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अमेठी में एक राजा की दो रानियों के बीच मुकाबला, किसे चुनेगी जनता?

Tue, 28 Feb 2017 04:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 28 Feb 2017 04:46 PM IST
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 fight between amita singh and garima singh in amethi
अमिता सिंह व गरिमा सिंह (इनसेट में संजय ‌सिंह) - फोटो : amar ujala
अमेठी राजघराने में मचा घमासान सियासी रंग ले चुका है। यह पहला मौका है कि जब एक राजा की दो रानियां राजमहल और राजनीतिक विरासत के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं और एक-दूसरे को चुनौती दे रही हैं।
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रानी के साथ भाजपा खड़ी है तो पटरानी के साथ कांग्रेस। दोनों रानियां कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह की हैं। पहली पत्नी गरिमा सिंह को भाजपा ने मैदान में उतारा है तो दूसरी पत्नी अमीता सिंह कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोकने उतरी हैं।
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देखने वाली बात यह है कि रानी-पटरानी में कौन किस पर भारी पड़ता है। वैसे तो अमेठी गांधी परिवार का परंपरागत सियासी गढ़ होने के नाते हमेशा चर्चा में रहता है और हर चुनाव में देश-दुनिया की निगाहें इस सीट पर लगी रहती है लेकिन इस बार राजघराने की दोनों रानियों के आमने-सामने होने से यह सीट और भी अहम हो गई है।
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 fight between amita singh and garima singh in amethi
गर‌िमा स‌िंह
गरिमा सिंह जहां अपना स्वाभिमान हासिल करने की मंशा से सियासी समर में आगे आई हैं वहीं अमीता सिंह संजय सिंह की सियासी विरासत पर अपना दावा बरकरार रखने के लिए मैदान में हैं।

 सपा से गठबंधन के बाद टिकट न मिलने की आशंका को देखते हुए अमीता ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद संजय सिंह ने कांग्रेस हाईकमान पर दबाव डालकर अमीता का टिकट फाइनल कराया। 

कांग्रेस खासकर गांधी परिवार के सियासी गढ़ में सेंधमारी के लिए भाजपा ने अमेठी राजपरिवार को ही हथियार बनाया है। भाजपा ने संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह को टिकट देकर बड़ा दांव चला तो कांग्रेस ने भाजपा के  इस दांव को विफल करने के  लिए अमीता को आगे कर दिया है।

 

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गायत्री

2012 में सपा के गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अमीता सिंह को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था। इस बार गठबंधन में भी यह सीट सपा कोटे में गई है लेकिन अमीता की जिद केचलते कांग्रेस को उन्हें टिकट देना पड़ा। अत: गठबंधन के बावजूद इस सीट पर सपा और कांग्रेस के बीच दोस्ताना मुकाबले के आसार बन गए हैं।

गरिमा सिंह पहली बार लड़ रही हैं। उन्हें संजय सिंह ने 1995 में तलाक दे दिया। उसके बाद 19 साल तक उन्हें राजमहल में घुसने नहीं दिया गया। काफी जद्दोजहद के बाद गरिमा 2014 में अपने बेटे के साथ महल में आने में कामयाब हुईं। अब वह अपने स्वाभिमान के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं।

दूसरी तरफ अमीता सिंह सियासत का जाना-पहचाना चेहरा बन चुकी हैं। अमीता विधायक के साथ-साथ मंत्री भी रह चुकी हैं। राजपरिवार की विरासत को लेकर चल रहे आपसी संघर्ष में परिवार बंट चुका है। संजय सिंह अमीता के साथ मजबूती से खड़े हैं तो उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह के साथ उनका बेटा अनंत विक्रम सिंह है।

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