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Lucknow News: भ्रूण को खून चढ़ाकर बचाया, क्वीन मेरी में पहली बार हुआ फेटल ब्लड ट्रांसफ्यूजन

Wed, 11 Sep 2024 06:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 06:53 PM IST
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Fetus saved by blood transfusion, first fetal blood transfusion in Queen Mary

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लखनऊ। केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) के डॉक्टरों ने भ्रूण को खून चढ़ाकर उसकी जान बचाने में सफलता हासिल की है। संस्थान में पहली बार फेटल ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया है। खून चढ़ने के बाद सिजेरियन प्रसव से महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

क्वीन मेरी की डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि उन्नाव के आदर्श नगर निवासी गर्भवती प्रतिमा वर्मा का इलाज कानपुर में चल रहा था। गर्भ के सातवें महीने में भ्रूण की जांच में पाया गया कि खून की कमी से बच्चे को एनीमिया हो गया है। इस पर क्वीन मेरी रेफर किया गया। केस हिस्ट्री से पता चला कि इससे पहले दो बार महिला ने गर्भधारण किया था, लेकिन दोनों ही बार में कुछ ही सप्ताह में भ्रूण जीवित नहीं बचा।
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निगेटिव ब्लड ग्रुप था महिला का

डॉ. सीमा ने बताया कि महिला का ब्लड ग्रुप निगेटिव और उसके पति का पॉजीटिव था। अलग ब्लड ग्रुप होने से भ्रूण में एंटीबॉडी बन गई। इस वजह से उसकी लाल रक्त कणिकाएं नष्ट हो गईं और उसे एनीमिया हो गया। ऐसे में बच्चे को हार्ट अटैक का खतरा देखते हुए उसे गर्भ में ही खून चढ़ाने का फैसला किया गया। प्रतिमा खुद नर्स हैं। उन्होंने इसकी सहमति दे दी। पहली बार 23 जुलाई तथा दूसरी बार दो अगस्त को खून चढ़ाया गया। फिर 19 अगस्त को भर्ती करके 20 अगस्त को प्रसव कराया गया।
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डॉ. नम्रता कुमार ने बताया कि गर्भ में खून चढ़ाने के लिए ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। महिला के पेट से महीन सुई के माध्यम से खून चढ़ाने का काम होना था। इस वजह से अल्ट्रासाउंड का सहारा लिया गया। अल्ट्रासाउंड से देखा गया कि खून भ्रूण में ही जा रहा है।


डॉ. मंजुलता वर्मा ने बताया कि आमतौर पर 1200 प्रसूताओं में किसी एक को इस तरह का खतरा होता है। जिन केस में प्रसूता का ब्लड ग्रुप निगेटिव होता है, उनमें 300 माइक्रोग्राम एनटीडी इम्युनोग्लोबिन इंजेक्शन गर्भ के सातवें महीने में दिया जाता है। इससे पहले हर महीने जांच कराई जाती है, क्योंकि एक बार बच्चे को एनीमिया होने पर यह इंजेक्शन काम नहीं करता। डॉ. सीमा मेहरोत्रा, डॉ. नम्रता, डॉ. मंजूलता वर्मा, रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ, डॉ. सिद्धार्थ, बाल रोग विभाग की डॉ. हरकीरत कौर, डॉ. श्रुति और डॉ. ख्याति मौजूद रहीं। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्र ने ओ-नेगेटिव खून उपलब्ध कराया।
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