्क अधिकारियों की तरह व्यवहार करें।
प्रतिक्रियाएं
मैंने चीजें साझा कीं, टिप्पणी नहीं
‘गोपनीय दस्तावेजों के बारे में मेरी कोई टिप्पणी नहीं है। जब मेरे ऊपर निजी टिप्पणी की गई तो उसके जवाब में मैंने भी ग्रुप पर कुछ चीजों को साझा किया। उसके बाद मेरी ओर से कोई टिप्पणी भी नहीं की गई।’
- जय नारायण सिंह, पूर्व आईजी, लखनऊ। (मौजूदा आईजी गोरखपुर)
मुझे किसी से शिकायत नहीं
‘हम लोगों के आपसी विचार विमर्श के लिए ग्रुप हैं। मुझे मेरे पूर्व आईजी जय नारायण सिंह समेत किसी आईपीएस अधिकारी से कोई शिकायत नहीं है।’
- दीपक कुमार, पूर्व एसएसपी लखनऊ (मौजूदा कमांडेंट 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद)
नो कमेंट्स
इस बारे में मेरी ओर से कोई टिप्पणी नहीं।
- अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव गृह
‘गोपनीय दस्तावेजों के बारे में मेरी कोई टिप्पणी नहीं है। जब मेरे ऊपर निजी टिप्पणी की गई तो उसके जवाब में मैंने भी ग्रुप पर कुछ चीजों को साझा किया। उसके बाद मेरी ओर से कोई टिप्पणी भी नहीं की गई।’
- जय नारायण सिंह, पूर्व आईजी, लखनऊ। (मौजूदा आईजी गोरखपुर)
मुझे किसी से शिकायत नहीं
‘हम लोगों के आपसी विचार विमर्श के लिए ग्रुप हैं। मुझे मेरे पूर्व आईजी जय नारायण सिंह समेत किसी आईपीएस अधिकारी से कोई शिकायत नहीं है।’
- दीपक कुमार, पूर्व एसएसपी लखनऊ (मौजूदा कमांडेंट 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद)
नो कमेंट्स
इस बारे में मेरी ओर से कोई टिप्पणी नहीं।
- अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव गृह
ग्रुप में गृह विभाग की रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद
विवाद प्रमुख गृह की एक रिपोर्ट को लेकर हुई। इसे आईपीएस अफसर आदित्य मिश्रा ने आईपीएस अफसरों के ग्रुप पर साझा किया। रिपोर्ट में दीपक कुमार और जेएन सिंह के वर्ष 2017-18 के दौरान हुए तबादलों में एक -दूसरे की भूमिका को लेकर संकेत है। इसी के बाद से टिप्पणियां शुरू हो गईं।