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कागजों पर कारोबार, डकारे एक अरब रूपये
नरेश शर्मा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 02 Jun 2014 10:08 AM IST
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बगैर अनाज की खरीद फरोख्त के ही कागजों पर एक अरब रुपये के अनाज के कारोबार का फर्जीवाड़ा सामने आया है।
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वाणिज्य कर महकमे की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन ब्रांच ने जांच में पाया कि राजधानी की फर्म राम चंदर कॉर्पोरेशन ने मूंगफली भूनने की दुकान और मिसराज ट्रेडर्स ने एक साल में 50-50 करोड़ रुपये का कारोबार करने का दावा किया।
ऐसा करके सरकारी खजाने से चार करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) के क्लेम को हजम करने के ताना-बाना बुना था।
आईटीसी हजम करने के लालच में फर्म मालिक तो फंसे ही उनसे इनवॉइस लेने वाले करीब 400 कारोबारी भी फंस गए।
वाणिज्य कर आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण को इस गोरखधंधे की शिकायत मिली थी।
आयुक्त के निर्देश पर लखनऊ जोन की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन ब्रांच टीम ने फर्म त्रिवेणीनगर की रामचंदर कॉर्पोरेशन और मारुतिपुरम की मिसराज की जांच की। टीम ने यह जांच 100 दिन में पूरी करके 31 मई को रिपोर्ट सीनियर अफसरों को सौंप दी है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार त्रिवेणीनगर स्थित राम चंदर कॉर्पोरेशन फर्म स्थल सर्वे में खुलासा हुआ कि मालिक राकेश गुप्ता ने फर्म का दफ्तर जिस मकान में दिखाया था उसको 11 महीने के लिए किराए पर लिया था।
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राकेश ने इस मकान से ही वर्ष 2013-14 में 50 करोड़ रुपये का अनाज, तिलहन, दलहन कारोबार करने का रिटर्न फाइल किया था। लेकिन जब फर्म के सुभाष मार्ग पर ब्रांच दफ्तर का सर्वे हुआ तो ब्रांच पते पर मूंगफली भूनने की दुकान पाई गई।
जानिए क्या है आईटीसी
कारोबारी को माल खरीदते वक्त टैक्स चुकाना पड़ता है। यही माल जब कारोबारी दूसरे खरीदार को बेचता है तो चुकाए गए टैक्स को वापस पाने के लिए जो क्लेम फाइल किया जाता है उसे आईटीसी क्लेम कहते हैं।
ठेकेदारी रजिस्ट्रेशन का, कारोबार अनाज का फैजाबाद रोड स्थित मारुतिपुरम के पते पर वाल्मीकि मिश्रा ने मिसराज ट्रेडर्स का रजिस्ट्रेशन ठेकेदारी करने के लिए कराया था।
लेकिन वाणिज्य कर अफसरों की साठगांठ से ठेकेदारी की फर्म में अनाज कारोबार करना गुपचुप जुड़वा लिया।
इस फर्म के कारोबारी स्थल की जांच की गई तो गली में स्थित छोटे से कमरे से वित्तीय वर्ष 2013-14 में 50 करोड़ रुपये के अनाज खरीद फरोख्त करके उसका टर्नओवर वाणिज्य कर महकमे में दाखिल किया।
इस फर्म की मंडी परिषद में दुकान तक नहीं और न ही किसान से अनाज की खरीद पर मंडी शुल्क को चुकाना पाया है।
कारोबारियों का नहीं अता-पता
वाणिज्य कर अफसरों की टीम ने दो महीने तक इस फर्जीवाड़े की जांच की। जांच से पहले फर्म के दोनो कारोबारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया।
नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर जांच टीम मौका मुआयना किया तब भी कारोबारियों का पता नहीं चला।
जांच के दौरान पाया गया कि रामचंदर कॉर्पोरेशन फर्म का जो स्थायी पता था वह मकान बिक चुका है। राम चंदर कॉर्पोरेशन फर्म ने उस मकान को 11 महीने के अनुबंध पर किराए पर लिया था।
टैक्स इनवॉइस बेचने का खेल
जांच टीम ने दोनो फर्म के दस्तावेज, कारोबारी रिटर्न और टैक्स इनवॉइस को खंगाला तो टिन नंबर से टैक्स इनवॉइस बेचने के खेल से पर्दा उठा।
जांच टीम की माने तो मिसराज फर्म के मालिक वाल्मीकि मिश्रा ने बलरामपुर जिले की जिस फर्म से 40 करोड़ के अनाज की खरीद दिखाई, उसने कोई बिक्री नहीं दिखाई है।
यही खेल राम चंदर कॉर्पोरेशन के राकेश गुप्ता ने खेला। दोनों फर्मों ने करीब 400 कारोबारियों को टैक्स इनवॉइस बेची और वे सब फंसे गए।